रायपुर जिला के आरंग ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत बनरसी में तथाकथित विकास की असलियत अब सड़कों पर तैरती गंदगी और बदबू के रूप में साफ दिखाई दे रही है। गुड़ीपारा चौक से डीपरा पारा तक बनी सड़क आज ग्रामीणों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। वर्षों पहले लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई यह सड़क अब प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की खुली पोल बन चुकी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क बनाई जा रही थी, तब आखिर पानी निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या अधिकारियों और ठेकेदारों ने जानबूझकर इस जरूरी पहलू को नजरअंदाज किया, या फिर सिर्फ कागजों में काम पूरा दिखाकर पैसा हजम कर लिया गया? आज हालात यह हैं कि सड़क पर हमेशा गंदा पानी भरा रहता है, जिससे यह रास्ता कम और दलदल ज्यादा नजर आता है।

स्थानीय लोग रोजाना इस बदहाल सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। बच्चे स्कूल जाने के लिए इसी गंदगी से होकर निकलते हैं, बुजुर्गों के लिए यह रास्ता जानलेवा बन चुका है। कई बार लोग फिसलकर गिरते हैं, चोटिल होते हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?

गंदा पानी जमा रहने से पूरे इलाके में सड़ांध फैल रही है। मच्छरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग डेंगू, मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों के डर में जी रहे हैं। यह सिर्फ एक सड़क की समस्या नहीं, बल्कि पूरे गांव के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार पंचायत और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन का झुनझुना थमा दिया गया। न कोई निरीक्षण, न कोई कार्रवाई—ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदार कौन है? पंचायत, ठेकेदार या फिर पूरा सिस्टम?

यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जनता के पैसे और विश्वास के साथ खिलवाड़ है। अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का गुस्सा कभी भी फूट सकता है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और तत्काल जल निकासी की ठोस व्यवस्था की जाए।

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