अम्बिकापुर/सरगुजा | विशेष रिपोर्ट

सरगुजा संभाग ले एक अइसने मामला सामने आय हवय जेन ह सिरिफ एक जमीन विवाद नइ, बल्कि पूरा प्रशासनिक व्यवस्था अउ कानून के विश्वसनीयता ऊपर बड़े सवाल खड़ा कर दिस हवय। मामला ह एक प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती ले जुड़े हवय, जेकर ऊपर सरकारी जमीन म अवैध कब्जा करके निर्माण करवाय के गंभीर आरोप लगाय गे हवय। शिकायत के बाद प्रशासन हरकत म आय हवय अउ तत्काल निर्माण काम ल रोके के आदेश जारी कर दे हवंय। फेर अब ये मामला आम जनता के बीच चर्चा के विषय बन गे हवय अउ सबो के नजर प्रशासनिक कार्रवाई ऊपर टिके हवय।

शिकायत ले खुलिस पूरा मामला

मामला के शुरुआत होइस एक लिखित शिकायत ले, जेन ला जितेन्द्र कुमार जायसवाल द्वारा प्रशासन के सामने पेश करे गे रहिस। शिकायत म साफ तौर म आरोप लगाय गे रहिस के ग्राम अजीरमा, पटवारी हल्का नंबर 56 म स्थित शासकीय जमीन, खसरा नंबर 74/1, जेन के कुल रकबा लगभग 2.480 हेक्टेयर हवय, ओखर एक हिस्सा करीब 0.700 हेक्टेयर जमीन ऊपर अवैध कब्जा करे जावत हवय।

शिकायत म ये घलो बताय गे रहिस के संबंधित प्रधान आरक्षक द्वारा जमीन म लगातार निर्माण अउ उपयोग के गतिविधि चलाय जावत रहिस। ओखर तहत शेड बनाय जा रहिस, बाउंड्री वाल (प्रिकार) खड़ा करे जावत रहिस अउ मक्का के फसल बोय जावत रहिस। ये सब गतिविधि ए बात के संकेत देथे के जमीन ला निजी संपत्ति समझ के उपयोग करे जावत रहिस, जबकि कागज म वो शासकीय जमीन आय।

ड्यूटी ले गैरहाजिरी अउ संदेह के स्थिति

ए मामला ला अउ गंभीर तब माने जावत हवय जब ये जानकारी सामने आय के संबंधित प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती के तबादला एमसीबी जिला म होय रहिस। फेर ओखर बाद घलो वो सूरजपुर पुलिस लाइन म अटैच बताय जावत रहिन। इही बीच जानकारी ये घलो निकल के आय के वो करीब एक महीना ले नियमित ड्यूटी म उपस्थित नइ रहिन।

ड्यूटी ले गैरहाजिर रहिके सरकारी जमीन म सक्रिय रहना, ए स्थिति कई सवाल खड़ा करथे। का विभाग के भीतर निगरानी के कमी हवय? का नियम के पालन सिरिफ कागज तक सीमित होगे हवय? ए सवाल अब आम जनता के मन मं उठत हवय।

राजस्व अमला के जांच अउ प्रशासनिक आदेश

शिकायत के बाद राजस्व विभाग हरकत म आय अउ राजस्व निरीक्षक द्वारा मौके के जांच करे गे। जांच रिपोर्ट के आधार म अतिरिक्त तहसीलदार न्यायालय, अम्बिकापुर-02 द्वारा आदेश जारी करे गे हवय।

आदेश म साफ तौर म निर्देश दे गे हवंय:

  • शासकीय जमीन म चलत निर्माण कार्य ला तुरंत प्रभाव ले रोके जावय
  • संबंधित व्यक्ति ला न्यायालय मं उपस्थित होके अपन दस्तावेज प्रस्तुत करना होही
  • 20 मार्च 2026 तक अतिक्रमण ला हटाय के निर्देश
  • अगर समय सीमा म पालन नइ होय, त एकपक्षीय कार्रवाई करे जाही

एखर संग-संग ये घलो स्पष्ट करे गे हवय के आदेश के अवहेलना करे के स्थिति म शासकीय अमला खुदे अतिक्रमण ला हटाही अउ पूरा खर्चा संबंधित व्यक्ति ले वसूली करे जाही।

पुलिस अउ राजस्व अमला ला जिम्मेदारी

प्रशासन द्वारा जारी आदेश म थाना प्रभारी गांधीनगर, राजस्व निरीक्षक अउ संबंधित हल्का पटवारी ला जिम्मेदारी सौंपे गे हवय के वो मौके म जाके स्थिति के नियंत्रण करंय।

ओमन ला ये निर्देश दे गे हवय:

