रायपुर | खास रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ म अवैध अफीम खेती ला लेके सियासत अब चरम म पहुंच गे हवय। दुर्ग, बलरामपुर अऊ अब रायगढ़ जिला के तमनार इलाका म अफीम के लहलहात फसल सामने आइस, जेन ह सरकार के काम-काज अऊ कानून व्यवस्था ऊपर बड़े-बड़े सवाल खड़ा कर दिस हवय। गांव-गांव ले चर्चा उठत हवय के आखिर एतका बड़े स्तर म अवैध खेती होवत रहिस, फेर प्रशासन अऊ पुलिस ला एखर भनक काबर नई लागिस?
प्रदेश म नारकोटिक्स कंट्रोल के जिम्मेदारी 2003 बैच के आईपीएस रतन लाल डांगी ला देय गे हवय। करीब तीन महीना पहिली ओला ये जिम्मा सौंपे गे रहिस, फेर अब जेन ढंग ले मामला सामने आथें, ओकर ले “डांगी एक्शन प्लान” खुद सवाल के घेरे म आ गे हवय। लोगन कहत हवंय के कागज म योजना बनाय अऊ जमीन म ओकर असर दिखे म जमीन-आसमान के अंतर दिखत हवय।

तमनार के आमाघाट इलाका म जेन तरीका ले अफीम के खेती पकड़े गीस, ओ ह पूरा मामला ला अउ जादा गंभीर बना दिस हवय। बताय जावत हवय के आरोपी किसान ले जमीन तरबूज अऊ ककड़ी बोए के नाम म ले रहिस, फेर भीतर-भीतर अफीम के खेती कर डारिस। ए घटना सिरिफ एक अपराध नई, बल्के प्रशासनिक निगरानी के कमजोरी के घलो बड़ा उदाहरण बन गे हवय। गांव के लोगन घलो हैरान हवंय के एतका बड़े खेत म अफीम उग गे, फेर ककरो आंख म नई आइस।
पूरा मामला अब सीधे गृहमंत्री विजय शर्मा के ऊपर आ टिक गे हवय। विपक्ष के संग-संग आम जनता घलो पूछत हवय के पुलिस के बड़े-बड़े बैठक म आखिर का फैसला होथे? का कभी अफीम खेती रोकई बर सख्त निर्देश देय गीस? अगर देय गीस, त जमीन म ओकर असर काबर नई दिखत? लोगन के मन म ये सवाल उठत हवय के का ये सिरिफ कागजी कार्रवाई रहिस या फेर सिस्टम म कहीं गड़बड़ी हवय।

विधानसभा म नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ह सरकार ऊपर जोरदार हमला बोलिस। ओ कहिन के “तरबूज के आड़ म जहर के खेती होवत हवय अऊ सरकार सुते हवय।” महंत ह साफ-साफ पूछिन के का अफीम के खेती रातोरात हो जाथे? का पुलिस अऊ प्रशासन ला एखर भनक नई रहिस? ओ ह एला सिरिफ लापरवाही नई, बल्के ऊपर तक संरक्षण के मामला बताइन अऊ उच्चस्तरीय जांच के मांग करिन।

तमनार मामला म पुलिस ह झारखंड के खूंटी जिला के रहइया मार्शल सांगा ला गिरफ्तार करिस। जानकारी के मुताबिक, ओ ह कई साल ले इहां आना-जाना करत रहिस अऊ धीरे-धीरे अपन नेटवर्क बना के अफीम खेती सुरू कर दिस। ए बात घलो सामने आइस के ओ ह ससुराल म रहिके अपन साथी मन के संग मिलके ए अवैध कारोबार चला रहिस। ए घटना ले साफ हो जाथे के नशा के जाल अब गांव तक पसार होवत हवय।

पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मुताबिक “ऑपरेशन आघात” के तहत लगातार निगरानी रखे जात हवय अऊ जेन घलो ए म शामिल होही, ओकर ऊपर कड़ी कार्रवाई होही। फेर सवाल अब घलो बरकरार हवय—अगर निगरानी एतका मजबूत रहिस, त ए मामला पहले काबर नई पकड़ाय?
उधर सरकार अपन सफाई देत नजर आथें। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कहिन के राज्य म अपराध के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाय गे हवय अऊ जांच जारी हवय। ओ ह भरोसा देइन के जांच के बाद काकर घलो दोष साबित होही, ओला बख्शा नई जाही। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ह घलो पलटवार करत कहिन के नशा के जड़ कांग्रेस के जमाना म पड़िस, अब ओकर सफाई सरकार करथें।

फेर जमीनी हकीकत कुछ अउच कहानी बताथे। लगातार अलग-अलग जिला म अफीम खेती के मामला सामने आना ये बात के संकेत देथे के ये सिरिफ एक-दू घटना नई, बल्के एक संगठित नेटवर्क के हिस्सा हो सकथे। विपक्ष एला मुद्दा बना के सरकार ला घेरत हवय अऊ जनता के बीच ये सवाल जोर पकड़त हवय के आखिर जिम्मेदारी काकर बनथे?
गांव के आम जनता कहत हवय के अफीम जइसन फसल बोए, बढ़े अऊ तैयार होए म महीना लगथे, फेर प्रशासन ला एखर खबर नई मिलिस—ये बात गले नई उतरय। लोगन के मन म शंका हवय के या त निगरानी कमजोर हवय, या फेर कहीं न कहीं मिलिभगत हो सकथे। ए शंका ह अब सियासी रंग ले ले हवय।
आज छत्तीसगढ़ म नशा के खिलाफ लड़ई सिरिफ कानून के मामला नई रहिगे, ये समाजिक अऊ राजनीतिक चुनौती बन गे हवय। जवान पीढ़ी ऊपर एखर असर पड़ सकथे, जेन ला लेके चिंता अउ जादा बढ़ गे हवय। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नई होइस, त ये समस्या अउ विकराल रूप ले सकथे।
फिलहाल, छत्तीसगढ़ म अफीम के अवैध खेती ह सरकार के भरोसा, पुलिस के कार्यप्रणाली अऊ पूरा सिस्टम के विश्वसनीयता ऊपर सवाल खड़ा कर दिस हवय। “डांगी एक्शन प्लान” ह अब कसौटी म खड़ा हवय—का ये सच म असरदार साबित होही, या फेर सिरिफ कागज म सीमित रह जाही? आने वाला समय ए बात ला तय करही, फेर अभी के हालत म साफ दिखत हवय के मामला गरम हवय अऊ सियासत म एखर गूंज अउ तेज होही।

