मयंक वर्मा की रिपोर्ट , बलौदाबाज़ार। ग्राम पंचायत मुंडा में 15वीं वित्त आयोग की राशि को लेकर जो सच्चाई सामने आ रही है, वह गांव के विकास पर करारा तमाचा है। बजरी बिछाने और गली साफ-सफाई के नाम पर हज़ारों रुपये का भुगतान, लेकिन ग्राउंड पर काम शून्य—यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधा-सीधा घोटाले का आरोप है।

₹26,400 की बजरी—जो दिखी ही नहीं

पंचायत रिकॉर्ड के मुताबिक 11 फरवरी 2026 को सरपंच-सचिव ने लक्ष्मी ट्रेडिंग, मुंडा को गली में बजरी (चिप्स) बिछाने के नाम पर ₹26,400 का भुगतान कर दिया। मगर ग्रामीणों का दावा है कि कोई पंचायत मजदूर, कोई मशीन, कोई ठेकेदार गांव में आया ही नहीं।वार्डवासियों ने अपने-अपने घर के सामने खुद बजरी डाली।

तो सवाल उठता है—पैसा किस काम का निकला?> “हमने खुद काम किया, पंचायत की तरफ़ से कुछ नहीं हुआ—फिर भुगतान कैसे?”— वार्डवासी (नाम गोपनीय)

साफ-सफाई के नाम पर ₹55,950—गंदगी जस की तस

इसी दिन सुरेश कुमार साहू को ₹31,950 और भारत माता वाहिनी को ₹24,000—कुल ₹55,950—गली साफ-सफाई के नाम पर दिए गए। हकीकत? कई गलियां आज भी कचरे से पटी, नालियां जाम, बदबू और मच्छरों का आतंक। ग्रामीण पूछ रहे हैं—अगर सफाई हुई, तो दिखती क्यों नहीं?

15वीं वित्त का मकसद—और मुंडा की बदहाली

15वीं वित्त आयोग की राशि पेयजल, स्वच्छता, नाली, कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण के लिए होती है। ताकि गांव में स्वच्छ पानी और साफ माहौल मिले।लेकिन मुंडा की तस्वीर उलटी है—आज भी महिलाएं-बच्चे दूर के हैंडपंप से पानी ढोते हैं, गलियों में गंदगी और जल निकासी की समस्या बनी हुई है।

सवाल लाजमी है—जब पैसा आया, तो विकास क्यों नहीं आया?

सरपंच-सचिव की जवाबदेही कहां?

ग्रामीणों का आरोप है कि काम बिना किए भुगतान किया गया। अगर यह सही है, तो यह शासकीय धन का दुरुपयोग, फर्जी भुगतान और विश्वासघात है। तो फिर काम के फोटो, मस्टर रोल, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं? चुप्पी किस बात की गवाही दे रही है?

ग्रामीणों का अल्टीमेटम—जांच नहीं तो आंदोलन

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से 11 फरवरी 2026 के सभी भुगतानों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साफ चेतावनी है—दोष सिद्ध हुआ तो सरपंच-सचिव पर कड़ी कार्रवाई हो।> “15वीं वित्त गांव की अमानत है, काग़ज़ी खेल नहीं।”यह मामला सिर्फ़ मुंडा का नहीं—यह पूरे सिस्टम की साख का सवाल है।अब देखना है कि प्रशासन कार्रवाई करेगा या एक और पंचायत घोटाला इतिहास में दर्ज होगा।

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