बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV व्यवस्था को लेकर सख्त हुआ है। गौरेला थाने की सितंबर 2024 की CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने के मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस थानों में लगे CCTV कैमरों की व्यवस्था को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में CCTV कैमरे हर समय चालू रहने चाहिए और रिकॉर्ड की गई फुटेज को तय अवधि तक सुरक्षित रखना जरूरी है।
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हाईकोर्ट में याचिका दायर
यह मामला एक एनडीपीएस केस की सुनवाई के दौरान सामने आया। मामले में जेल में बंद आरोपी बनवारी लाल गुप्ता समेत चार लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आरोपियों की ओर से 13 से 15 सितंबर 2024 के बीच गौरेला थाने में लगे CCTV कैमरों की फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इसके साथ ही 14 सितंबर 2024 की मोबाइल CDR और टावर लोकेशन भी मांगी गई थी।
पुलिस थानों में CCTV सिस्टम की नियमित निगरानी
आरोपियों का कहना था कि कथित घटना से एक दिन पहले उन्हें थाना परिसर में रखा गया था। ऐसे में उस अवधि की CCTV फुटेज से उनकी स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। हालांकि, पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित अवधि की CCTV रिकॉर्डिंग अब सिस्टम में मौजूद नहीं थी। पुलिस की ओर से बताया गया कि CCTV सिस्टम में फुटेज रखने की अवधि 18 महीने थी और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पुरानी रिकॉर्डिंग सिस्टम से हट गई।
हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर माना कि मांगी गई फुटेज अब उपलब्ध नहीं है। इसलिए उसे अदालत में पेश करने का निर्देश देना संभव नहीं था। इसी आधार पर आरोपियों की याचिका खारिज कर दी गई। लेकिन सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सामने आया और अदालत ने राज्य सरकार को पुलिस थानों में CCTV सिस्टम की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV मामले की शुरुआत कैसे हुई?
मामला गौरेला थाने में दर्ज एनडीपीएस केस से जुड़ा है। इस केस में बनवारी लाल गुप्ता समेत चार आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आरोपियों की ओर से अदालत में यह मांग रखी गई कि उन्हें उस समय की CCTV फुटेज उपलब्ध कराई जाए, जब वे कथित घटना से पहले थाना परिसर में मौजूद थे। Chhattisgarh High Court
याचिका में 13, 14 और 15 सितंबर 2024 की CCTV फुटेज मांगी गई थी। आरोपियों के अनुसार 14 सितंबर को वे थाना परिसर में थे और CCTV रिकॉर्डिंग से इस संबंध में स्थिति साफ हो सकती थी।
आरोपियों ने 14 सितंबर 2024 की मोबाइल CDR और टावर लोकेशन उपलब्ध कराने की मांग भी की थी। उनका कहना था कि मोबाइल से जुड़े रिकॉर्ड भी मामले की स्थिति को स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान जब CCTV फुटेज के बारे में जानकारी मांगी गई तो पुलिस की ओर से बताया गया कि संबंधित अवधि की रिकॉर्डिंग अब उपलब्ध नहीं है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV मामले में पुलिस की रिपोर्ट में क्या बताया गया?
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार पुलिस की ओर से ट्रायल कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि जिस अवधि की CCTV फुटेज मांगी गई थी, वह सिस्टम में मौजूद नहीं थी।
पुलिस के मुताबिक CCTV सिस्टम में करीब 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था थी। इसके बाद पुरानी फुटेज सिस्टम से हट जाती है। चूंकि सितंबर 2024 की मांगी गई रिकॉर्डिंग तय अवधि पूरी कर चुकी थी, इसलिए वह अब सिस्टम में उपलब्ध नहीं थी।
अदालत के सामने यह भी स्थिति रही कि जिस CCTV रिकॉर्ड की मांग की गई थी, वह अब सिस्टम में मौजूद नहीं है। ऐसे में उसे पेश करने का आदेश देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV मामले में अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर माना कि संबंधित फुटेज अब वास्तव में उपलब्ध नहीं है। इसी कारण आरोपियों की ओर से की गई मांग के आधार पर फुटेज पेश कराने का आदेश नहीं दिया गया।
आरोपियों ने CCTV फुटेज क्यों मांगी थी?
