जशपुर/पत्थलगांव |
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव में आदिवासी जमीनों से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। RTI से सामने आए दस्तावेजों ने जमीन खरीद-बिक्री, डायवर्जन और बैंकिंग लेनदेन के ऐसे नेटवर्क की ओर इशारा किया है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

RTI खुलासा: एक ही दिन करोड़ों की जमीन बैंक में गिरवी!
RTI आवेदन (क्रमांक: 220260312004476) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को एक ही दिन में करोड़ों की कमर्शियल जमीन HDFC बैंक में मॉर्गेज की गई। यह पैटर्न बेनामी लेनदेन और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग की ओर संकेत करता है।


कलेक्टर की रडार पर पूरा मामला
23 मार्च 2026 को जन सूचना अधिकारी के जवाब में स्पष्ट किया गया है कि पूरा मामला अब कलेक्टर जशपुर के संज्ञान में है और फाइल जांच के दायरे में आ चुकी है।

जातीय बदलाव’ का चौंकाने वाला एंगल
दस्तावेजों में एक ही व्यक्ति की अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग जनजातीय पहचान सामने आई है—
एक जगह ‘गोंड’
दूसरी जगह ‘उरांव’
यह सवाल उठाता है कि क्या यह सिर्फ रिकॉर्ड की गलती है या नियमों को दरकिनार कर जमीन हड़पने की रणनीति?


खेती से कमर्शियल तक: डायवर्जन पर सवाल
कई जमीनों को कृषि से व्यावसायिक उपयोग में बदला गया है। जबकि आदिवासी जमीनों के डायवर्जन पर सख्त नियम लागू होते हैं, इस मामले में प्रक्रियाओं का पालन संदिग्ध नजर आता है।


ऑडियो क्लिप से खुला ‘डील नेटवर्क’?
सूत्रों के मुताबिक एक कथित ऑडियो क्लिप में जमीन के रेट तय करने और बड़े निवेशकों के लिए जमीन सेट करने की बातचीत सामने आई है। इससे संगठित नेटवर्क होने की आशंका और गहरी हो जाती है।

PMO तक पहुंची शिकायत
प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज शिकायत (PMOPG/D/2026/0007354) पर संज्ञान लिया गया है। मामला फिलहाल राज्य के लोक शिकायत निवारण विभाग में प्रक्रिया में है।

क्या होगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
क्या FIR दर्ज होगी?
क्या बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत जब्ती होगी?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?
जशपुर का यह मामला सिर्फ जमीन घोटाला नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।

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