रायपुर। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर से जुड़ा एक मामला अब सवालों के घेरे में आ गया है। जितेंद्र देवांगन पिता सत्यनारायण देवांगन की शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल प्रमाण पत्रों को लेकर की गई शिकायत के बाद विभागीय जांच में हो रही देरी पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। अब इस मामले से जुड़ा एक आधिकारिक पत्र भी सामने आया है, जिससे स्पष्ट होता है कि शिकायत के बाद विभाग स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी।
23 अप्रैल 2026 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा आई.सी.बी.एम. विश्वविद्यालय, नवापारा (कोसमी), जिला गरियाबंद को पत्र भेजकर जितेंद्र देवांगन के डी.सी.ए. प्रमाण पत्र की पुष्टि मांगी गई। पत्र में उल्लेख किया गया है कि जितेंद्र देवांगन प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से बैंक में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं तथा उनके शैक्षणिक अर्हता एवं कौशल प्रमाण पत्रों को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है। इसके आधार पर विश्वविद्यालय से सितंबर 2020 की अंकसूची एवं प्रमाण पत्र की सत्यता की जांच कराने का अनुरोध किया गया।इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के प्रबंध संचालक द्वारा 24 दिसंबर 2025 को 7 दिवस के भीतर जांच कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, तो आखिर 4 महीने बाद अप्रैल 2026 में विश्वविद्यालय को सत्यापन पत्र क्यों भेजा गया?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच में अनावश्यक देरी कर मामले को लंबा खींचा जा रहा है और अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।मामले को लेकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच प्रक्रिया में देरी कर संबंधित कर्मचारी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है? वहीं नागरिकों का कहना है कि उच्च अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद समय पर जांच पूरी नहीं होना प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभाग क्या कार्रवाई करता है।

