खरसिया/रायगढ़। रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में हुई एक युवक की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। ग्राम पारसकोल निवासी 29 वर्षीय रमेश चौहान की मौत के बाद क्षेत्र में गुस्से का ज्वार उमड़ पड़ा है। परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग को लेकर जोरदार आंदोलन छेड़ दिया है। चौहान समाज के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यह मामला अब सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि न्याय और व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालों का प्रतीक बन गया है। पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है और लोगों के भीतर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
पुलिस हिरासत में क्या हुआ रमेश के साथ?
मृतक रमेश चौहान को पुलिस ने एक हत्या के मामले में संदिग्ध के रूप में पूछताछ के लिए खरसिया थाने लाया था। परिजनों का आरोप है कि 1 और 2 मार्च 2026 को पुलिस ने रमेश को हिरासत में रखकर बेरहमी से पीटा। आरोप है कि पूछताछ के नाम पर रमेश को इतनी बुरी तरह प्रताड़ित किया गया कि उसका शरीर जवाब देने लगा।
मृतक की पत्नी किरन चौहान ने रायपुर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि पुलिसकर्मियों ने रमेश के पेट, सीने, सिर और पैरों के तलवों पर गंभीर मारपीट की। आरोप है कि मारपीट इतनी क्रूर थी कि रमेश का आधा शरीर लगभग सुन्न पड़ गया था और वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था।
परिजनों का कहना है कि पुलिस ने रमेश को बुरी तरह घायल करने के बाद मामले को छिपाने की कोशिश की। बाद में पुलिस ने गांव के सरपंच को फोन कर सूचना दी कि रमेश की तबीयत अचानक खराब हो गई है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अस्पतालों के चक्कर और बढ़ती हालत
सूचना मिलते ही रमेश के परिजन और ग्राम पंचायत के सरपंच खरसिया अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी हालत बेहद गंभीर बताई और तत्काल उसे रायगढ़ रेफर करने की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान पुलिस ने उनसे जबरन सुपुर्दनामा पर हस्ताक्षर करवा लिए और अस्पताल में मरीज को छोड़कर वहां से निकल गए।
रमेश का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर बताया जा रहा है। इलाज कराने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे भी नहीं थे। मजबूरी में परिजनों ने घायल रमेश को एक पिकअप वाहन की ट्रॉली में बैठाया और सीधे एसडीएम कार्यालय पहुंच गए, ताकि प्रशासन से मदद मिल सके।
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने तत्काल मानवीय पहल दिखाते हुए परिजनों को 5 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही एक निजी एंबुलेंस चालक को 2500 रुपये देकर रमेश को रायगढ़ के सरकारी अस्पताल भेजने की व्यवस्था कराई।
रायगढ़ से रायपुर तक की जद्दोजहद
रायगढ़ के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने रमेश का सीटी स्कैन किया। रिपोर्ट में सामने आया कि उसके सिर की नस फट गई है और दिमाग में खून जमने की स्थिति बन गई है। हालत बेहद नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर कर दिया।
परिजनों के अनुसार रायपुर ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस को बार-बार फोन किया गया, लेकिन करीब दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस दौरान रमेश की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। गांव के सरपंच ने फिर से पहल करते हुए निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की। लगभग 6500 रुपये खर्च कर रमेश को तत्काल रायपुर के डीकेएस अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज शुरू हुआ।
मौत से पसरा मातम
रायपुर के अस्पताल में कई दिनों तक रमेश जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा। डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज करती रही, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। अंततः 5 मार्च 2026 को उपचार के दौरान रमेश चौहान ने दम तोड़ दिया। रमेश की मौत की खबर जैसे ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैली, लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल छा गया।
चौहान समाज का फूटा गुस्सा
रमेश चौहान की मौत के बाद चौहान समाज में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। गुरुवार को हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। समाज के लोगों ने खरसिया में विशाल रैली निकालकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने खरसिया तहसील मुख्यालय पहुंचकर एसडीओपी कार्यालय और एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान लोगों ने जमकर नारेबाजी की और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि पुलिस हिरासत में किसी युवक की मौत हो जाती है तो यह कानून और व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि दोषियों को बचाने की कोशिश की गई तो आंदोलन और तेज होगा।

थर्ड डिग्री टॉर्चर का गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों ने सीधे तौर पर खरसिया थाना प्रभारी टीआई राजेश जांगड़े और अन्य पुलिसकर्मियों पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस की बेरहमी ने रमेश की जान ले ली।
परिजनों का आरोप है कि रमेश को इतनी क्रूरता से पीटा गया कि उसके शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और अंततः वही चोटें उसकी मौत का कारण बनीं। वहीं पुलिस प्रशासन इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
न्यायिक जांच की मांग
मृतक की पत्नी किरन चौहान ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने आवेदन में मांग की है कि इस मामले को पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत मानते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176(1A) के तहत न्यायिक जांच कराई जाए।
इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि रमेश का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया जाए और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने यह भी मांग की है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर मौजूद सभी बाहरी और आंतरिक चोटों का विस्तार से उल्लेख किया जाए। साथ ही अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।
दोषियों पर एफआईआर की मांग
परिजनों और समाज के लोगों की मांग है कि मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित किया जाए। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस ही कानून तोड़ेगी तो आम जनता न्याय के लिए कहां जाएगी।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव
रमेश चौहान की मौत के बाद खरसिया क्षेत्र में माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। आक्रोशित ग्रामीण और परिजन तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए हैं और लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
आंदोलन और तेज होने की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और समाज के लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।
लोगों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ रमेश चौहान के लिए नहीं, बल्कि न्याय और मानव अधिकारों के लिए है। फिलहाल खरसिया और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना को लेकर जबरदस्त हलचल है। हर किसी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है।