आरोपियों की ओर से अदालत में यह कहा गया था कि कथित घटना से एक दिन पहले उन्हें थाना परिसर में रखा गया था। उनका कहना था कि CCTV फुटेज से यह स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
थाना परिसर में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग से किसी व्यक्ति की मौजूदगी और उस समय की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है। इसी आधार पर आरोपियों ने 13 से 15 सितंबर 2024 की CCTV फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की थी।
इसके साथ ही 14 सितंबर की मोबाइल CDR और टावर लोकेशन भी मांगी गई थी।
हालांकि, CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अदालत ने उसे पेश करने का निर्देश नहीं दिया। मामले में याचिका खारिज कर दी गई।
लेकिन सुनवाई के दौरान पुलिस थानों में CCTV रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और सिस्टम को लगातार चालू रखने से जुड़ी व्यवस्था पर अदालत का ध्यान गया।
CCTV को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को कई अहम निर्देश दिए गए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। कैमरों की नियमित जांच जरूरी है। यह देखना जरूरी है कि कैमरे लगातार काम कर रहे हैं या नहीं और उनसे रिकॉर्डिंग सही तरीके से हो रही है या नहीं।
इसके अलावा फुटेज को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्टोरेज क्षमता होना भी जरूरी बताया गया है।
अदालत ने पावर बैकअप की व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा है, ताकि बिजली जाने की स्थिति में CCTV सिस्टम बंद न हो और रिकॉर्डिंग प्रभावित न हो।
कोर्ट के निर्देशों के अनुसार CCTV व्यवस्था की निगरानी लगातार की जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV निर्देश – सिर्फ कैमरा लगाना पर्याप्त नहीं
पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाए जाने का मकसद तभी पूरा हो सकता है, जब वे लगातार काम करते रहें और जरूरत पड़ने पर उनकी रिकॉर्डिंग उपलब्ध हो।
गौरेला मामले में पुरानी CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने इसी व्यवस्था पर जोर दिया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV निर्देशों के तहत थानों में कैमरों की स्थिति की नियमित जांच, रिकॉर्डिंग की निगरानी, पर्याप्त स्टोरेज और पावर बैकअप को जरूरी बताया गया है।
यदि कैमरा खराब है तो उसकी जानकारी समय पर सामने आनी चाहिए। यदि स्टोरेज क्षमता कम है तो उसे बढ़ाने की व्यवस्था होनी चाहिए। यदि बिजली की वजह से रिकॉर्डिंग बंद होती है तो पावर बैकअप की व्यवस्था की जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV निर्देश – 18 महीने की फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था
गौरेला मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात CCTV फुटेज की स्टोरेज अवधि से जुड़ी रही। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार CCTV सिस्टम में फुटेज 18 महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था थी। इस अवधि के बाद पुरानी रिकॉर्डिंग सिस्टम से हट गई। यही वजह रही कि सितंबर 2024 की मांगी गई फुटेज अब उपलब्ध नहीं थी।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से बताई गई व्यवस्था में 18 महीने की फुटेज सुरक्षित रहने की पुष्टि करने के लिए जिला स्तर पर निगरानी की बात सामने रखी। जिला स्तरीय निगरानी समितियों को हर महीने CCTV सिस्टम की जांच करने के निर्देश की जानकारी राज्य सरकार की ओर से अदालत को दी गई।
जिला स्तर पर हर महीने होगी जांच
राज्य सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान बताया गया कि जिला स्तर पर निगरानी समितियों को CCTV व्यवस्था की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इन समितियों को हर महीने यह देखना है कि पुलिस थानों में CCTV सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं।
इसके साथ ही 18 महीने की फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था की पुष्टि भी की जानी है। नियमित जांच के बाद अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने की व्यवस्था बताई गई है। इस तरह CCTV व्यवस्था की निगरानी को थाना स्तर के साथ जिला स्तर पर भी रखने की बात सामने आई है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV: 550 पुलिस थानों में व्यवस्था मजबूत होगी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को प्रदेश में CCTV व्यवस्था को मजबूत करने की योजना की जानकारी दी।
सरकार के अनुसार प्रदेश के 550 पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 102.10 करोड़ रुपये की परियोजना पर विचार किया जा रहा है। इस परियोजना के जरिए पुलिस थानों में CCTV से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में काम किया जाना है।
सरकार की ओर से अदालत को यह जानकारी भी दी गई कि जिला स्तर पर निगरानी समितियां बनाई गई हैं और उन्हें CCTV सिस्टम की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
पावर बैकअप को लेकर भी निर्देश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV मामले में पावर बैकअप की व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
पुलिस थानों में बिजली की आपूर्ति बाधित होने पर CCTV कैमरे और रिकॉर्डिंग सिस्टम बंद हो सकते हैं। ऐसे में बिजली जाने के दौरान रिकॉर्डिंग प्रभावित न हो, इसके लिए पावर बैकअप की व्यवस्था जरूरी है।
