भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े बड़े स्क्रैप चोरी मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। पहले सिर्फ पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी, लेकिन अब जीएसटी विभाग ने भी भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है। सवाल यह है कि आखिर भिलाई स्टील प्लांट जैसे बड़े सरकारी संस्थान से इतनी बड़ी मात्रा में लौह स्क्रैप कैसे और किसकी मिलीभगत से बाहर पहुंचता रहा?

भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप चोरी मामला है क्या?
पूरा मामला भिलाई-3 थाना क्षेत्र से जुड़ा है। बीती 26 मई को पुलिस ने ग्राम अगलोरडीह में छापेमारी करते हुए BSP से चोरी किया गया करीब 250 टन लौह स्क्रैप और 10 वाहन जब्त किए थे। जब्त की गई इस संपत्ति की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि भिलाई प्लांट जैसे बड़े संस्थान के भीतर से लगातार चल रहे एक बड़े खेल की ओर इशारा करती है।
इस पूरी कार्रवाई में अब तक 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से 16 के खिलाफ अदालत में चालान भी पेश हो चुका है। लेकिन भिलाई स्टील प्लांट से जुड़ी यह चोरी सिर्फ इन 17 लोगों तक सीमित है, या इसके पीछे कोई और बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है — यह सवाल अब भी बना हुआ है।
अब जीएसटी विभाग ने क्यों शुरू की जांच?
पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जीएसटी विभाग ने भी भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े इस मामले में दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी विभाग ने इस मामले से जुड़े वाहनों, फर्मों और खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। पुलिस ने ये सारे दस्तावेज विभाग को सौंप भी दिए हैं।
भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े इस मामले में अब जीएसटी टीम मुख्य रूप से इन बिंदुओं की पड़ताल करेगी:
- आरोपियों की फर्मों का पंजीकरण और उनका लेन-देन रिकॉर्ड
- स्क्रैप की खरीद-बिक्री से जुड़े बिल और चालान
- भिलाई स्टील प्लांट से माल परिवहन के दस्तावेज
- प्लांट के चारों प्रमुख गेटों के आवक-जावक रजिस्टर
यानी अब सिर्फ पकड़े गए स्क्रैप और वाहनों तक बात सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्लांट से जुड़े पूरे कारोबारी जाल को खंगाला जाएगा।
भिलाई स्टील प्लांट का ब्लैकलिस्ट रजिस्टर सिस्टम क्या है?
भिलाई स्टील प्लांट में चार मुख्य गेट हैं — बोरिया, डिस्पोजल, रोलिंग और स्टॉक यार्ड। इन्हीं गेटों से मालवाहक वाहनों की आवाजाही होती है। सूत्रों के मुताबिक, भिलाई स्टील प्लांट के हर गेट पर एक ब्लैकलिस्ट रजिस्टर रखा जाता है।
जब भी किसी वाहन में कोई गड़बड़ी पकड़ी जाती है, तो उसका पूरा विवरण इस रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाता है और उस वाहन की फोटो भी गेट पर चस्पा कर दी जाती है, ताकि वह वाहन दोबारा भिलाई स्टील प्लांट में प्रवेश न कर सके। सवाल यह उठता है कि जब स्टील प्लांट के पास इतनी सख्त निगरानी व्यवस्था मौजूद है, तो फिर 250 टन स्क्रैप बाहर कैसे पहुंच गया?
ब्लैकलिस्ट रजिस्टर की जांच से क्या खुलासा हो सकता है?
सूत्रों के मुताबिक भिलाई स्टील प्लांट के इन रजिस्टरों में पहले पकड़े गए वाहनों के साथ-साथ उस समय के अधिकृत लिफ्टर, सुपरवाइजर, माल की मात्रा और संबंधित पार्टी का पूरा ब्योरा भी दर्ज होता है। इन रिकॉर्ड की गहराई से पड़ताल करने पर यह साफ हो सकेगा कि पहले किन वाहनों पर स्टील प्लांट प्रशासन ने कार्रवाई की थी, और कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्हीं वाहनों को नंबर प्लेट बदलकर दोबारा इस्तेमाल में लाया गया।
यह पहलू मामले को और गंभीर बना देता है, क्योंकि अगर यह आशंका सही साबित होती है, तो इसका मतलब है कि भिलाई स्टील प्लांट से माल चोरी करने वाला गिरोह लंबे समय से एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था।
आरटीओ अब तक जांच से दूर, उठ रहे बड़े सवाल
भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप चोरी मामले में सबसे बड़ा सवाल परिवहन विभाग यानी आरटीओ की निष्क्रियता को लेकर उठ रहा है। संदिग्ध वाहनों की नंबर प्लेट में गड़बड़ी की बात सामने आने और जांच स्थल पर कई नंबर प्लेट बरामद होने की जानकारी के बावजूद, आरटीओ की टीम अब तक मौके पर नहीं पहुंची है।
पुलिस और जीएसटी विभाग दोनों BSP से जुड़े इस मामले में सक्रियता से जांच में जुटे हैं, लेकिन आरटीओ की खामोशी कई सवालों को जन्म दे रही है:
- क्या इन वाहनों की नंबर प्लेट वाकई बदली गई थी?
- इन वाहनों का असली पंजीकरण आखिर किसके नाम पर है?
- क्या फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वाहन BSP में लगातार आते-जाते रहे?
जब तक आरटीओ इन सवालों का जवाब खोजने के लिए मैदान में नहीं उतरता, तब तक भिलाई प्लांट से जुड़े इस पूरे नेटवर्क की तस्वीर अधूरी ही रहेगी।
पुलिस और जीएसटी की संयुक्त जांच से क्या उम्मीद?
भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े इस मामले में पुलिस और जीएसटी विभाग की संयुक्त जांच से आने वाले दिनों में मामले की और परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों विभाग मिलकर यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर स्टील प्लांट से निकलने वाला यह स्क्रैप किन-किन हाथों से गुजरकर बाजार तक पहुंचता रहा और इसमें कौन-कौन शामिल था।
हालांकि आरटीओ की जांच में हो रही देरी को लेकर सवाल अब भी बरकरार हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अगर परिवहन विभाग जल्द अपनी जांच शुरू नहीं करता, तो वाहनों से जुड़े कई अहम सुराग समय के साथ कमजोर पड़ सकते हैं, जिससे स्टील प्लांट मामले की तह तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
आगे क्या हो सकता है भिलाई स्टील प्लांट मामले में?
भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप चोरी मामले में आगे और गिरफ्तारियां और नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि का फिलहाल इंतजार है। पुलिस और जीएसटी विभाग की जांच जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे उम्मीद जताई जा रही है कि भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े इस पूरे रैकेट का जल्द ही पूरा खुलासा हो सकता है।
फिलहाल स्टील प्लांट प्रशासन, पुलिस और जीएसटी विभाग की निगाहें उन दस्तावेजों और रजिस्टरों पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकते हैं। वहीं आरटीओ की चुप्पी को लेकर आम लोगों और स्थानीय स्तर पर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक इतने संवेदनशील मामले में परिवहन विभाग अब तक मैदान में क्यों नहीं उतरा।
कुल मिलाकर, BSP से जुड़ा यह स्क्रैप चोरी मामला अब सिर्फ एक चोरी की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था, विभागीय तालमेल और जवाबदेही से जुड़े बड़े सवाल खड़े करने लगा है। आने वाले दिनों में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और भिलाई प्लांट से जुड़ा यह पूरा नेटवर्क किस हद तक बेनकाब होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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