महासमुंद। कागज म चमकदार योजना मंच म गूंजत नारा अऊ जमीन म सूखा सच, यही हकीकत सामने आथे महासमुंद जिला के नांदगांव म। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी योजना “हर घर जल” जऊन ला जिनगी बदल देय के दावा करे गीस lओही योजना आज इहां सवाल बन के खड़े हवय।
सरकार कहिथे—“नल हे त जल हे, यही जिनगी के हल हे”… फेर नांदगांव के जनता पूछत हवय—“नल कहां हे? जल कहां हे? अऊ हमन के जिनगी के हल काबर नई मिलत?”
5 बछर, करोड़ों रूपिया… फेर एक बूंद पानी नई!
नांदगांव म करीब 5 बछर पहिली पानी के विशाल टंकी बनाय गीस। दावा होइस—अब गांव के हर घर म नल ले पानी पहुंचही। करोड़ों रूपिया खर्च होइस, फाइल बंद होइस, अऊ कागज म योजना “पूर्ण” बता दीस गीस।
फेर जमीनी सच्चाई ये हवय टंकी आज घलो खाली खड़े हवय, पाइपलाइन अधूरा पड़े हवय, घर-घर कनेक्शन सपना बन गे हवय l
सवाल सीधा हवय—जब पानी पहुंचाना नई रहिस… त फिर टंकी काबर बनाय गीस?
“हर घर जल” या “हर घर छल”?
नांदगांव के करीब 3 हजार जनसंख्या म आधा ले जियादा परिवार आज घलो पानी बर तरसत हें। योजना के नाम म सिरिफ बोर्ड लग गे, दीवार म नारा लिख गे—“जल हे त कल हे”… फेर गांव म न आज हे, न कल के भरोसा। इहां के हालत देख के ये कहना गलत नई होही के “हर घर जल” योजना, नांदगांव म “हर घर छल” बन गे हवय।
माई मन के माथा म घड़ा, कांधा म जिम्मेदारी
सबले जियादा मार झेलत हें गांव के महिलाएं। सुबह होतेच घड़ा लेके 1 किलोमीटर दूर बोरिंग तक जाना, लाइन म खड़े रहना… पानी भरना… अऊ फेर घर लाना, ये अब रोज के जिनगी बन गे हवय। सरकार मंच ले कहिथे—“महिला सशक्तिकरण” फेर नांदगांव म महिला मन आज घलो पानी ढोवइया मजदूर बन के रहिगे हें।
एक ग्रामीण महिला के दर्द साफ दिखथे— “सरकार कहिथे नल लगही, पानी आही… फेर आज तक सिरिफ भरोसा मिलिस, पानी नई।”
ठेकेदार खेल गिस खेल? अधूरा काम, पूरा भुगतान!
गांव वाले मन के आरोप सीधा अऊ गंभीर हवय—
- ठेकेदार काम ला अधूरा छोड़ दिस
- कई घर म नल कनेक्शन तक नई लगाय गीस
- जिहां लगाय गीस, ओतको पैसा वसूली करे गीस
जबकि योजना साफ कहिथे “घर-घर नल कनेक्शन मुफ्त होही।“
अब सवाल उठथे का ठेकेदार ला पूरा भुगतान होगे? का अधिकारी मन आंख मूंद के साइन कर दिस? का भ्रष्टाचार के खेल म जनता के प्यास बेच दीस गीस?

शिकायत… शिकायत… फेर कार्रवाई शून्य!
ग्रामीण मन कई बेर शिकायत कर चुके हें—जनप्रतिनिधि, पंचायत, अधिकारी—सब ला जानकारी दे दीस गीस। फेर हर बेर एके जवाब “जांच करवाबो… सुधार करबो”l ये “जांच” कब तक चलही? 5 बछर ले टंकी सूखा हवय अऊ अधिकारी मन अब घलो “जांच” के बात करत हें!
जिम्मेदार कोन? सरकार या सिस्टम?
ये सिरिफ एक गांव के कहानी नई… ये पूरा सिस्टम के विफलता के उदाहरण हवय।
- योजना बनाय गीस—पर निगरानी नई
- पैसा खर्च होइस—पर काम अधूरा
- दावा होइस—पर हकीकत गायब
- सरकार के जवाबदेही कहां हवय? का जनता के पइसा सिरिफ कागज म खर्च होही?
जनप्रतिनिधि चुप काबर?
गांव के जनप्रतिनिधि अऊ नेता मन के चुप्पी घलो सवाल खड़ा करत हे।
चुनाव के टाइम—वादा, भाषण, घोषणा, फेर चुनाव जीत के बाद चुप्पी, दूरी अऊ बहाना…
नांदगांव के जनता पूछत हवय “जब वोट मांगे बर आथव… त पानी काबर नई दे सकथव?”
“जल जीवन मिशन” या “जिम्मेदारी से भागना”?
देश भर म ये योजना के बड़े-बड़े आंकड़ा दिखाय जाथे—कितने घर म नल लगिस, कितने गांव कवर होइस, फेर जऊन गांव म योजना फेल होगे—ओकर जिम्मेदारी कोन लेही? नांदगांव जइसन गांव मन ये बतावत हें के सिर्फ आंकड़ा बढ़ाना विकास नई होवय, जमीन म पानी पहुंचाना ही असली काम हवय।
अब जनता पूछत हवय—जवाब दो!
नांदगांव के लोग अब चुप नई रहना चाहत हें। ओकर मन के सवाल साफ हवय—
- 5 बछर ले टंकी खाली काबर?
- पाइपलाइन अधूरा काबर?
- पैसा कहां गिस?
- जिम्मेदार कोन?
अऊ सबले बड़ा सवाल—पानी कब आही?
प्रशासन कब जागही?
जिला प्रशासन के तरफ ले फिर वही बयान “जांच करवाबो, कमी दूर करबो” फेर जनता अब बयान नई, काम चाहत हे। पानी चाहत हे। जवाब चाहत हे।
नांदगांव के ये कहानी, सिर्फ एक गांव के समस्या नई, ये सरकार के दावों अऊ जमीन के सच्चाई के बीच के गहरी खाई ला दिखाथे। जब तक जवाबदेही तय नई होही, जब तक अधूरा काम पूरा नई होही,तब तक “हर घर जल” सिरिफ नारा रह जाही l
अऊ नांदगांव जइसन गांव मन बूंद-बूंद पानी बर तरसत रहीं।

