अम्बिकापुर/सरगुजा | विशेष रिपोर्ट

सरगुजा संभाग में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला एक ऐसे प्रधान आरक्षक से जुड़ा है, जिन पर न केवल ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं, बल्कि शासकीय भूमि पर कथित कब्जा करने की शिकायत भी सामने आई है। इन आरोपों के केंद्र में हैं प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती, जिनका नाम इन दिनों प्रशासनिक हलकों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती का तबादला एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले में कर दिया गया था। सामान्य तौर पर किसी भी पुलिस कर्मचारी को तबादले के बाद नए स्थान पर जाकर अपनी जिम्मेदारी संभालनी होती है। लेकिन इस मामले में स्थिति कुछ अलग बताई जा रही है। बताया जाता है कि तबादले के बावजूद उन्होंने स्वयं को सूरजपुर पुलिस लाइन में अटैच करा लिया।

यहीं से पूरे मामले की चर्चा शुरू हुई। सूत्रों का दावा है कि लाइन अटैच होने के बाद भी प्रधान आरक्षक लंबे समय से नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि करीब एक महीने से अधिक समय से उनकी उपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभाग के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा है कि आखिर एक जिम्मेदार पद पर तैनात कर्मचारी की इतनी लंबी अनुपस्थिति कैसे संभव हो रही है।

वेतन भी रोके जाने की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए विभाग द्वारा उनका वेतन भी रोके जाने की बात सामने आई है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस महकमे के भीतर इस मुद्दे को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है।

पुलिस विभाग अनुशासन और जिम्मेदारी के लिए जाना जाता है। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आम जनता के बीच भी गलत संदेश जाता है। यही कारण है कि इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों की नजरें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

शासकीय जमीन पर कब्जे का आरोप

मामला केवल ड्यूटी से अनुपस्थित रहने तक ही सीमित नहीं है। इसी बीच प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती पर शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जा करने का आरोप भी सामने आया है। इस आरोप ने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।

अम्बिकापुर निवासी जितेन्द्र कुमार जायसवाल ने इस संबंध में कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को लिखित शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि पटवारी हल्का नंबर 56, ग्राम पंचायत अजीरमा में स्थित खसरा नंबर 74/1 की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह जमीन शासकीय भूमि है और लगभग दो एकड़ क्षेत्र में इस पर निर्माण किया जा रहा है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति अपने पद और प्रभाव का उपयोग करते हुए इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है।

शिकायत में उठाए गए महत्वपूर्ण सवाल

शिकायतकर्ता द्वारा प्रशासन को दिए गए आवेदन में कई गंभीर बातें लिखी गई हैं। आवेदन में कहा गया है कि जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया जा रहा है, वह ग्राम अजीरमा का मूल निवासी भी नहीं है। इसके बावजूद वहां शासकीय जमीन पर निर्माण कराया जा रहा है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि यह कब्जा सही पाया जाता है तो यह छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 सहित अन्य प्रावधानों का उल्लंघन माना जा सकता है। इसलिए प्रशासन को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर जांच करानी चाहिए।

प्रशासन से की गई स्पष्ट मांग

शिकायतकर्ता ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। आवेदन में कहा गया है कि इस पूरे मामले की तत्काल राजस्व जांच कराई जाए। यदि जांच में यह पाया जाता है कि शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है, तो उसे तुरंत हटाया जाए।

इसके अलावा यह भी मांग की गई है कि कब्जा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही वहां चल रहे निर्माण कार्य को भी तुरंत प्रभाव से रोकने की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों में चर्चा

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी कर्मचारी से हमेशा यह उम्मीद की जाती है कि वह कानून का पालन करेगा और दूसरों को भी कानून का पालन करने के लिए प्रेरित करेगा। लेकिन यदि उसी कर्मचारी पर कानून के उल्लंघन के आरोप लगने लगें तो यह स्थिति चिंता पैदा करती है।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह पुलिस विभाग की छवि पर भी असर डाल सकता है। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए।

पुलिस विभाग की साख का सवाल

पुलिस विभाग कानून व्यवस्था बनाए रखने का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। समाज में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस पर ही होती है। ऐसे में यदि पुलिस विभाग के किसी कर्मचारी पर ही नियमों की अनदेखी या पद के दुरुपयोग के आरोप लगने लगें तो यह विभाग की साख के लिए भी चुनौती बन जाता है।

यही कारण है कि इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें अब अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या इस मामले की जांच होगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासन द्वारा जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है। लेकिन इतना जरूर है कि इस पूरे प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से जांच करता है और क्या कार्रवाई सामने आती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो न केवल शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो सकती है, बल्कि विभागीय स्तर पर भी कदम उठाए जा सकते हैं।

वहीं यदि जांच में आरोप गलत साबित होते हैं तो भी सच्चाई सामने आना जरूरी है, ताकि अनावश्यक विवाद और चर्चाओं पर विराम लग सके। फिलहाल सरगुजा संभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस पूरे प्रकरण का सच आखिर क्या है। प्रशासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि यह मामला आगे किस दिशा में जाता है।

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