Chhattisgarh exam issue:- 5वीं-8वीं के केंद्रीकृत परीक्षा म गड़बड़ी के पोल खुलिस: कमजोर कागज, अधूरा सवाल, छात्र मन होगे परेशान

रायपुर/छत्तीसगढ़। प्रदेश म 5वीं अऊ 8वीं के बोर्ड जइसन केंद्रीकृत परीक्षा कराय जावत हवय, फेर ए परीक्षा अब खुदे सवाल के घेरे म आ गे हवय। राज्य स्तर ले छप के आइस प्रश्नपत्र-सह-उत्तरपुस्तिका म भारी गड़बड़ी देखे ला मिलत हवय। कागज अतका पतला निकले हवय के पेन या पेंसिल ले लिखे म स्याही दूसर पन्ना म झलकत दिखत हवय, अऊ हल्का दबाव म कागज फटत हवय। ए हालत म नान-नान छात्र मन ला परीक्षा देय म भारी दिक्कत झेलना पड़त हवय।

मिले जानकारी के मुताबिक, परीक्षा देत बखत छात्र मन बताइन के गणित जइसन विषय म रफ काम करे बर कोनो जगा नइ दे हवय। चार पेज म 20-20 सवाल ठूंस दे हवय, जेकर से छात्र मन ला उत्तर लिखे म भारी परेशानी होवत हवय। कई जगह सवाल अधूरा या गायब मिलिस, त कई जगह लाइन खींचे म कागज म छेद होवत दिखिस। ए सब गड़बड़ी ले परीक्षा के स्तर ऊपर घलो सवाल खड़ा होवत हवय।

छात्र मन के कहना हवय के उत्तर लिखे बर जगा कम मिलत हवय, जेकर से ओमन अपन जवाब ढंग से नइ लिख पावत हवंय। कागज कमजोर होय के कारण पन्ना मुड़त, फटत अऊ स्याही फैलत रहिथे, जेकर ले लिखे गे जवाब पढ़े म घलो दिक्कत होवत हे। ए हालत म छात्र मन के मेहनत ऊपर असर पड़त हवय अऊ परीक्षा के निष्पक्षता ऊपर संदेह उठत हवय।

दूसर तरफ, जिम्मेदार अधिकारी मन ए मामला म शिकायत नइ मिलिस कहिके पल्ला झाड़त नजर आथें। जबकि जमीनी स्तर म छात्र, पालक अऊ शिक्षक मन लगातार ए गड़बड़ी के शिकायत करत हवंय। फेर अब तक कोनो ठोस कार्रवाई नइ होइस, जेकर ले शिक्षा विभाग के कार्यप्रणाली ऊपर घलो सवाल उठत हवय।

जानकारी अनुसार, प्रदेश भर म 5वीं अऊ 8वीं के करीब 7 लाख छात्र-छात्रा ए परीक्षा म शामिल होवत हवंय। ए परीक्षा बर हर छात्र ले 55 ले 60 रुपिया तक शुल्क घलो ले जाथें। 5वीं कक्षा बर 55 रुपिया अऊ 8वीं कक्षा बर 60 रुपिया फीस तय हवय। निजी स्कूल के छात्र मन ल ए रकम खुद देना पड़त हवय, जबकि सरकारी स्कूल म ए खर्चा शिक्षा विभाग उठावत हवय।

ए परीक्षा म प्रश्नपत्र छपई, परीक्षा केन्द्र, उत्तरपुस्तिका जांच अऊ परिणाम तैयार करे म कुल मिला के करीब 4 करोड़ रुपिया खर्च होवत हवय। एतका भारी रकम खर्च होय के बाद घलो यदि छात्र मन ला सही कागज अऊ ढंग के प्रश्नपत्र नइ मिल पावत हवय, त ए शिक्षा व्यवस्था बर बहुत गंभीर बात आय।

प्रश्नपत्र अऊ उत्तरपुस्तिका म कई तरह के खामियां सामने आइस हवंय। पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर करे बर कोनो जगा तय नइ रहिस। सीलबंद लिफाफा खोले बखत छात्र मन के हस्ताक्षर लेय बर घलो जगा नइ दे गे रहिस। उत्तर लिखे बर पर्याप्त जगा नइ मिलिस, जेकर से छात्र मन व्यवस्थित ढंग ले जवाब नइ दे पाइन। कागज के क्वालिटी घलो बहुत खराब रहिस, जेन ले लिखे बखत पन्ना फटत रहिस।

जानकार मन बताथें के प्रश्नपत्र बर 60 ले 80 जीएसएम के मैपलिथो कागज अऊ उत्तरपुस्तिका बर कम से कम 80 जीएसएम के कागज इस्तेमाल होना चाही। फेर जेन कागज अभी इस्तेमाल होवत हवय, ओ मन 40 ले 50 जीएसएम के आसपास के लगत हवय, जऊन सबसे घटिया क्वालिटी माने जाथे। ए किसिम के कागज म रेशा ढीला रहिथे, जेन ले स्याही दूसर पन्ना म झलक जाथे अऊ कागज जल्दी फट जाथे।

70 जीएसएम ले कम कागज म कोटिंग कम रहिथे, जेन ले स्याही सोख लेथे अऊ कागज कमजोर हो जाथे। एही कारण ले छात्र मन के लिखे उत्तर घलो साफ-साफ नइ दिखय, जेन ले मूल्यांकन म दिक्कत आ सकथे।

ए पूरा मामला ले प्रदेश के शिक्षा व्यवस्था ऊपर गंभीर सवाल खड़ा हो गे हवय। छात्र मन के भविष्य संग ए तरीका के लापरवाही बर्दाश्त करे लायक नइ आय। पालक अऊ समाज के लोगन अब मांग करत हवंय के ए मामला म जांच होवय अऊ दोषी मन ऊपर कड़ी कार्रवाई करे जावय।

फिलहाल, ए परीक्षा म होवत गड़बड़ी ले छात्र मन मानसिक दबाव म आ गे हवंय अऊ ओमन चाहत हवंय के आगू ले ए किसिम के समस्या फिर से नइ होवय। अब देखना ये होही के शिक्षा विभाग ए मामला मं का कदम उठाथे अऊ छात्र मन ला राहत कब तक मिलथे।

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