भिलाई, छत्तीसगढ़ | 1 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ में एक बार फिर सुबह-सुबह प्रवर्तन निदेशालय ED की टीम किसी के दरवाजे पर जा पहुंची। मंगलवार सुबह करीब छह बजे, जब शहर अभी ठीक से जगा भी नहीं था, ED के आठ अफसर दो गाड़ियों में सवार होकर पुरानी भिलाई पहुंचे। मंज़िल थी — पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पीए (निजी सहायक) केके चंद्रवंशी का घर। इतनी सुबह, इतनी बड़ी टीम और इतनी तैयारी के साथ पहुंचना ही अपने आप में बता देता है कि यह कोई मामूली विजिट नहीं थी।
घर के अंदर घुसते ही अफसरों ने कागज-पत्तर खंगालना शुरू कर दिया। अलमारियां खुलीं, फाइलें पलटी गईं, और जो भी जरूरी चीज़ें मिलीं, उन्हें बारीकी से देखा गया। घर के बाहर पुलिस भी तैनात कर दी गई, ताकि कोई गड़बड़ी न हो। इतनी बड़ी तैयारी देखकर मोहल्ले वालों को कुछ ही देर में पता चल गया कि आज कोई बड़ी बात हुई है।
सबसे मजे की बात यह रही कि इतना बड़ा अमला लेकर पहुंचने के बावजूद ED ने अब तक यह साफ नहीं बताया कि आखिर यह छापा किस मामले में मारा गया। यानी टीम भी आ गई, तलाशी भी हो गई, बस “किसलिए हुई” — यह सवाल अब भी हवा में लटका है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले का तार शराब घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है।
12 दिन पहले भी हुई थी ऐसी ही बड़ी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब ED सुबह-सुबह किसी के घर पहुंची हो। ठीक 12 दिन पहले भी एजेंसी ने एक साथ रायपुर, दुर्ग-भिलाई और धमतरी में कई घरों पर छापे मारे थे। रायपुर में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के अनुपम नगर वाले घर और धमतरी के सिहावा रोड वाले घर पर तो लगातार नौ घंटे तक तलाशी चलती रही। नौ घंटे — यानी एक पूरा दिन, बिना रुके। टीम वहां से कुछ जरूरी कागज़ भी अपने साथ ले गई।
उसी दिन दुर्ग में दो बिल्डर सजल जैन और विश्वास गुप्ता के घरों पर भी सात अफसरों की एक और टीम पहुंची थी। मतलब एक ही सुबह, तीन अलग-अलग शहरों में एक साथ छापे। इतनी सारी जगह एक साथ टीम भेजना खुद बताता है कि यह पूरा काम पहले से सोच-समझकर, पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था।

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रामगोपाल अग्रवाल — तीन साल छिपे रहे, फिर खुद आकर पकड़ा दिए हाथ
अब बात करते हैं इस पूरे मामले के एक और अहम किरदार की, रामगोपाल अग्रवाल। कांग्रेस से 1980 से जुड़े और 2013 में पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष बने रामगोपाल अग्रवाल इस केस में करीब तीन साल तक जांच वालों की पकड़ से दूर रहे। न पता, न ठिकाना — बस “फरार” वाला टैग लगा रहा।

