वादा किया 50% बढ़ेगा वेतन, मिला पुलिस का घेरा
‎रसोइयों की आवाज़ से घबराई सरकार ?

‎रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकार बच्चों का खाना तो खा जाती है, लेकिन खाना बनाने वाली रसोइया बहनों की बात सुनने को तैयार नहीं है।

सड़कों पर उतरे रसोइया

‎मध्याह्न भोजन रसोइया संघ पिछले 15 दिन से धरने पर बैठा था, लेकिन सरकार ने न सुना, न बुलाया।
‎आखिरकार रसोइया बहनें मुख्यमंत्री निवास घेरने निकलीं, तो तूता धरना स्थल से आगे पुलिस ने रास्ता रोक दिया।

‎धरना देखा, दर्द नहीं
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‎15 दिन तक महिलाएं धूप-बारिश में बैठी रहीं, ‎लेकिन सरकार के लिए यह कोई मुद्दा नहीं था। जब मुख्यमंत्री से सीधे मिलने चलीं, तो सरकार ने बातचीत की जगह पुलिस खड़ी कर दी।
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‎चुनाव में वादा, अब भूल गई सरकार
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‎रसोइया बहनों का कहना है कि चुनाव से पहले सरकार ने 50% वेतन बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन आज तक वह वादा पूरा नहीं हुआ।
अब सवाल है — क्या चुनाव के बाद वादे की कोई कीमत नहीं रहती?

रसोइया संघ ने सौंपे ज्ञापन

‎कलेक्टर दर मांगना गुनाह बन गया
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‎रसोइया बहनें कह रही हैं कि उन्हें कलेक्टर दर से वेतन दिया जाए, ताकि घर ठीक से चल सके। लेकिन सरकार को यह बात नागवार गुजर रही है। ‎जो बहन आवाज उठाती है —
‎👉 उसे काम से निकाल दिया जाता है।
‎👉 डर दिखाकर चुप कराया जाता है।
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‎तीन साफ मांगें
‎रसोइया संघ की मांग बिल्कुल सीधी है —
‎1️⃣ 50% वेतन बढ़ाने का वादा पूरा किया जाए।
‎2️⃣ कलेक्टर दर से वेतन दिया जाए।
‎3️⃣ निकाली गई रसोइयों को वापस काम पर रखा जाए।
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‎महिला सम्मान सिर्फ भाषणों में?
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‎सरकार मंच से महिला सम्मान की बातें करती है,
‎लेकिन जमीन पर महिलाओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचने नहीं दिया जा रहा।
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!! यह सम्मान नहीं, सीधा अन्याय है !!
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‎अब आंदोलन और तेज होगा
‎‎रसोइया संघ ने साफ कहा है — “हम भीख नहीं, अपना हक मांग रहे हैं। जब तक सरकार नहीं सुनेगी, आंदोलन जारी रहेगा।”
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सड़क का दृश्य जब सड़कों पर हक के लिए उतरे मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइया

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