हाईकोर्ट ने CCTV व्यवस्था में पावर बैकअप को लेकर भी ध्यान देने को कहा है। इसके साथ ही कैमरों की नियमित कार्यशीलता और स्टोरेज क्षमता की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना जरूरी
CCTV फुटेज पुलिस जांच और अदालत में चलने वाले मामलों से जुड़ा महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड हो सकता है।
किसी व्यक्ति की थाना परिसर में मौजूदगी, पुलिस कार्रवाई से जुड़ी स्थिति या किसी घटना के समय वहां मौजूद लोगों के बारे में CCTV रिकॉर्ड से जानकारी मिल सकती है।
गौरेला मामले में आरोपियों ने भी इसी आधार पर पुरानी फुटेज मांगी थी। लेकिन निर्धारित स्टोरेज अवधि पूरी होने के बाद रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं रहा।
इसी स्थिति को देखते हुए अदालत ने कहा कि तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट नहीं होने चाहिए। जहां लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी
हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक बनाए रखने पर जोर दिया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV मामले में यह बात सामने आई कि CCTV सिस्टम का लगातार चालू रहना और रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी है।
राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था की नियमित निगरानी हो और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन किया जाए।
इस संबंध में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा गया है।
CCTV व्यवस्था में लापरवाही पर जिम्मेदारी तय होगी
अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही के कारण महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड नष्ट नहीं होना चाहिए।
यदि किसी थाने में CCTV कैमरे लंबे समय तक बंद रहते हैं, रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं होती या स्टोरेज की कमी के कारण जरूरी फुटेज उपलब्ध नहीं रहती, तो ऐसी स्थिति की जानकारी सामने आनी चाहिए।
जहां लापरवाही सामने आती है, वहां जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बताई गई है। इससे CCTV व्यवस्था की निगरानी को लेकर अधिकारियों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
CDR और टावर लोकेशन की भी मांग
इस केस में आरोपियों ने CCTV फुटेज के साथ 14 सितंबर 2024 की मोबाइल CDR और टावर लोकेशन भी मांगी थी।
आरोपियों की ओर से यह रिकॉर्ड इसलिए मांगा गया था ताकि उस दिन की स्थिति से जुड़ी जानकारी सामने आ सके।
CCTV फुटेज और मोबाइल रिकॉर्ड दोनों को मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के तौर पर पेश करने की मांग की गई थी।
हालांकि, गौरेला थाने की CCTV फुटेज के संबंध में पुलिस की रिपोर्ट में यह बताया गया कि संबंधित रिकॉर्ड 18 महीने की अवधि पूरी होने के बाद सिस्टम से हट चुका था।
हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
हाईकोर्ट के सामने जब यह तथ्य आया कि मांगी गई CCTV फुटेज अब सिस्टम में उपलब्ध नहीं है, तो अदालत ने उसे पेश करने का आदेश नहीं दिया। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अदालत ने माना कि संबंधित फुटेज अब मौजूद नहीं है। इसलिए उसे पेश करने का निर्देश देना संभव नहीं था।
इसी आधार पर आरोपियों की याचिका खारिज कर दी गई। लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान CCTV व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को दिए गए निर्देश अलग महत्व रखते हैं।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV व्यवस्था में क्या-क्या जरूरी?
अदालत के निर्देशों और राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था से जुड़ी कई बातें सामने आई हैं। सबसे पहले कैमरों की नियमित जांच जरूरी है। यह सुनिश्चित करना होगा कि कैमरे चालू हैं और रिकॉर्डिंग सही तरीके से हो रही है।
दूसरा, पर्याप्त स्टोरेज क्षमता होनी चाहिए। तय अवधि की फुटेज सुरक्षित रखने के लिए सिस्टम में पर्याप्त जगह होना जरूरी है।
तीसरा, बिजली जाने पर CCTV सिस्टम बंद न हो, इसके लिए पावर बैकअप की व्यवस्था जरूरी है।
चौथा, 18 महीने की फुटेज सुरक्षित रहने की पुष्टि करने के लिए नियमित जांच की व्यवस्था बताई गई है।
पांचवां, जिला स्तर पर निगरानी समितियों को हर महीने जांच करने और अनुपालन रिपोर्ट देने की जानकारी अदालत को दी गई है।
आदेश की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा है।
इसका उद्देश्य यह है कि अदालत के निर्देशों की जानकारी पुलिस प्रशासन के संबंधित स्तर तक पहुंचे और CCTV व्यवस्था को लेकर जरूरी कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का लगातार पालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
102.10 करोड़ की परियोजना पर सरकार की जानकारी
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदेश के 550 पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 102.10 करोड़ रुपये की परियोजना पर विचार किया जा रहा है।
इससे जुड़ी व्यवस्था में कैमरों, स्टोरेज और दूसरे जरूरी तकनीकी इंतजामों को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाना है।
राज्य सरकार ने जिला स्तर पर निगरानी समितियों की व्यवस्था की जानकारी भी दी। इन समितियों को हर महीने CCTV सिस्टम की जांच करने और फुटेज सुरक्षित रखने की स्थिति की पुष्टि करने के निर्देश दिए गए हैं।
CCTV फुटेज का रिकॉर्ड क्यों महत्वपूर्ण है?