आखिरकार 8 जुलाई 2026 को उन्होंने खुद ही आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के दफ्तर जाकर सरेंडर कर दिया। डॉक्टरी जांच के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पहले पुलिस रिमांड और फिर 5 अगस्त तक EOW की हिरासत मिली। इसके बाद 11 अगस्त 2026 को, जब वे पहले से ही रायपुर जेल में बंद थे, ED ने उन्हें फिर से, इस बार मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने बार-बार उन्हें ED की हिरासत में भेजा।
ED का कहना है कि इस पूरे खेल से जो पैसा जुटाया गया, उसका बड़ा हिस्सा रामगोपाल अग्रवाल के कहने पर कांग्रेस के दफ्तर राजीव भवन तक पहुंचाया जाता था। यह आरोप अभी तक सिर्फ आरोप है, इस पर कोर्ट का फैसला आना बाकी है। इस पूरी कार्रवाई पर भूपेश बघेल ने कहा था कि एजेंसी के पास कोई सबूत नहीं है और उनके साथी को बेवजह परेशान किया जा रहा है।
घोटाले की रकम — हर बार नया आंकड़ा
इस कथित शराब घोटाले की रकम को लेकर भी हर बार अलग-अलग बात सामने आती रही है। कभी बताया गया कि यह करीब 2,883 करोड़ रुपये का मामला है, तो कभी यह आंकड़ा 3,000 करोड़ हो गया, फिर 3,200 करोड़, और आगे बढ़कर 3,400 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। जांच जितनी आगे बढ़ी, यह आंकड़ा भी उतना ही बढ़ता चला गया मानो हर हफ्ते इसमें कुछ न कुछ नया जुड़ता जा रहा हो।
ED और EOW के मुताबिक, साल 2019 से 2022-23 के बीच राज्य में सरकारी शराब बेचने के काम में एक गिरोह बनाकर गड़बड़ी की गई। बिना हिसाब की शराब बनाकर बेची गई, कमीशन लिया गया, और इससे सरकार को भारी नुकसान हुआ। इस पूरे मामले में कारोबारी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा का नाम बार-बार सामने आता रहा है — जांच एजेंसियां इन्हीं दोनों को इस गिरोह के मुखिया के तौर पर देखती हैं।
यह पूरा खेल चलता कैसे था
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पूरा काम काफी सोच-समझकर चलाया गया। आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों में जानबूझकर शराब की कीमत बढ़ाई गई, जिससे ऊपर का पैसा चुनिंदा लोगों की जेब में जाता था। इसके अलावा बिना हिसाब की शराब बनाकर बाजार में उतारी गई, जिससे सरकार को सीधा नुकसान हुआ। कुछ चुनिंदा कंपनियों को खास लाइसेंस देकर उनसे मोटा कमीशन लेने की बात भी सामने आई है।
यह पूरा मामला इतना बड़ा बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां इसे राज्य के अब तक के सबसे बड़े पैसों के घोटालों में गिनती हैं। लेकिन ध्यान रहे अभी तक इनमें से किसी भी बात पर कोर्ट की मुहर नहीं लगी है, मामला अभी अदालत में ही है।
बघेल परिवार को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली छूट
इसी बीच बघेल परिवार को कानूनी मोर्चे पर एक और झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से बचने वाली उनकी अर्जी खारिज कर दी और परिवार को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। इसी दौरान पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल को भी 14 दिन की और रिमांड मिली, और वे 18 अगस्त 2026 तक जेल में ही रहे। यानी कोर्ट ने भी साफ कर दिया कि फिलहाल किसी को कोई राहत नहीं मिलने वाली।
भूपेश बघेल के करीबी लोगों तक पहुंची ED जांच
यह गौर करने वाली बात है कि जांच अब सीधे भूपेश बघेल के आस-पास के लोगों तक पहुंच चुकी है। इससे पहले खुद उनके भिलाई वाले घर पर भी छापा पड़ चुका है, उनके बेटे के मामले में भी कार्रवाई हो चुकी है। अब उनके पीए के घर पर छापा पड़ने से यह साफ लगता है कि जांच का घेरा धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा है — पहले नेता, फिर परिवार, और अब घर का स्टाफ।

कांग्रेस पार्टी लगातार यह सवाल उठाती रही है कि क्या यह सारी कार्रवाई सिर्फ ईमानदार जांच के लिए हो रही है, या इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद भी है। पार्टी के नेता पहले भी कह चुके हैं कि केंद्र सरकार इन एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को कमजोर करने के लिए कर रही है। दूसरी तरफ जांच एजेंसियां अपनी बात पर कायम हैं कि यह पूरी तरह से कानून के हिसाब से हो रहा काम है।
PMLA केस में इतनी देर क्यों लगती है
मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत चलने वाली जांच अपने आप में एक लंबा काम है। इसकी शुरुआत आमतौर पर किसी और एजेंसी की रिपोर्ट या FIR से होती है, जिसके बाद ED अपनी अलग जांच शुरू करती है। इसके बाद संपत्ति जब्त करना, गिरफ्तारी करना, कागज़ात इकट्ठा करना और लोगों के बयान लेना — यह सब कदम-दर-कदम चलता है।
छत्तीसगढ़ के इस शराब घोटाले में भी यही तरीका दिखता है — पहले EOW की जांच, फिर ED आई, इसके बाद एक के बाद एक गिरफ्तारियां हुईं, और अब घर-घर जाकर कागज़ खंगाले जा रहे हैं। हर हफ्ते इस मामले में कोई न कोई नया नाम या नई बात सामने आ जाती है।
केके चंद्रवंशी के घर पर ही क्यों गई ED टीम
केके चंद्रवंशी लंबे समय से भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं और उनके निजी दफ्तर का पूरा काम-काज इन्हीं के पास रहा है। जब जांच एजेंसियों को किसी बड़े नेता के आस-पास के लोगों की जानकारी चाहिए होती है, तो उसके करीबी लोगों के घर जाना जांच का एक आम तरीका है। यही वजह मानी जा रही है कि इस बार निशाना सीधे पीए के घर पर लगा।

