बिना इजाजत विदेश यात्रा पड़ी भारी! कोरबा में राजस्व निरीक्षक नीलकांत यादव सस्पेंड, कलेक्टर कुणाल दुदावत का एक्शन

14 दिन तक बिना बताए गायब रहे साहब, ऑफिस में मचा हड़कंप, अब विभागीय जांच भी तय

कोरबा, सरकारी नौकरी में रहते हुए बिना इजाजत के दफ्तर से गायब होना और वो भी विदेश घूमने के लिए — यह लापरवाही अब एक अफसर को बहुत भारी पड़ गई है। कोरबा जिले के कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील दीपका के राजस्व निरीक्षक मंडल दीपका में पदस्थ राजस्व निरीक्षक नीलकांत यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह खबर सामने आते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और कर्मचारियों के बीच इस पर खूब चर्चा हो रही है।

गांव में आधी रात सुलगी आग: तीन बाइकें जलकर खाक, कोटवार के घर के पास हुई रहस्यमयी वारदात

राजस्व निरीक्षक नीलकांत यादव : क्या है पूरा मामला, जानिए सिलसिलेवार

राजस्व निरीक्षक नीलकांत यादव ने छुट्टी के लिए आवेदन लगाया था, लेकिन उनका यह अवकाश आवेदन विभाग द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। यानी उन्हें छुट्टी नहीं मिली थी। इसके बावजूद यादव 21 जुलाई 2026 से लेकर 4 अगस्त 2026 तक पूरे 14 दिनों तक बिना किसी अधिकारी की अनुमति के अपने कर्तव्य से गायब रहे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस दौरान वे चुपचाप विदेश यात्रा पर निकल गए। न कोई सूचना, न कोई जानकारी, सीधे विदेश रवाना हो गए, जबकि ड्यूटी पर मौजूद रहना उनकी जिम्मेदारी थी।

जिस समय एक सरकारी अधिकारी को अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद रहकर जनता के काम निपटाने चाहिए थे, उस समय वे देश छोड़कर विदेश में घूम रहे थे। यह बात जब प्रशासन के संज्ञान में आई तो अधिकारियों में नाराजगी फैल गई।

कारण बताओ नोटिस से शुरू हुई कार्रवाई की कहानी

जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। 11 अगस्त 2026 को कार्यालयीन पत्र के माध्यम से श्री नीलकांत यादव को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया। इसमें उनसे पूछा गया कि आखिर बिना अनुमति के इतने दिनों तक गायब रहने और विदेश यात्रा करने का क्या औचित्य है।

रात के अंधेरे में दरिंदगी: रास्ता रोककर चाकू-डंडों से पीटा, लूटा और छोड़ भागे बदमाश

प्रशासनिक आदेश में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि श्री यादव का यह कृत्य पदीय कर्तव्यों के प्रति प्रमाद और घोर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 और नियम-7 के स्पष्ट उल्लंघन की बात भी सामने आई है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो यह मामला सिर्फ छुट्टी न लेने भर का नहीं, बल्कि सरकारी सेवा के अनुशासन और नियमों को ताक पर रखने का है।

कलेक्टर ने दिखाई सख्ती, राजस्व निरीक्षक नीलकांत यादव तुरंत हुआ सस्पेंड

जांच के बाद कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने इस मामले में देर नहीं लगाई और सख्त फैसला ले लिया। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत राजस्व निरीक्षक नीलकांत यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

निलंबन के आदेश के साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि निलंबन की अवधि के दौरान श्री यादव का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय की भू-अभिलेख शाखा, जिला कोरबा निर्धारित किया गया है। यानी अब वे अपने पुराने पद पर काम नहीं कर पाएंगे और निलंबन काल में उन्हें भू-अभिलेख शाखा में हाजिरी देनी होगी।

अब होगी विभागीय जांच, छह महीने की डेडलाइन तय

मामला सिर्फ निलंबन तक सीमित नहीं रहने वाला। कलेक्टर ने आगे की कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-14 के तहत श्री नीलकांत यादव के विरुद्ध विभागीय जांच बिठाने के निर्देश दिए हैं। सबसे खास बात यह है कि इस जांच को छह महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा और जांच अधिकारी को स्पष्ट अभिमत सहित अपना प्रतिवेदन प्रशासन को सौंपना होगा।

यानी अब यह तय हो चुका है कि यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा, बल्कि आने वाले महीनों में जांच की आंच में और भी कई तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होगी।

दीपका का कामकाज अब किसके हाथ में?

राजस्व निरीक्षक के अचानक निलंबित होने से राजस्व निरीक्षक मंडल दीपका का कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन ने पहले ही व्यवस्था बना ली है। कलेक्टर के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व निरीक्षक मंडल दीपका का प्रभार किसी अन्य राजस्व निरीक्षक या पटवारी को सौंपा जाए, ताकि आम जनता से जुड़े राजस्व के कामकाज में किसी तरह की रुकावट न आए। साथ ही इस बारे में पालन प्रतिवेदन यानी कंप्लायंस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

क्यों अहम है यह पूरा मामला?

यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के निलंबन की खबर भर नहीं है, बल्कि इससे प्रशासनिक अनुशासन को लेकर एक बड़ा संदेश भी जाता है। जब आम जनता किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटती है और अफसर मौके पर नहीं मिलते, तो सबसे ज्यादा परेशानी उन्हीं आम लोगों को उठानी पड़ती है जिनका काम राजस्व विभाग से जुड़ा होता है — चाहे वो जमीन का नामांतरण हो, सीमांकन हो, या कोई अन्य राजस्व संबंधी दस्तावेज।

ऐसे में जब यह बात सामने आई कि एक जिम्मेदार अधिकारी छुट्टी न मिलने के बावजूद बिना बताए विदेश यात्रा पर निकल गया, तो इससे जनता में भी नाराजगी की भावना पैदा होना स्वाभाविक है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत की इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने और लापरवाह अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

कोरबा जिले के प्रशासनिक गलियारों में इस निलंबन को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर छुट्टी का आवेदन अस्वीकार हो चुका है, तो उसके बाद भी बिना अनुमति गायब रहना और वो भी विदेश यात्रा जैसा बड़ा कदम उठाना, सीधे-सीधे नियमों की खुलेआम अनदेखी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही आगे के लिए नजीर बनती है, ताकि दूसरे कर्मचारी भी इस तरह की लापरवाही करने से पहले सौ बार सोचें।

अब आगे क्या?

फिलहाल राजस्व निरीक्षक नीलकांत यादव का मुख्यालय भू-अभिलेख शाखा, कलेक्टर कार्यालय कोरबा तय कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगले छह महीनों में जांच अधिकारी अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। तब तक के लिए राजस्व निरीक्षक मंडल दीपका का कामकाज किसी अन्य अधिकारी के जिम्मे रहेगा, ताकि क्षेत्र के लोगों के राजस्व संबंधी काम प्रभावित न हों।

कुल मिलाकर, कोरबा जिला प्रशासन का यह कदम साफ दिखाता है कि नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर अब सख्ती से कार्रवाई की जा रही है, और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

One thought on “बिना इजाजत विदेश यात्रा पड़ी भारी! कोरबा में राजस्व निरीक्षक नीलकांत यादव सस्पेंड, कलेक्टर कुणाल दुदावत का एक्शन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *