अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के शांत माने जाने वाले मुख्यालय अंबिकापुर में शुक्रवार की शाम अचानक ऐसा तूफान उठा, जिसने पूरे शहर को दहशत के साए में ला खड़ा किया। शहर के सबसे व्यस्त और वीआईपी इलाके में स्थित देव होटल में कथित फायरिंग की खबर फैलते ही अफरा-तफरी मच गई। चंद मिनटों में सोशल मीडिया, फोन कॉल और चश्मदीदों की जुबान पर एक ही सवाल था— “क्या शहर के बीचों-बीच गोलियां चली हैं?”

होटल में गूंजी गोलियों की आवाज? लोगों में भगदड़

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुक्रवार देर शाम देव होटल परिसर में अचानक दो तेज धमाकों जैसी आवाजें सुनाई दीं। आवाज इतनी साफ और डरावनी थी कि होटल में मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ देर के लिए पूरा इलाका ठहर सा गया। दुकानों के शटर गिरने लगे, राहगीर सहम गए और होटल के आसपास हड़कंप मच गया।

स्थानीय लोगों का दावा है कि यह सिर्फ शोर नहीं था, बल्कि गोली चलने जैसी आवाज थी। हालांकि यह हवाई फायरिंग थी या किसी को डराने की कोशिश—इस पर रहस्य बना हुआ है। गनीमत यह रही कि किसी के घायल होने की खबर नहीं आई।

अंबिकापुर का होटल देव

पुलिस का भारी अमला, होटल छावनी में तब्दील

सूचना मिलते ही कोतवाली और गांधीनगर थाना पुलिस के साथ-साथ एएसपी अमोलक सिंह ढिल्लो खुद मौके पर पहुंचे। देव होटल और उसके आसपास का इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया। होटल स्टाफ, ग्राहकों और वहां मौजूद लोगों से घंटों पूछताछ चली।

लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि
👉 मौके से न तो खोखा मिला
👉 न ही गोली चलने का कोई भौतिक सबूत। यहीं से कहानी ने नया मोड़ ले लिया।

पुलिस का दावा: “फायरिंग नहीं, अफवाह है!”

एएसपी अमोलक सिंह ढिल्लो ने पूरे मामले को फायरिंग की अफवाह बताते हुए सनसनी को शांत करने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार—

* हनी सिंह नामक युवक का कुछ लोगों से पुराना विवाद था
* बनारस रोड से कुछ लोग उसकी कार का पीछा कर रहे थे
* खुद को बचाने के लिए हनी सिंह देव होटल में घुस गया
* इसी हंगामे और दौड़-भाग को लोगों ने फायरिंग समझ लिया।

पुलिस का कहना है कि खुद हनी सिंह ने भी होटल के भीतर गोली चलने से इनकार किया है।

“हमने हर एंगल से जांच की, लेकिन फायरिंग का कोई सबूत नहीं मिला। स्थिति पूरी तरह सामान्य है। यह पीछा करने का मामला था।” – अमोलक सिंह ढिल्लो, एएसपी सरगुजा

सवाल जो हवा में तैर रहे हैं

लेकिन पुलिस की इस सफाई के बाद भी कई सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब अब तक अधूरा है—

* अगर फायरिंग नहीं हुई, तो लोगों ने गोली जैसी आवाज क्यों सुनी?
* शहर के सबसे सुरक्षित इलाके में पीछा करने वालों की हिम्मत कैसे हुई?
* क्या सच्चाई सीसीटीवी फुटेज में कैद है, जिसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया?
* क्या मामले को “अफवाह” बताकर दबाने की कोशिश तो नहीं?

सीसीटीवी फुटेज पर टिकी निगाहें

फिलहाल पुलिस देव होटल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इन्हीं कैमरों से यह तय होगा कि शहर ने सच में गोलियों की आवाज सुनी थी या दहशत ने अफवाह का रूप ले लिया।

कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल

चाहे फायरिंग हुई हो या नहीं, लेकिन इतना तय है कि
👉 शहर के बीचों-बीच ऐसी सनसनीखेज घटना की खबर
👉 लोगों में डर और असुरक्षा की भावना
👉 और पुलिस-जनता के दावों में फर्क

यह सब मिलकर अंबिकापुर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब देखना यह है कि जांच में सच क्या निकलता है—अफवाह या हकीकत? शहर की निगाहें पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी है।

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