जिला राजनांदगांव के ग्राम भोथीपारकला ले एक घव फेर शासन-प्रशासन के सुस्ती अउ लापरवाही के मामला उजागर होगे हवय, जिहां गांव के गौठान अउ स्कूल मैदान जइसन सार्वजनिक जमीन म खुलेआम अतिक्रमण होवत हे, अउ जिम्मेदार लोगन चुप्पी साध के बैठे हें।
आज करीब 60-70 ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंच के जोरदार विरोध दर्ज करिन अउ कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंप के साफ चेतावनी दे डारिन—अगर अब घलो कार्रवाई नई होही, त गांव ले जनआंदोलन खड़ा होही, जऊन प्रशासन बर भारी पड़ सकत हे।
पूरा मामला सिंघोला क्षेत्र के ग्राम पंचायत महाराजपुर के आश्रित गांव भोथीपारकला के आय। आरोप हवय कि गांव के पांच झन मिलके स्कूल अउ गौठान के शासकीय जमीन म अवैध कब्जा कर ले हें। ये वो जमीन आय जिहां गांव के लईका खेलथे, पढ़थे अउ गौठान म मवेशी रखे जाथे। अब वो जमीन निजी कब्जा के जाल म फंस गे हवय।
ग्रामीण मन के कहना हवय कि ये कोनो आज के बात नई आय। लगभग 9 महीना पहिली घलो शिकायत करे गीस, फेर प्रशासन के कान म जूं तक नई रेंगिस। सवाल उठत हवय का अतिक्रमणकारी मन के हिम्मत इही से बढ़त हवय कि प्रशासन खुद आंख मूंद के बैठे हवय?
ग्रामीण भोजराज चौधरी के कहना हवय कि “हमन बार-बार आवेदन देथन, फेर कोनो सुनवाई नई होवत। अब हमन चुप नई बैठन, जरूरत पड़ही त आंदोलन करबो।”
गांव के लोगन के आक्रोश के असली वजह ये आय कि 17 जुलाई के घलो कलेक्टर के नाम ज्ञापन देय गीस रहिस। ओ समय प्रशासन ह कार्रवाई के नाम म सिरिफ “स्थगन आदेश” जारी कर दीस। फेर वो आदेश कागज म दब के रहिगे, जमीनी हकीकत म अतिक्रमणकारी रामदास अउ गंगाराम खुलेआम निर्माण कर डारिन।
अब सवाल ये उठत हवय कि जब स्थगन आदेश जारी होगे रहिस, त फिर निर्माण कइसे होइस? का प्रशासन के आदेश के कोनो कीमत नई हे? या फिर नियम सिरिफ गरीब अउ आम जनता बर ही बने हें?
गांव म आज हालत ये होगे हवय कि सार्वजनिक जमीन निजी कब्जा म बदलत दिखत हे, अउ गांव के माहौल म अशांति फैल गे हवय। लइका मन के खेल के मैदान अब विवाद के केंद्र बन गे हवय, अउ गौठान जइसन योजना जऊन गांव के विकास के प्रतीक रहिस, वो अब भ्रष्टाचार अउ कब्जा के शिकार होवत हे।
ग्रामीण मन साफ कहिथें—“अगर अब कार्रवाई नई होही, त हमन सड़क जाम करबो, धरना देबो अउ बड़ा आंदोलन खड़ा करबो।”
ये चेतावनी सिरिफ एक गांव के नई आय, ये पूरा सिस्टम बर खतरा के घंटी आय। काबर कि जब जनता के धैर्य टूटथे, त आंदोलन जन्म लेथे।
अब देखना ये होही कि प्रशासन नींद ले जागही या फिर अउ मामला कागज म दब जाही। काबर कि ये लड़ई सिरिफ जमीन के नई, हक अउ सम्मान के हवय।
