बलौदाबाज़ार।
बलौदाबाज़ार जिले की ग्राम पंचायत बरदा इन दिनों 15वीं वित्त आयोग की राशि के खर्च को लेकर चर्चा में है। पंचायत पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन भुगतान विवरण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025–26 में कुल 10 लाख 78 हजार 860 रुपये अलग-अलग कार्यों के नाम पर खर्च किए गए हैं। कागज़ों में यह राशि गली मरम्मत, नाली सफाई, पेयजल व्यवस्था, सामुदायिक भवन निर्माण और पंचायत संचालन जैसे कार्यों पर खर्च होना बताया गया है।

हालाँकि गाँव के कुछ लोगों का कहना है कि इतने बड़े खर्च के बाद भी कई जगह गली-नालियों की स्थिति और पानी की समस्या में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता। इसी कारण अब गाँव में चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर इन पैसों का उपयोग किस तरह किया गया।

गली मरम्मत और बजरीकरण में कई भुगतान

पंचायत रिकॉर्ड के अनुसार गली मरम्मत, बजरीकरण और पानी निकासी के नाम पर कई बार भुगतान किया गया।

* 4 जुलाई 2025 – 49,000 रुपये और 34,000 रुपये
* 1 सितम्बर 2025 – 49,500 रुपये
* 20 अक्टूबर 2025 – 54,000 रुपये
* 14 नवम्बर 2025 – 49,000 रुपये
* 31 दिसम्बर 2025 – 10,000 रुपये

इन भुगतानों को देखकर कुछ ग्रामीणों का कहना है कि यदि गली सुधार के लिए इतनी बार राशि खर्च हुई है तो गाँव की कई गलियों में अभी भी कीचड़ और टूट-फूट की समस्या क्यों दिखाई देती है।

पेयजल व्यवस्था में भी हजारों खर्च

पंचायत रिकॉर्ड में पेयजल व्यवस्था, पाइप लाइन मरम्मत और बोर सुधार के नाम पर भी कई भुगतान दर्ज हैं।

* 4 जुलाई 2025 – 22,500 रुपये और 35,000 रुपये
* 14 जुलाई 2025 – 49,000 रुपये
* 31 जुलाई 2025 – 30,000 रुपये और 49,000 रुपये
* 9 सितम्बर 2025 – 26,660 रुपये

गाँव के कुछ लोगों का कहना है कि यदि पानी व्यवस्था पर इतनी राशि खर्च की गई है तो गर्मी के दिनों में कई मोहल्लों में पानी की दिक्कत क्यों सामने आती है।

नाली-गली सफाई और मरम्मत

स्वच्छता और नाली सफाई के लिए भी अलग-अलग तिथियों में भुगतान किया गया।

* 4 जुलाई 2025 – 15,000 रुपये
* 14 जुलाई 2025 – 35,000 रुपये
* 1 सितम्बर 2025 – 23,500 रुपये
* 30 सितम्बर 2025 – 20,000 रुपये
* 12 अक्टूबर 2025 – 8,000 रुपये

ग्रामीणों का कहना है कि अगर नाली सफाई और मरम्मत पर लगातार खर्च हो रहा है तो कई जगह नालियों में गंदगी और जाम की समस्या क्यों बनी हुई है।

पंचायत संचालन और ऑनलाइन कार्य

पंचायत कार्यालय संचालन, स्टेशनरी, फोटोकॉपी और ऑनलाइन कार्यों के नाम पर भी राशि खर्च की गई।

* 14 जुलाई 2025 – 15,000 रुपये
* 9 सितम्बर 2025 – 13,000 रुपये
* 30 सितम्बर 2025 – 2,000 रुपये
* 31 दिसम्बर 2025 – 10,000 रुपये

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत संचालन में खर्च होना सामान्य है, लेकिन खर्च का स्पष्ट विवरण भी सामने आना चाहिए ताकि लोगों को पूरी जानकारी मिल सके।

सामुदायिक भवन निर्माण

सामुदायिक भवन निर्माण के नाम पर भी कई भुगतान दर्ज हैं।

30 जुलाई 2025 – 64,000 रुपये, 30 जुलाई 2025 – 8,000 रुपये, 1 मार्च 2026 – 49,000 रुपये, 1 मार्च 2026 – 49,000 रुपये, 1 मार्च 2026 – 2,000 रुपये

गाँव के लोगों का कहना है कि सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएँ गाँव के लिए जरूरी होती हैं, इसलिए इस पर हुए खर्च और कार्य की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

रंगमंच निर्माण और कार्यक्रम

अन्य कार्यों में रंगमंच निर्माण और एक कार्यक्रम के आयोजन के लिए भी राशि खर्च की गई। 4 जुलाई 2025 – रंगमंच निर्माण के लिए 48,700 रुपये, 23 जुलाई 2025 – संध्या चौपाल कार्यक्रम के लिए 30,000 रुपये

ग्रामीणों का कहना है कि सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन अच्छा है, लेकिन विकास के मुख्य कार्यों के साथ संतुलन भी जरूरी है।

ग्रामीणों की मांग — पारदर्शिता हो

गाँव के कई लोगों का कहना है कि यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायत को मिलने वाली राशि जनता के टैक्स से आती है,  इसलिए गाँव के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि विकास के लिए आया पैसा कहाँ और किस काम में खर्च हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत खुले तौर पर खर्च का पूरा विवरण और किए गए कार्यों की जानकारी सार्वजनिक कर दे, तो लोगों के मन में उठ रहे सवाल खत्म हो सकते हैं।

पारदर्शिता से ही बढ़ेगा विश्वास

विशेषज्ञों का कहना है कि 15वीं वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य गाँवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। इसमें सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता जैसे काम प्राथमिकता में आते हैं।

ऐसे में यदि पंचायत स्तर पर खर्च का रिकॉर्ड और कार्य दोनों स्पष्ट दिखाई दें तो लोगों का विश्वास भी मजबूत होता है और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहती है।

गाँव के लोगों का कहना है कि उनका मकसद केवल इतना है कि गाँव के विकास के लिए आया हर रुपया सही जगह खर्च हो और उसका हिसाब भी साफ-साफ सामने आए।

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