हालांकि यह बता देना जरूरी है कि अभी तक केके चंद्रवंशी के खिलाफ कोई ठोस आरोप सामने नहीं आया है। हो सकता है कि यह तलाशी सिर्फ इसलिए हुई हो ताकि किसी बड़े मामले से जुड़े कागज़ या जानकारी उनके घर से मिल जाए। कई बार एजेंसियां किसी को सीधा आरोपी न मानकर, बस जानकारी के लिए भी उसके घर जांच करने पहुंच जाती हैं।
मोहल्ले में मची हलचल
पुरानी भिलाई अपनी घनी आबादी और पुराने मोहल्लों के लिए जानी जाती है। मंगलवार सुबह यह इलाका एक अलग वजह से चर्चा में आ गया। सुबह-सुबह सरकारी गाड़ियां देखकर आस-पास के लोग हैरान रह गए। लोग खिड़कियों और दरवाजों से यह देखने की कोशिश करते रहे कि आखिर हो क्या रहा है। कुछ ही घंटों में यह बात पूरे इलाके में फैल गई और लोग आपस में इसी की बातें करते रहे।
छत्तीसगढ़ में जांच एजेंसियों की तेज़ी
पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ में जांच एजेंसियों का काम काफी तेज़ हो गया है। शराब घोटाले के अलावा कोयला घोटाला और कस्टम मिलिंग घोटाला जैसे मामलों में भी कांग्रेस के पुराने कार्यकाल से जुड़े कई अधिकारियों और नेताओं पर शिकंजा कसा जा रहा है। इसी वजह से कई लोग इसे राज्य के इतिहास के सबसे बड़े पैसों के मामलों में गिनते हैं। ED Website

एक तरफ जांच एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार पर लगाम कसने वाली बड़ी कार्रवाई बताती हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई कहता है। जैसे-जैसे इस मामले में नई गिरफ्तारियां और नए कागज़ात सामने आते जाएंगे, यह लड़ाई और तेज होती जाएगी।
आरोप अभी सिर्फ आरोप हैं
इस पूरे मामले में एक बात बार-बार याद रखनी चाहिए — अभी तक किसी भी आरोप पर कोर्ट की आखिरी मुहर नहीं लगी है। जांच एजेंसियां अपनी बात कहती रहती हैं, लेकिन कानून के मुताबिक जब तक कोर्ट में किसी का दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक कोई दोषी नहीं माना जा सकता। चाहे रामगोपाल अग्रवाल हों, चैतन्य बघेल हों, या अब केके चंद्रवंशी — इन सबका आखिरी फैसला कोर्ट में ही तय होगा।
आगे क्या होगा
फिलहाल केके चंद्रवंशी के घर हुई इस तलाशी की सही वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है। ED का आधिकारिक बयान आने के बाद ही यह पता चलेगा कि यह छापा किस मामले से जुड़ा था और आगे जांच किस ओर बढ़ेगी। फिर भी, पिछले कुछ हफ्तों में जिस तरह लगातार बड़ी कार्रवाइयां हो रही हैं, उससे साफ है कि यह मामला अभी शांत होने वाला नहीं है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में यह मामला अभी भी चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है, और आने वाले दिनों में इससे जुड़ी और भी बड़ी बातें सामने आ सकती हैं। तब तक के लिए सबकी नज़र ED के अगले बयान पर टिकी हुई है।

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