डोंगरगढ़ | राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ शहर से ग्राम ढारा तक की सड़क एक बार फिर सियासी जंग का अखाड़ा बन गई है। पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़क मरम्मत कार्य शुरू होते ही कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस जहां इस काम को “अच्छी सड़क को खराब कर नया निर्माण” बताते हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है, वहीं बीजेपी इसे जरूरी विकास कार्य बताकर कांग्रेस पर ही पलटवार कर रही है।

मामले की पृष्ठभूमि
दरअसल, इस सड़क की हालत लंबे समय से खराब थी और जगह-जगह गड्ढों के कारण स्थानीय लोग लगातार मरम्मत की मांग कर रहे थे। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाया। लेकिन जैसे ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ, उसी की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे।

कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस के पूर्व शहर अध्यक्ष विजय राज सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पहली बार है जब एक ठीक-ठाक सड़क को जानबूझकर उखाड़कर नया निर्माण किया जा रहा है। उनका कहना है कि विधायक द्वारा जिन 38 जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाया गया था, वहां काम करने के बजाय इस सड़क पर काम करना संदेह पैदा करता है। उन्होंने इसे संसाधनों की बर्बादी और संभावित भ्रष्टाचार का मामला बताया। साथ ही, सड़क निर्माण को टुकड़ों में करने और एकरूपता की कमी को भी गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया।

बीजेपी का जवाब
वहीं बीजेपी के शहर अध्यक्ष जसमीत बन्नोआना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस केवल श्रेय लेने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले ही तय था कि बरसात के बाद निर्माण कार्य कराया जाएगा, जो अब किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को शिकायत है तो लिखित में दें, निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

तकनीकी सवाल भी खड़े
इस पूरे विवाद में तकनीकी पहलू भी सामने आया है। विशेषज्ञों के अनुसार आरसीसी सड़क पर डामर (अस्फाल्ट) की परत चढ़ाना स्थायी समाधान नहीं होता। कंक्रीट और डामर की प्रकृति अलग होने के कारण दोनों के बीच मजबूत पकड़ नहीं बनती, जिससे कुछ समय बाद दरारें (रिफ्लेक्शन क्रैकिंग) और सड़क उखड़ने की समस्या सामने आ सकती है।

स्थानीय लोगों की चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह काम सुधार से ज्यादा “बजट खर्च करने की कवायद” जैसा लग रहा है। उन्हें आशंका है कि कुछ ही समय में सड़क की हालत फिर खराब हो सकती है।

बड़ा सवाल
फिलहाल, डोंगरगढ़-ढारा सड़क का मामला केवल निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह गुणवत्ता, पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गया है। अब देखना होगा कि यह सड़क वास्तव में राहत देती है या फिर यह विवाद किसी बड़े खुलासे की ओर इशारा करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *