कटघोरा. छत्तीसगढ़ के कटघोरा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासन की लापरवाही की पोल खोलकर रख देती है। प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखने वाला मिनीमाता बांगो बांध क्षेत्र आज अपनी खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही की सबसे शर्मनाक मिसाल बनकर सुर्खियों में है। बांगो से पोड़ी ब्लॉक को जोड़ने वाला मुख्य पहुंच मार्ग बीते कई वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा है, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि किसी को इसकी सुध लेने की फुर्सत ही नहीं मिली। आखिरकार आज ग्रामीणों का सब्र टूट गया, और भारी बारिश के बीच सैकड़ों ग्रामीण कीचड़ से सनी सड़क पर ही बैठ गए और प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।

प्रशासन की लापरवाही पांच गांवों का भविष्य दांव पर, हर दिन गिर रहे मासूम बच्चे
ग्रामीणों का दर्द बयां करना भी मुश्किल है। उनका कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के पांच प्रमुख गांवों के आवागमन का एकमात्र सहारा है, लेकिन प्रशासन ने इस इकलौते रास्ते को भी मौत का जाल बना दिया है। सड़क पर बने गहरे और जानलेवा गड्ढों तथा घुटनों तक भरे कीचड़ की वजह से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों का चलना-फिरना दूभर हो गया है। जरा सोचिए, वो मासूम बच्चे जिन्हें स्कूल बैग टांगकर हंसते-खेलते जाना चाहिए था, वो रोज कीचड़ में फिसलकर गिर रहे हैं, चोटिल हो रहे हैं और यह सब सिर्फ और सिर्फ प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। फिसलन भरी इस सड़क पर आए दिन लोग गिरकर हाथ-पैर तुड़वा रहे हैं, लेकिन लापरवाही इतनी गहरी है कि किसी हादसे की खबर भी सिस्टम को जगाने के लिए काफी नहीं है।
मिट्टी डालकर खानापूर्ति, प्रशासन की लापरवाही का घिनौना चेहरा
सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि प्रदर्शनकारियों ने खुद बताया कि पूर्व में सड़क निर्माण की मांग को लेकर जल संसाधन विभाग यानी इरिगेशन ऑफिस का घेराव कर विधिवत ज्ञापन सौंपा गया था। लेकिन जवाब में मिला क्या? सिर्फ प्रशासन की लापरवाही का एक और नमूना। समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय अधिकारियों ने बस गड्ढों में मिट्टी डलवाकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली। यह लापरवाही नहीं तो और क्या है कि जिस मिट्टी को डालकर वाहवाही लूटी गई, वो बारिश की पहली फुहार में ही दलदल में तब्दील हो गई। नतीजा यह हुआ कि जो सड़क पहले से ही बदहाल थी, वो अब पूरी तरह दलदल में बदल चुकी है। यह घटना साफ दिखाती है कि प्रशासन की लापरवाही सिर्फ अनदेखी तक सीमित नहीं, बल्कि जनता की आंखों में धूल झोंकने तक पहुंच चुकी है।
आखिर कब तक जनता प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगतती रहेगी? कब तक कागजी खानापूर्ति के नाम पर मासूम बच्चों की जान से खिलवाड़ होता रहेगा? यही सवाल आज पूरे इलाके में गूंज रहा है, और हर ग्रामीण की जुबान पर सिर्फ एक ही शिकायत है – प्रशासन की लापरवाही।
छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग (PWD)
CG PWD की आधिकारिक वेबसाइट
नाराज ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, कीचड़ में बैठकर किया प्रदर्शन
बरसों की अनदेखी और प्रशासन की लापरवाही से तंग आ चुके ग्रामीणों का धैर्य आज आखिरकार जवाब दे गया। भारी बारिश के बीच, बिना किसी परवाह के, सैकड़ों ग्रामीण उसी कीचड़ भरी सड़क पर बैठ गए, जिस सड़क ने उनकी जिंदगी नर्क बना दी है। यह प्रदर्शन सिर्फ एक विरोध नहीं था, बल्कि प्रशासन के खिलाफ जनता के फूटे हुए गुस्से का प्रतीक बन गया। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा – सब मिलकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते नजर आए। कीचड़ से सने कपड़े, बारिश में भीगते शरीर, लेकिन आंखों में एक ही आग – प्रशासन की लापरवाही अब और बर्दाश्त नहीं होगी।

