सड़कों पर उतरे विधायक विक्रम मंडावी, तहसील का किया घेराव
बीजापुर। नए बस स्टैंड के पीछे जिला प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई ने बीजापुर में सियासी और सामाजिक तूफान खड़ा कर दिया है। कार्रवाई से बेघर हुए सैकड़ों परिवारों के दर्द ने आज आक्रोश का रूप ले लिया, जब बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी खुद पीड़ितों के साथ सड़कों पर उतर आए।
विधायक मंडावी ने नगर के करीब सात वार्डों का दौरा कर प्रशासन की कार्रवाई का खुला विरोध किया और फिर पीड़ित परिवारों के साथ तहसील कार्यालय का घेराव कर दिया। तहसील के सामने जमीन पर बैठकर हुए इस प्रदर्शन ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना दिया।

प्रदर्शन के दौरान गूंजते रहे नारे—“तानाशाही नहीं चलेगी!” “जिला प्रशासन होश में आओ!”
‘बिना बसाए उजाड़ना अमानवीय’ — मंडावी
विधायक मंडावी ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि
“बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए लोगों के आशियाने तोड़ देना संवेदनहीनता और जनविरोधी सोच का सबूत है। गरीबों की झोपड़ियां प्रशासन को अतिक्रमण दिखती हैं, लेकिन इन घरों में पलते बच्चों का भविष्य नहीं।”
उन्होंने साफ कहा कि यह लड़ाई सिर्फ मकानों की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की है।
चार सूत्रीय मांगों से घिरा प्रशासन
प्रदर्शन के दौरान विधायक और ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने चार साफ-साफ मांगें रखीं—
1️⃣ तोड़े गए मकानों का तत्काल और उचित मुआवजा दिया जाए।
2️⃣ प्रभावित परिवारों को पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
3️⃣ बेघर हुए परिवारों को स्थायी रूप से पुनर्वास किया जाए।
4️⃣ भविष्य में बसे हुए घरों को अतिक्रमण के नाम पर न तोड़ा जाए।

चेतावनी: मांगें नहीं मानी तो भड़केगा आंदोलन
धरना-प्रदर्शन के चलते तहसील कार्यालय के आसपास भारी संख्या में ग्रामीण जुटे रहे। हालात को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस बल तैनात किया, लेकिन जनता का गुस्सा थमता नहीं दिखा।
अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे नाराज प्रदर्शनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है— अगर मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। बीजापुर में आज सवाल सिर्फ टूटे मकानों का नहीं, बल्कि यह है— क्या प्रशासन गरीबों की आवाज सुनेगा या बुलडोजर की राजनीति जारी रहेगी?

