धरमजयगढ़, 13 सितंबर। धरमजयगढ़ में ₹31.75 लाख का राशन घोटाला पकड़ा गया है। खाद्य विभाग की औचक जांच में दो सरकारी राशन दुकानों के गोदाम से भारी मात्रा में अनाज गायब मिला। मामले में रैरूमाखुर्द पुलिस ने दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि चार आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं।
खाद्य विभाग की टीम जब निरीक्षण के लिए पहुंची तो गोदाम के रजिस्टर और असल स्टॉक में भारी अंतर मिला। जांच में सामने आया कि इस राशन घोटाले में कार्डधारकों से ई-पॉस मशीन पर बायोमेट्रिक अंगूठा तो लगवाया गया, लेकिन राशन नहीं दिया गया। यानी कागज पर वितरण पूरा, गोदाम में स्टॉक गायब। यही निकला पूरे राशन घोटाले का तरीका।
राशन घोटाला : ससकोबा दुकान में ₹12.89 लाख का गबन
धरमजयगढ़ ब्लॉक के ग्राम ससकोबा स्थित दुकान क्रमांक 412009078 में राशन घोटाले की पहली परत खुली। खाद्य विभाग के भौतिक सत्यापन में यहां से निम्न स्टॉक गायब पाया गया :
- चावल — 499.65 क्विंटल
- शक्कर — 5.37 क्विंटल
- नमक — 8.03 क्विंटल
अफसरों के अनुसार, गबन की कुल रकम ₹12,89,375 आंकी गई है। दुकान की संचालन एजेंसी ‘सरोज स्व सहायता समूह’ है। पुलिस ने इस राशन घोटाला में समूह की अध्यक्ष उमाबाई राठिया और सचिव माधुरी बाई राठिया को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। दुकान संचालक विक्रेता बिहारी राठिया मौके से फरार हो गया, पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, अगस्त महीने में कार्डधारकों को दुकान पर बुलाकर उनका बायोमेट्रिक अंगूठा ई-पॉस मशीन पर दर्ज कराया गया, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में राशन वितरण पूरा दिखे। लेकिन कार्डधारकों को राशन नहीं दिया गया। इस तरीके से राशन घोटाले को महीनों तक छुपाया गया।
राशन घोटाला : गनपतपुर दुकान में ₹18.86 लाख का गबन
इसी दौरान ग्राम गनपतपुर की दुकान क्रमांक 412009080 में राशन घोटाले का दूसरा और बड़ा मामला सामने आया। यहां भौतिक सत्यापन में निम्न स्टॉक गायब मिला :
- चावल — 704.93 क्विंटल
- शक्कर — 15.34 क्विंटल
- नमक — 31.98 क्विंटल
गबन की रकम ₹18,86,345 आंकी गई है। दुकान की संचालन एजेंसी ‘जननी महिला स्व सहायता समूह’ है। इस राशन घोटाला में अध्यक्ष रूबीना खान, सचिव शाहिन खान और विक्रेता शहनवाज खान के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई की भनक लगते ही तीनों आरोपी फरार हो गए।
दोनों दुकानों को मिलाकर देखा जाए तो कुल राशन घोटाला ₹31.75 लाख से अधिक का बैठता है।
राशन घोटाला मामलें में पुलिस कार्रवाई : दो FIR दर्ज, दबिश जारी
रैरूमाखुर्द पुलिस चौकी (थाना धरमजयगढ़) में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 के उल्लंघन के आधार पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और धारा 7 के तहत दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं — अपराध क्रमांक 288/2026 और 289/2026। पुलिस के अनुसार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
अब तक इस राशन घोटाला में दो महिलाएं गिरफ्तार होकर जेल जा चुकी हैं, जबकि चार आरोपी — विक्रेता बिहारी राठिया, अध्यक्ष रूबीना खान, सचिव शाहिन खान और विक्रेता शहनवाज खान — फरार बताए जा रहे हैं।
एसएसपी का बयान
SSP शशि मोहन सिंह ने इस राशन घोटाले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा —
“कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के लिए शासन की योजना में हेराफेरी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सेंधमारी करने वाले हर आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।”
एसएसपी के इस बयान से साफ है कि प्रशासन इस राशन घोटाले को गंभीरता से ले रहा है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
घोटाले का तरीका : ई-पॉस मशीन का दुरुपयोग
ई-पॉस मशीन को पारदर्शिता के लिए राशन वितरण प्रणाली में लगाया गया था, ताकि हर लाभार्थी को उसका हक समय पर मिल सके। लेकिन इस राशन घोटाला में इसी तकनीक का दुरुपयोग किया गया। कार्डधारक का अंगूठा मशीन पर लगते ही सिस्टम में एंट्री हो जाती थी कि राशन वितरित हो चुका है, जबकि असल में गोदाम से अनाज बाहर नहीं निकाला गया। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यही वजह है कि इस राशन घोटाले की भनक महीनों तक विभाग को नहीं लग सकी।
जांच का दायरा बढ़ने के आसार
खाद्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, जांच अभी पूरी नहीं हुई है। दो दुकानों में मिली इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद अंदेशा जताया जा रहा है कि धरमजयगढ़ ब्लॉक की अन्य राशन दुकानों में भी इसी तरह का राशन घोटाला हो सकता है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में पूरे ब्लॉक की दुकानों का सघन सत्यापन अभियान चलाया जा सकता है।
दोनों ही दुकानों का संचालन महिला स्व सहायता समूहों के हवाले था — ‘सरोज स्व सहायता समूह’ और ‘जननी महिला स्व सहायता समूह’। जिन समूहों को गरीबों तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वही समूह अब इस राशन घोटाले के मुख्य आरोपी बनकर सामने आए हैं। इससे स्व सहायता समूहों के जरिए संचालित राशन दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
पृष्ठभूमि
रायगढ़ जिले में पीडीएस से जुड़ी गड़बड़ियां पहले भी सामने आती रही हैं। इससे पहले लैलूंगा क्षेत्र में सरकारी बारदाने में गबन का मामला सामने आया था, जिसमें मार्कफेड कर्मियों और परिवहनकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। धरमजयगढ़ का यह ताजा राशन घोटाला उसी कड़ी में एक और बड़ा मामला माना जा रहा है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। खाद्य विभाग की जांच पूरी होने के बाद इस राशन घोटाले से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ पीडीएस व्यवस्था में निगरानी बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा।