  • मौके म पहुंच के निर्माण कार्य ला रुकवाना
  • संबंधित व्यक्ति ला नोटिस के तामील सुनिश्चित करना
  • समय सीमा के भीतर पालन प्रतिवेदन न्यायालय मं प्रस्तुत करना

एखर मतलब ये हवय के अब पूरा मामला प्रशासनिक निगरानी मं हवय अउ हर कदम के जानकारी रिकॉर्ड मं राखे जावत हवय।

कानून बनाम वर्दी – संवेदनशील बनिस मामला

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के धारा 248 के तहत शासकीय जमीन म अतिक्रमण करना एक दंडनीय अपराध आय। सामान्य स्थिति म अइसने मामला म प्रशासन सीधे कार्रवाई करथे। फेर जब आरोप एक पुलिस कर्मचारी ऊपर लगथे, त मामला अउ जियादा संवेदनशील हो जाथे।

काबर के पुलिस विभाग के जिम्मेदारी कानून के पालन करवाय के होथे। अइसने म अगर वर्दीधारी कर्मचारी ऊपर ही नियम तोड़े के आरोप लगथे, त ए घटना आम जनता के मन मं कानून के प्रति विश्वास ला कमजोर कर सकथे।

स्थानीय जनता के प्रतिक्रिया

गांव अउ आसपास के क्षेत्र के लोगन म ए मामला ला लेके चर्चा तेज होगे हवय। कई लोगन के कहना हवय: “अगर पुलिस वाले खुदे सरकारी जमीन म कब्जा करहीं, त आम आदमी कइसे नियम के पालन करही?”

कुछ लोगन ये घलो कहत हवंय के अइसने मामला म सख्त कार्रवाई जरूरी हवय, ताकि भविष्य मं कोई घलो सरकारी कर्मचारी अइसने कदम उठाय के हिम्मत नइ करय।

प्रशासनिक पारदर्शिता के परीक्षा

ए पूरा मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता अउ जवाबदेही के परीक्षा बन गे हवय। आदेश जारी हो जाना एक बात आय, फेर ओकर सही ढंग ले पालन होना अउ जमीन ले अतिक्रमण हटना असली कसौटी होही।

अइसने मामला म अक्सर देखे गे हवय के शुरुआती कार्रवाई के बाद मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाथे अउ कागज म ही सीमित रह जाथे। फेर ए मामला म जनता के नजर लगातार बने हवय, जेन ह प्रशासन ऊपर दबाव बनाए रख सकथे।

अब सबके मन म उठत सवाल

ए पूरा घटनाक्रम के बाद कुछ अहम सवाल सामने आथे:

  • का निर्धारित समय सीमा म अतिक्रमण वास्तव म हटाय जाही?
  • का संबंधित प्रधान आरक्षक ऊपर विभागीय कार्रवाई होही?
  • का ड्यूटी ले गैरहाजिरी के घलो जांच होही?
  • या फेर मामला सिरिफ नोटिस अउ कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाही?

ए सवाल के जवाब आने वाला दिन मं प्रशासनिक कार्रवाई ले मिलही।

व्यवस्था के भरोसा के सवाल

सरगुजा के ए घटना ह सिरिफ एक जमीन कब्जा के मामला नइ रहिगे हवय। ए अब पूरा व्यवस्था के भरोसा के सवाल बन गे हवय। अगर समय रहते सख्त अउ निष्पक्ष कार्रवाई नइ होही, त ए घटना जनता के मन म ये संदेश दे सकथे के कानून सब्बो बर बराबर नइ हवय।

अइसने स्थिति म प्रशासन के जिम्मेदारी अउ बढ़ जाथे के वो बिना किसी दबाव के, नियम अनुसार कार्रवाई करे अउ ये साबित करे के कानून सब्बो बर एक समान हवय।

सरगुजा संभाग म सामने आय ए मामला ह प्रशासनिक व्यवस्था बर एक चेतावनी जइसने हवय। वर्दीधारी कर्मचारी ऊपर लगाय गे आरोप ह ये साफ करथे के निगरानी अउ जवाबदेही के व्यवस्था ला अउ मजबूत करे के जरूरत हवय।

अब देखना ये हवय के प्रशासन के कार्रवाई कतेक प्रभावी साबित होथे। का सच म सरकारी जमीन ले अतिक्रमण हट जाही अउ दोषी ऊपर कार्रवाई होही, या फेर ए मामला घलो दूसर मामला जइसने समय के संग ठंडा पड़ जाही।

जनता के भरोसा बनाय रखे बर जरूरी हवय के ए मामला म निष्पक्ष, पारदर्शी अउ सख्त कार्रवाई होवय। काबर के कानून के असली ताकत ओतकेच साबित होथे, जब वो सब्बो ऊपर बराबरी ले लागू होथे — चाहे वो आम नागरिक होवय या वर्दीधारी कर्मचारी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *