ग्राम सभा के फैसले के बाद भी लीज प्रक्रिया पर सवाल, जनसुनवाई टली
तिल्दा-नेवरा/रायपुर। देवरी गांव में प्रस्तावित स्टील प्लांट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों और ग्राम पंचायत का कहना है कि सार्वजनिक चारागाह भूमि को 59 वर्षों की लीज पर निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया बिना ग्राम सभा की स्पष्ट सहमति के आगे बढ़ाई गई। गांव में इसे लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है।
ग्राम पंचायत के आधिकारिक पत्रों में दावा किया गया है कि संबंधित भूमि पशुपालन और ग्रामीणों की आजीविका से सीधे जुड़ी है। पंचायत के अनुसार 30 जनवरी 2026 को आयोजित ग्राम सभा में लगभग 393 ग्रामीणों की उपस्थिति में सर्वसम्मति से परियोजना का विरोध दर्ज किया गया था। इसके बावजूद लीज प्रक्रिया जारी रहने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पंचायत का आरोप: NOC नहीं, सहमति नहीं
पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन को भेजे पत्र में कहा है कि
* चारागाह भूमि के लीज आवंटन के लिए पंचायत की ओर से कोई NOC जारी नहीं की गई।
* ग्राम सभा की लिखित सहमति नहीं ली गई।
* लीज स्वीकृति किस कानूनी आधार पर दी गई, यह स्पष्ट नहीं किया गया।
पंचायत ने पूरे मामले की कानूनी और प्रशासनिक जांच की मांग की है।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर चिंता
12 फरवरी 2026 को जारी पत्र में पंचायत ने आशंका जताई है कि प्रस्तावित स्टील उद्योग से—
* तालाब और जलस्रोतों के प्रदूषित होने की संभावना है,
* पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो सकता है,
* वायु, जल और भूमि प्रदूषण से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पंचायत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया है।
जनसुनवाई स्थगित
परियोजना से संबंधित जनसुनवाई 27 फरवरी 2026 को प्रस्तावित थी, जिसे प्रशासनिक निर्देश पर आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। इस निर्णय को ग्रामीण अपनी आपत्ति का असर मान रहे हैं, हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
गांव बनाम परियोजना
ग्रामीणों का कहना है कि चारागाह भूमि केवल खाली जमीन नहीं, बल्कि गांव की आर्थिक संरचना का हिस्सा है। पशुपालन, दूध उत्पादन और कृषि व्यवस्था इसी पर निर्भर है।
गांव में चर्चा है कि विकास के नाम पर यदि स्थानीय संसाधनों और आजीविका पर खतरा पैदा होता है, तो ग्रामीणों की सहमति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अब आगे क्या?
ग्राम पंचायत ने स्पष्ट किया है कि जब तक लीज प्रक्रिया की वैधता और पर्यावरणीय प्रभावों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, विरोध जारी रहेगा। प्रशासन और कंपनी की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
देवरी का यह मामला अब केवल एक परियोजना का नहीं, बल्कि ग्राम सभा की भूमिका, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।



