धान की अंतर राशि पर घिरी सरकार: भुगतान में गड़बड़ी के आरोप, भेदभाव और पारदर्शिता पर उठे बड़े सवाल
रायपुर . प्रदेश में धान की अंतर राशि को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है, लेकिन अब यह मुद्दा केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। किसानों और हितग्राहियों के बीच बढ़ती नाराजगी ने सरकार की कार्यप्रणाली और वादों की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार योजनाओं का प्रचार ज्यादा और जमीनी क्रियान्वयन कम कर रही है।
राशि पहुंचने के दावों पर सवाल
सरकार का दावा है कि होली से पहले किसानों और महिलाओं के खातों में अंतर राशि और योजनाओं का पैसा पहुंचा दिया गया, लेकिन कई जिलों से लाभार्थियों को भुगतान नहीं मिलने या आंशिक राशि मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि सूची और भुगतान प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने से भ्रम और असंतोष बढ़ रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि यदि सभी पात्र हितग्राहियों को राशि दी गई है तो सरकार लाभार्थियों की पूरी सूची सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है। पारदर्शिता की कमी को सरकार की बड़ी प्रशासनिक विफलता बताया जा रहा है।
भेदभाव के आरोपों से घिरी सरकार
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धान खरीदी और अंतर राशि वितरण में क्षेत्रवार असमानता दिखाई दे रही है। कुछ किसानों को भुगतान मिला जबकि कई अब भी इंतजार कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि राजनीतिक आधार पर प्राथमिकता तय की जा रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में नाराजगी बढ़ रही है।
सरकार की ओर से भेदभाव के आरोपों को खारिज किया गया है, लेकिन जमीन स्तर पर स्पष्ट डेटा सार्वजनिक न होने से संदेह और गहरा गया है।
घोषणाएं ज्यादा, व्यवस्था कमजोर?
विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं की घोषणा तेजी से की जाती है, लेकिन भुगतान सत्यापन, बैंक समन्वय और पात्रता जांच की प्रक्रिया कमजोर होने के कारण लाभार्थियों तक समय पर राशि नहीं पहुंच पाती। इससे सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य, बोनस और अंतर राशि को लेकर हर साल नई घोषणा होती है, लेकिन भुगतान की अनिश्चितता उनकी आर्थिक योजना को प्रभावित करती है।
त्योहारों की राजनीति पर भी विवाद
मामले ने राजनीतिक रंग तब और गहरा लिया जब इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी सांस्कृतिक और धार्मिक टिप्पणियों तक पहुंच गई। विपक्ष का आरोप है कि वास्तविक मुद्दों — किसानों की आय, भुगतान और पारदर्शिता — से ध्यान हटाने के लिए भावनात्मक बयान दिए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आर्थिक मुद्दों पर जवाब देने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से सरकार की जवाबदेही कमजोर दिखाई देती है।
सरकार की सबसे बड़ी चुनौती — भरोसा
धान की अंतर राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि किसानों के भरोसे से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध नहीं हुई तो यह सरकार के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या सरकार लाभार्थियों की पूरी सूची सार्वजनिक कर पारदर्शिता साबित करेगी, या फिर धान की अंतर राशि का मुद्दा आने वाले समय में किसानों के असंतोष का बड़ा कारण बनेगा?

