खमरिहा/तिल्दा (रायपुर)। ग्राम खमरिहा में एस.आर.एस. स्पंज एंड पावर कंपनी की प्रस्तावित गतिविधियों को लेकर आयोजित जनसुनवाई उस वक्त हंगामेदार हो गई, जब बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जनसुनवाई स्थल पर विरोध के स्वर इतने मुखर थे कि कई बार माहौल तनावपूर्ण हो गया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही है। इसके उलट बाहर के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे गांव में बेरोजगारी और असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी से निकलने वाले प्रदूषण के कारण क्षेत्र में सांस, त्वचा और अन्य गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, जिसका सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
जनसुनवाई में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा कि कंपनी के आसपास अवैध नशे का कारोबार बढ़ रहा है। बाहरी लोगों की आवाजाही से गांव का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और स्थानीय ग्रामीणों के शोषण की घटनाएं सामने आ रही हैं।

ग्रामीणों ने कंपनी से जुड़े भारी वाहनों और ट्रकों की बेलगाम आवाजाही पर भी कड़ा ऐतराज जताया। उनका कहना है कि तेज रफ्तार वाहनों के कारण सड़क दुर्घटनाएं आम हो गई हैं, जिनमें स्कूली बच्चों, किसानों और ग्रामीणों की जान जा रही है। इसके अलावा कंपनी द्वारा अत्यधिक भू-जल दोहन किए जाने से गांवों में बोर सूख रहे हैं और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे खेती-किसानी संकट में है।
जनसुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदाधिकारी भी ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़े नजर आए। वक्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कंपनियों के मुनाफे के आगे छत्तीसगढ़ियों की जान और अधिकारों की कोई कीमत नहीं रह गई है। आए दिन औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की मौत होती है, लेकिन न तो उचित मुआवजा मिलता है और न ही न्याय। मजदूरों को कलेक्टर दर से मजदूरी तक नहीं दी जा रही, जो खुला अन्याय है।
अंत में संगठनों और ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की कि कंपनी पर सख्त निगरानी रखी जाए, प्रदूषण पर तत्काल नियंत्रण हो, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिले, भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगे और किसानों–मजदूरों के साथ हो रहे अन्याय को तुरंत खत्म किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

