आबकारी विभाग की सख्त कार्रवाई: शराब दुकानों में गड़बड़ी पर तीन अधिकारी निलंबित

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री को लेकर चल रही गड़बड़ियों पर आबकारी विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। तय दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने और अवैध शराब बनाने से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में विभाग ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें फील्ड स्तर पर निगरानी की भारी कमी सामने आई।

आबकारी विभाग की सख्त कार्रवाई

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महासमुंद में औचक जांच के दौरान खुली पोल

घटना की शुरुआत 7 सितंबर 2026 को हुई, जब राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की टीम महासमुंद जिले की एक कम्पोजिट मदिरा दुकान का औचक निरीक्षण करने पहुंची। यह दुकान तुमा डबरी क्षेत्र, बेमचा में स्थित है। जांच दल ने दुकान की कार्यशैली परखने के लिए एक छद्म खरीदार की मदद ली, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दुकान संचालक शासन द्वारा तय दरों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

जांच में सामने आया कि दुकान में तैनात विक्रेता दिनेश्वर ध्रुव ने विदेशी शराब ब्रांड बैगपाईपर व्हिस्की का एक पाव, जिसकी सरकार निर्धारित कीमत 190 रुपये है, उसे 200 रुपये में बेचा। यानी तय दर से 10 रुपये अतिरिक्त वसूले गए। टीम ने इसकी पुष्टि के लिए दोबारा खरीद परीक्षण भी करवाया। इस बार दुकान के दूसरे विक्रेता गुलाब डहरीया ने भी वही व्हिस्की उसी बढ़ी हुई कीमत, यानी 200 रुपये में बेची।

इस तरह दो पाव की खरीद पर, जिसकी वास्तविक कीमत 380 रुपये बनती थी, ग्राहक से कुल 400 रुपये वसूले गए। दोनों सौदों को मिलाकर देखा जाए तो दुकान संचालकों ने ग्राहकों से 20 रुपये अतिरिक्त लिए। यह रकम भले ही छोटी लगे, लेकिन यह दर्शाती है कि सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही थी और दुकान में इस तरह की गड़बड़ी नियमित रूप से चल रही होगी।

आबकारी विभाग ने दोनों विक्रेताओं पर किया मामला दर्ज

जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होते ही आबकारी विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दिनेश्वर ध्रुव और गुलाब डहरीया, दोनों विक्रेताओं के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 39(ग) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया। यह धारा तय दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने जैसे अपराधों पर लागू होती है और इसके तहत दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

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दुकान प्रभारी निरीक्षक भी निलंबित

विभाग ने इस पूरे प्रकरण को केवल विक्रेताओं की गलती न मानकर, संबंधित क्षेत्र में निगरानी तंत्र की विफलता के रूप में देखा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि अगर संबंधित इलाके का प्रभारी अधिकारी नियमित रूप से दुकानों का निरीक्षण करता और सख्ती बरतता, तो इस तरह की गड़बड़ी संभव नहीं होती। आबकारी विभाग छत्तीसगढ़

इसी आधार पर महासमुंद क्षेत्र के आबकारी उप निरीक्षक नितेश सिंह बैस पर गाज गिरी। वे संबंधित मदिरा दुकान के साथ-साथ वृत्त प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। विभाग ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय दुर्ग संभाग के उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता कार्यालय, दुर्ग को बनाया गया है। नियमानुसार उन्हें इस दौरान जीवन निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) दिया जाएगा, जो निलंबित शासकीय कर्मचारियों को उनके मूल वेतन के एक हिस्से के रूप में मिलता है।

कांकेर में अवैध शराब निर्माण का मामला

महासमुंद की घटना के साथ-साथ कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र से भी आबकारी विभाग के लिए एक और गंभीर मामला सामने आया। यहां विभागीय टीम को छापेमारी के दौरान अवैध शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की बड़ी मात्रा में बरामदगी हुई। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार संगठित तरीके से चल रहा था, जिस पर स्थानीय आबकारी अमले की नजर नहीं गई।

इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार मानते हुए विभाग ने दो और अधिकारियों को निलंबित किया। इनमें आबकारी उप निरीक्षक रानू मरकाम का नाम शामिल है, जो उस क्षेत्र की निगरानी का दायित्व संभाल रही थीं। इसके अलावा जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय में प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी के पद पर तैनात मधुकर श्याम हरित को भी निलंबित किया गया है। यह दर्शाता है कि विभाग ने केवल फील्ड स्तर के अधिकारियों तक सीमित न रहकर, जिला स्तर की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी को भी जवाबदेह ठहराया है।

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आबकारी विभाग का सख्त संदेश

इन दोनों मामलों में हुई कार्रवाई से आबकारी विभाग ने साफ संकेत दिया है कि शराब दुकानों में तय दरों का उल्लंघन और अवैध शराब निर्माण जैसी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग की इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि अब केवल दुकान स्तर के कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि उनकी निगरानी करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है।

राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की यह जांच दर्शाती है कि प्रदेश भर में शराब दुकानों की औचक जांच का सिलसिला जारी है, और छद्म खरीदारों के जरिए गड़बड़ियां पकड़ने का तरीका कारगर साबित हो रहा है। आने वाले दिनों में विभाग की ओर से ऐसी और जांचें होने की संभावना जताई जा रही है, ताकि प्रदेश में शराब बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी और नियमबद्ध बनाया जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या केवल निलंबन जैसी कार्रवाई से इन गड़बड़ियों पर स्थायी रोक लग पाएगी, या फिर विभाग को दुकानों की निगरानी के तरीके में भी बड़े बदलाव करने होंगे। फिलहाल आबकारी विभाग की इस कार्रवाई को क्षेत्र में सख्ती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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