पुलिस थानों में CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग कई मामलों में घटनाक्रम को समझने में मदद कर सकती है।
थाना परिसर में किसी व्यक्ति की मौजूदगी, किसी व्यक्ति के आने-जाने का समय और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी स्थिति रिकॉर्डिंग में दर्ज हो सकती है। इसी वजह से CCTV फुटेज को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के तौर पर सुरक्षित रखना जरूरी माना जाता है।
गौरेला थाने के मामले में आरोपियों ने भी इसी रिकॉर्ड की मांग की थी। लेकिन 18 महीने की स्टोरेज अवधि पूरी होने के बाद फुटेज उपलब्ध नहीं रही। इसके बाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की CCTV व्यवस्था की निगरानी और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV निर्देशों के बाद आगे क्या होगा?
अब राज्य सरकार को पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था की निगरानी और मजबूत करनी होगी। जिला स्तर की निगरानी समितियों को हर महीने सिस्टम की जांच करने की व्यवस्था बताई गई है। इन समितियों को यह भी देखना होगा कि 18 महीने की फुटेज सुरक्षित है या नहीं और कैमरे लगातार काम कर रहे हैं या नहीं।
राज्य सरकार की ओर से 550 पुलिस थानों के लिए करीब 102.10 करोड़ रुपये की परियोजना पर विचार किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई है। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा गया है।
कोर्ट के निर्देशों का मुख्य फोकस
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV मामले में अदालत के निर्देशों का मुख्य फोकस CCTV सिस्टम को लगातार चालू रखने, रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और उसकी नियमित निगरानी पर है। इसके साथ ही पर्याप्त स्टोरेज और पावर बैकअप की व्यवस्था भी जरूरी बताई गई है।
जिला स्तर पर हर महीने जांच और 18 महीने की फुटेज सुरक्षित रहने की पुष्टि की व्यवस्था की जानकारी भी राज्य सरकार ने अदालत को दी है। जहां किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है, वहां जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।
गौरेला थाने की सितंबर 2024 की CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने से सामने आया मामला अब प्रदेश के सभी पुलिस थानों की CCTV व्यवस्था से जुड़ गया है। एनडीपीएस केस में आरोपी बनवारी लाल गुप्ता समेत चार लोगों ने 13 से 15 सितंबर 2024 की फुटेज और 14 सितंबर की मोबाइल CDR व टावर लोकेशन उपलब्ध कराने की मांग की थी।
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित CCTV फुटेज 18 महीने की स्टोरेज अवधि पूरी होने के बाद सिस्टम से हट चुकी थी। हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर फुटेज पेश कराने का आदेश नहीं दिया और याचिका खारिज कर दी।
लेकिन सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CCTV व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को कई जरूरी निर्देश दिए गए। कोर्ट ने कहा कि CCTV कैमरों की नियमित जांच होनी चाहिए, कैमरे लगातार चालू रहने चाहिए, फुटेज सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्टोरेज होना चाहिए और बिजली जाने की स्थिति में पावर बैकअप उपलब्ध होना चाहिए।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदेश के 550 पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था मजबूत करने के लिए करीब 102.10 करोड़ रुपये की परियोजना पर विचार किया जा रहा है। साथ ही जिला स्तर पर निगरानी समितियों को हर महीने CCTV सिस्टम की जांच करने, 18 महीने की फुटेज सुरक्षित रखने की पुष्टि करने और अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश की जानकारी दी गई।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था का लगातार पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
मामले में आरोपियों की याचिका फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण खारिज कर दी गई, लेकिन सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देश अब प्रदेश के पुलिस थानों में CCTV सिस्टम की कार्यशीलता, स्टोरेज और पावर बैकअप की निगरानी से जुड़े हैं।

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