रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित मोजो मशरूम कंपनी में काम करने वाले मजदूरों का सब्र आखिरकार टूट गया। काम के बदले पूरी मजदूरी नहीं मिलने और ज्यादा काम, कम दाम की शिकायतों को लेकर मजदूरों ने जोरदार हड़ताल शुरू कर दी। कंपनी परिसर के बाहर मजदूरों का गुस्सा साफ झलक रहा था।

मजदूरों का कहना है कि “सुबह से शाम तक खटाया जाता है, कभी-कभी तय समय से ज्यादा भी। लेकिन जब सैलरी देने की बारी आती है तो कंपनी हाथ खड़े कर देती है।”
काम पूरा, पैसा अधूरा
हड़ताली मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे उत्पादन का पूरा दबाव डाला जाता है, लक्ष्य पूरे कराए जाते हैं, लेकिन मजदूरी तय मानकों से कम दी जाती है। कई मजदूरों ने बताया कि बार-बार कहने के बावजूद न तो सैलरी बढ़ाई जा रही है और न ही काम के घंटे तय किए जा रहे हैं।
“गरीब मजदूर क्या मशीन है?”
एक मजदूर ने गुस्से में कहा—“हम इंसान हैं, मशीन नहीं। पसीना हमारा, फायदा कंपनी का और बदले में हमें क्या? बस टालमटोल!”
प्रबंधन पर गंभीर सवाल
मजदूरों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन सिर्फ मुनाफा देख रहा है, मजदूरों की हालत से उसे कोई मतलब नहीं। न कोई लिखित समझौता, न समय पर भुगतान, ऊपर से दबाव और डर।
लोकल प्रशासन से कार्रवाई की मांग
हड़ताल कर रहे मजदूरों ने प्रशासन और श्रम विभाग से मांग की है कि मोजो मशरूम कंपनी की जांच हो, मजदूरों को उनका हक मिले और शोषण पर तुरंत रोक लगे।
चेतावनी
मजदूरों ने साफ कहा है कि
अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो हड़ताल और तेज होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।
👉 सवाल साफ है— क्या रायपुर में मजदूरों की मेहनत की कोई कीमत नहीं?
क्या मुनाफे के आगे इंसान की मेहनत बेकार है?
अब देखना होगा कि प्रशासन और मोजो मशरूम कंपनी कब जागती है,
या फिर मजदूरों की आवाज यूं ही दबा दी जाएगी।
मोजो मशरूम प्रबंधक ने नए साल के बाद से सैलरी में वृद्धि करने की बात कही है। मजदूरों को भी आश्वासन दिया गया है ।


