19 महीने बाद गिरफ्तारी पर गरमाई राजनीति, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने कहा- जनआंदोलन दबाने की कोशिश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा की गिरफ्तारी को लेकर सियासत तेज हो गई है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह कार्रवाई कानून से ज्यादा राजनीति से प्रेरित नजर आ रही है। संगठन का कहना है कि जनता के मुद्दे उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि जिन लोगों ने किसानों, युवाओं और छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़े मुद्दों पर लगातार आंदोलन किए, आज उन्हीं के पीछे पुलिस लगा दी गई है। उनका आरोप है कि सत्ता में बैठे नेता बड़े-बड़े काफिलों में घूम रहे हैं, जबकि जनआंदोलन से जुड़े लोगों को जेल भेजा जा रहा है।

संगठन के मुताबिक 10 जून 2024 की घटना के करीब 19 महीने बाद अचानक गिरफ्तारी की गई, जबकि पुलिस पहले ही मामले में चालान पेश कर चुकी थी और कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। ऐसे में अब गिरफ्तारी होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी का कहना है कि अगर कार्रवाई जरूरी थी तो पहले क्यों नहीं हुई।

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने दावा किया कि अमित बघेल और अजय यादव के खिलाफ दर्ज मामले किसी निजी फायदे या आपराधिक गतिविधि से जुड़े नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग जनआंदोलनों से जुड़े हुए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि दोनों लंबे समय से सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं।

संगठन ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एक ही घटना को अलग-अलग तरीके से पेश कर कई मामले दर्ज किए गए। वहीं पार्टी का कहना है कि अब तक ऐसा कोई फोटो या वीडियो सामने नहीं आया है जिसमें अमित बघेल या अजय यादव किसी मंच से भाषण देते या घटना का नेतृत्व करते दिखाई दे रहे हों। इसके बावजूद उन पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में करीब 198 लोगों को आरोपी बनाया गया था और ज्यादातर लोगों को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन तीन लोगों को अब तक राहत नहीं मिलना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है।

संगठन ने राज्य सरकार से न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि सरकार ने खुद जांच आयोग बनाया था और रिपोर्ट भी सौंप दी गई है, फिर उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।

जोहार छत्तीसगढ़ Party और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने साफ कहा कि यह लड़ाई केवल तीन लोगों की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय की लड़ाई है। संगठन ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

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