छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में इन दिनों अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। शहर के आसपास के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जिस तरह से भू-माफियाओं द्वारा सरकारी जमीनों को निशाना बनाकर अवैध कॉलोनियां बसाने की कोशिश की जा रही है, उसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले ने तब बड़ा रूप ले लिया जब क्षेत्रीय विधायक ओंकार साहू खुद मौके पर पहुंचे और जमीनी हकीकत का जायजा लिया।

मौके पर खुली अवैध प्लॉटिंग की परतें

विधायक ओंकार साहू ने एकता हॉस्पिटल के नहर पार स्थित क्षेत्र का निरीक्षण किया, जहां उन्हें कई चौंकाने वाले तथ्य देखने को मिले। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सिंचाई विभाग की सरकारी जमीन पर योजनाबद्ध तरीके से अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। भू-माफियाओं ने इस जमीन को बेचने के लिए पहले से ही पूरी तैयारी कर रखी है।

मौके पर करीब एक किलोमीटर तक मुरूम बिछाकर सड़क जैसी संरचना तैयार की गई थी, ताकि खरीदारों को यह दिखाया जा सके कि यहां प्लॉटिंग वैध तरीके से विकसित की जा रही है। यह तरीका आमतौर पर उन मामलों में अपनाया जाता है, जहां जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट नहीं होता या जमीन सरकारी होती है। इस तरह के विकास कार्य लोगों को भ्रमित कर उन्हें निवेश के लिए आकर्षित करते हैं।

ड्रिप सिस्टम से रची जा रही वैधता की कहानी

निरीक्षण के दौरान एक और अहम बात सामने आई—नहर के पार ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया गया था। यह केवल खेती के उद्देश्य से नहीं, बल्कि जमीन को विकसित और उपयोग में लाया गया दिखाने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत हुआ। इससे यह संकेत मिलता है कि यह पूरा काम बेहद सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी जांच के दौरान इसे वैध गतिविधि साबित किया जा सके।

भारी वाहनों से सड़कें बदहाल

इस अवैध प्लॉटिंग के चलते इलाके में भारी हाइवा वाहनों की आवाजाही भी बढ़ गई है। इन वाहनों के कारण नगर निगम द्वारा बनाई गई केनाल रोड बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। सड़क पर गड्ढे और दरारें आम हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।

विधायक का सख्त संदेश

विधायक ओंकार साहू ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भू-माफियाओं द्वारा आम जनता को ठगने की कोशिश की जा रही है और इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने संबंधित विभागों को तत्काल जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश देने की बात कही। साथ ही पूरे जिले में चल रही अवैध प्लॉटिंग की व्यापक जांच की मांग भी उठाई, ताकि ऐसे मामलों पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। विधायक ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को कई बार अधिकारियों और प्रभारी मंत्री तक पहुंचाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे यह संदेह पैदा होता है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक अमले की मिलीभगत हो सकती है।

विधायक ने यह भी कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करेंगे।

जनता की मेहनत की कमाई दांव पर

अवैध प्लॉटिंग का सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को होता है। लोग अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर जमीन खरीदते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि वह जमीन विवादित या सरकारी है। ऐसे मामलों में न तो उन्हें जमीन मिलती है और न ही पैसा वापस मिलता है।

विधायक ने इस पहलू को भी प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि आम जनता की मेहनत की कमाई को इस तरह जोखिम में डालना बिल्कुल गलत है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई की जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

मौके पर मौजूद रहे अधिकारी और जनप्रतिनिधि

निरीक्षण के दौरान तहसीलदार, थाना प्रभारी, पटवारी, नगर निगम के इंजीनियर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक सोनकर, आकाश गोलछा, विशु देवांगन, गुरुगोपाल गोस्वामी, योगेश मार्कण्डे, हेमलाल बंजारे, धर्मेंद्र पटेल, रोहित जगत, दिनेश साहू सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौके पर उपस्थित थे।

सियासत तेज, कार्रवाई का इंतजार

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद धमतरी की सियासत भी गरमा गई है। एक तरफ विधायक खुलकर भू-माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

धमतरी में अवैध प्लॉटिंग का यह मामला केवल जमीन कब्जाने का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जिम्मेदारी का भी है। यदि समय रहते इस पर कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या भविष्य में और भी विकराल रूप ले सकती है।

फिलहाल जनता की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या भू-माफियाओं पर गिरेगा कानून का शिकंजा या फिर अवैध प्लॉटिंग का खेल यूं ही चलता रहेगा?

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