देवीपुर में 9 अवैध गिट्टी क्रशर बने शिक्षा-स्वास्थ्य के दुश्मन

सूरजपुर। जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित देवीपुर गांव आज किसी औद्योगिक ज़ोन से कम नहीं रह गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां फैक्ट्री लगाने की अनुमति गांव ने नहीं, मुनाफे की भूख ने दी है। देवीपुर में संचालित करीब 9 गिट्टी क्रशर अब केवल पत्थर नहीं तोड़ रहे, बल्कि बच्चों का भविष्य, किसानों की फसल और कानून की साख को भी कुचल रहे हैं।

जहां पढ़नी थी किताबें, वहां उड़ रही है मौत की धूल
देवीपुर के क्रशर मार्ग पर स्थित 1 आंगनबाड़ी,1 प्राथमिक शाला,1 पूर्व माध्यमिक शाला तीनों शिक्षण संस्थान आज डस्ट चैंबर में तब्दील हो चुके हैं। भारी हाईवा और ट्रैक्टरों से उड़ती महीन धूल क्लासरूम तक घुस रही है। बच्चे खांसते हुए पढ़ रहे हैं, शिक्षक मास्क लगाकर पढ़ाने को मजबूर हैं और हालात ऐसे बन चुके हैं कि स्कूल बंद करने की नौबत आ गई है।

सवाल यह है— अगर यही “विकास” है, तो क्या शिक्षा की कोई कीमत नहीं?

खनिज विभाग की नाक के नीचे खुला लूट का खेल
ग्रामीणों के आरोप बेहद गंभीर हैं—बिना पीट-पास गिट्टी की खुलेआम बिक्री, रोज़ाना 100+ ट्रैक्टर-हाईवा की अवैध आवाजाही, पंचायत की बनी सड़कें पूरी तरह तबाह, ऊपर से 6 इंच मोटी डस्ट की परत सब कुछ जिला खनिज अधिकारी की जानकारी में होने के बावजूद न जांच, न कार्रवाई, यह चुप्पी अब सवाल बन चुकी है— क्या प्रशासन भी इस धूल में हिस्सादार है?

खेती पर हमला, पर्यावरण का गला घोंटा
हर क्रशर से रोज़ 2 से 4 टन डस्ट निकल रही है, जो 1 किलोमीटर तक फैल रही है। सब्जियों पर धूल की मोटी परत, पत्ते मुरझाए, फसल उत्पादन प्रभावित हो रही है।

न नियमों के अनुसार बाउंड्री वॉल,
न पानी के फुहारे,
न पर्यावरण संरक्षण की कोई व्यवस्था।

पेसा कानून सिर्फ कागजों में?
देवीपुर गांव पांचवीं अनुसूची और PESA Act के अंतर्गत आता है, जहां बिना ग्राम सभा की अनुमति कोई खनन गतिविधि संभव नहीं। लेकिन यहां ग्राम सभा के अधिकारों को रेत-पत्थर में दबा दिया गया है।

अब ग्रामीण सड़क पर उतर चुके हैं
उप सरपंच प्रमिला सिंह केराम के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप दिया है। चेतावनी साफ है—  क्रशर खदानों को जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद जब तक— सड़क की मरम्मत, डस्ट की सफाई, क्रशरों में पानी के फुहारे, सुनिश्चित नहीं किए जाते।

अंतिम सवाल
क्या प्रशासन बच्चों के फेफड़ों से ज्यादा
क्रशर मालिकों के मुनाफे की फिक्र करेगा?
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो देवीपुर की यह लड़ाई सिर्फ गांव की नहीं, पूरे सिस्टम के खिलाफ जनआंदोलन बन सकती है।

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