यह दृश्य बताता है कि जब लापरवाही अपनी हद पार कर जाती है, तो आम जनता को खुद सड़क पर उतरना पड़ता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक जनता को अपने बुनियादी हक के लिए इस तरह कीचड़ में बैठकर प्रदर्शन करना पड़ेगा? क्या प्रशासन की लापरवाही इतनी संस्थागत हो चुकी है कि बिना विरोध-प्रदर्शन के कोई काम ही नहीं होता?
जनपद सदस्य आयुष सिंह ने संभाली कमान, दी चक्काजाम की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान संयोगवश मौके से गुजर रहे जनपद सदस्य आयुष सिंह ने जब यह मंजर देखा, तो वे तुरंत ग्रामीणों के बीच पहुंचे और उन्हें समझाइश देकर मामला शांत कराया। आयुष सिंह ने साफ शब्दों में ग्रामीणों के आक्रोश को जायज ठहराया और स्वीकार किया कि यह सब प्रशासन की लापरवाही का ही नतीजा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही शासन को इस बदहाल सड़क के संबंध में विधिवत ज्ञापन सौंपा जाएगा।
लेकिन इस बार आयुष सिंह ने सिर्फ आश्वासन देकर पल्ला नहीं झाड़ा। उन्होंने प्रशासन को सीधी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि यदि लापरवाही इसी तरह जारी रही और शीघ्र ही पक्की सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो वे खुद ग्रामीणों के साथ मिलकर सड़क पर बड़ा चक्काजाम आंदोलन करने को बाध्य होंगे। यह चेतावनी बताती है कि अब स्थानीय जनप्रतिनिधि भी प्रशासन की लापरवाही से उतने ही आजिज आ चुके हैं, जितनी आम जनता।

हर बारिश में उखड़ जाती है सिस्टम की नींद, फिर सो जाता है प्रशासन
यह कोई पहला मौका नहीं है, जब प्रशासन का यह घिनौना चेहरा सामने आया हो। हर साल बारिश के मौसम में यही कहानी दोहराई जाती है, सड़कें टूटती हैं, गड्ढे बनते हैं, ग्रामीण शिकायत करते हैं, प्रशासन थोड़ी मिट्टी डलवाकर खानापूर्ति करता है, और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। यह चक्र साल-दर-साल चलता आ रहा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है लापरवाही, जो हर बार जनता की तकलीफों को नजरअंदाज कर देती है।
आम जनता का सवाल सीधा और साफ है क्या मासूम बच्चों की चोटें, बुजुर्गों के टूटे हाथ-पैर, और ग्रामीणों की रोजमर्रा की तकलीफें प्रशासन को झकझोरने के लिए काफी नहीं हैं? क्या स्थायी सड़क निर्माण की मांग इतनी बड़ी थी, जिसे पूरा करने में वर्षों लग जाएं? यह सवाल अब सिर्फ बांगो-पोड़ी मार्ग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ एक बड़े जन-आक्रोश का रूप लेता जा रहा है।
अब आगे क्या? सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर
फिलहाल जनपद सदस्य आयुष सिंह के हस्तक्षेप से मामला शांत तो हो गया है, लेकिन ग्रामीणों के मन में सुलग रहा गुस्सा अभी भी बरकरार है। सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन की लापरवाही इस बार भी जारी रहेगी, या फिर ज्ञापन के बाद सच में सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अगर इस बार भी सिर्फ आश्वासनों का खेल खेला गया, तो प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ आने वाले दिनों में बड़ा चक्काजाम आंदोलन तय है।
आखिर में सवाल वही खड़ा है क्या इस बार प्रशासन की लापरवाही पर लगाम लगेगी? क्या मासूम बच्चों को कीचड़ भरी सड़क से निजात मिलेगी? क्या पांच गांवों के लोगों को उनका बुनियादी हक एक पक्की सड़क आखिरकार नसीब होगा? या फिर यह मामला भी हर बार की तरह कागजों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल पूरा इलाका इसी उम्मीद में है कि लापरवाही अब खत्म हो, और बांगो-पोड़ी मार्ग पर चलने वाले हर राहगीर को राहत मिले।

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