तिल्दा-नेवरा नगर में छत्तीसगढ़ के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समाज सुधारक डॉ. खूबचंद बघेल की प्रतिमा स्थल पर तोड़फोड़ की घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया है। बताया जा रहा है कि नगर पालिका परिषद तिल्दा-नेवरा में स्थापित उनकी प्रतिमा स्थल को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और छत्तीसगढ़िया समाज के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की घटना नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और उसके पुरखों के सम्मान पर हमला है।

इस घटना के विरोध में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदाधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन के नेताओं का कहना है कि प्रदेश में लगातार छत्तीसगढ़ के महान पुरखों, स्वतंत्रता सेनानियों और सांस्कृतिक प्रतीकों की अनदेखी की जा रही है। उनका आरोप है कि पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, लेकिन दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।

पदाधिकारियों ने बताया कि इससे पहले रायपुर में भी छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया था। उस घटना को लेकर आंदोलन करने वाले अमित बघेल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था और वे आज भी जेल में हैं। उनके साथ डॉ. अजय यादव तथा दिनेश वर्मा भी जेल में बंद बताए जा रहे हैं। इस कारण संगठनों में पहले से ही नाराजगी बनी हुई है और अब तिल्दा-नेवरा की इस घटना ने उस आक्रोश को और बढ़ा दिया है।

संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति और पुरखों के सम्मान की रक्षा करना हर नागरिक और शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश में सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छत्तीसगढ़ के पुरखों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस घटना के विरोध में संगठनों ने 20 तारीख को आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके लिए तिल्दा थाना, तहसील कार्यालय, नगर पालिका परिषद तिल्दा और एसडीएम कार्यालय में लिखित आवेदन देकर दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे क्षेत्र की सामाजिक भावनाएं आहत हुई हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए और प्रतिमा स्थल की मरम्मत कर उसे पहले की तरह सम्मानजनक स्थिति में बहाल किया जाए।

गौरतलब है कि डॉ. खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों और समाज सुधारकों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 19 जुलाई 1900 को रायपुर जिले के ग्राम पथरी में हुआ था तथा 22 फरवरी 1969 को उनका निधन हुआ। उन्होंने छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। साथ ही किसानों, ग्रामीणों और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए उन्होंने लगातार कार्य किया। छत्तीसगढ़ राज्य की अवधारणा को शुरुआती दौर में सामने रखने वाले प्रमुख नेताओं में भी उनका नाम शामिल किया जाता है। इसी कारण उन्हें छत्तीसगढ़ी अस्मिता का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

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