रायपुर/अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लहपटरा टोल प्लाजा पर हुए थप्पड़कांड में अब एक नया मोड़ आ गया है। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि आखिरकार महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। लेकिन उनकी इस सफाई ने जवाब देने के बजाय और नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्री जी ने जो कुछ कहा, उसे सुनकर हर कोई यही पूछ रहा है – अच्छा! तो वीडियो में जो शख्स टोलकर्मी को थप्पड़ जड़ रहा था, वो PA नहीं, बल्कि “ड्राइवर” था? सवाल यही उठ रहा है कि आखिर वीडियो वाला इंसान कौन है, और इतने दिनों तक जिसे PA बताया जा रहा था, वो अचानक ड्राइवर कैसे बन गया?

“मैं गाड़ी में सो रही थी” – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सफाई या सुविधाजनक बहाना?
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अपनी सफाई में सबसे पहले यह बताया कि वे घटना के वक्त थकान की वजह से अपने वाहन में विश्राम कर रही थीं, इसलिए उन्हें बाहर हो रही मारपीट की भनक तक नहीं लगी। बड़ी दिलचस्प बात है ना? गाड़ी के अंदर बैठी मंत्री को यह तो पता नहीं चला कि उनके ही काफिले में इतना बड़ा हंगामा हो रहा है, टोलकर्मी को थप्पड़ों से पीटा जा रहा है, लेकिन अगले ही दिन उन्हें यह पूरा भरोसा हो गया कि वीडियो में दिख रहा शख्स उनका PA नहीं बल्कि ड्राइवर है। सवाल यह है कि जब घटना के वक्त कुछ पता ही नहीं चला, तो बाद में इतनी सफाई से यह कैसे पता चल गया कि “वो व्यक्ति ड्राइवर था, PA नहीं”? क्या मंत्री जी ने खुद वीडियो देखकर चेहरा पहचाना, या फिर पहले से तय कहानी को बस दोहराया जा रहा है?
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की मीठी-मीठी बातों का असली मतलब क्या?
मंत्री ने बड़े ही संवेदनशील अंदाज में कहा कि बूम बैरियर गिरना एक मानवीय या तकनीकी त्रुटि हो सकती है, और वे टोलकर्मी को “पूरी तरह क्षमा” करती हैं। वाह जी वाह! जनता यह सुनकर हैरान है कि टोलकर्मी की तो कोई गलती ही साबित नहीं हुई, वो तो बेचारा माफी मांगता रहा, गिड़गिड़ाता रहा, फिर मंत्री जी उसे “माफ” काहे कर रही हैं? क्या मंत्री जी यह बताना चाहती हैं कि गलती टोलकर्मी की थी, बस उसे बड़प्पन दिखाकर माफ किया जा रहा है? यही वो चालाकी है, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं – सहानुभूति की आड़ में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश।
दूसरी तरफ मंत्री जी ने यह भी कहा कि “किसी भी भूल के बदले किया गया अशोभनीय व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।” यह सुनने में तो बड़ी अच्छी बात लगती है, लेकिन सवाल यही है कि जिस “अशोभनीय व्यवहार” की बात हो रही है, वो किया किसने? अगर PA ने नहीं किया, ड्राइवर ने किया, तो फिर उस ड्राइवर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या उसका नाम, पहचान सार्वजनिक की जाएगी? या फिर सिर्फ शब्दों की जादूगरी से मामले को ठंडा करने की कोशिश हो रही है?
PA की संलिप्तता से इनकार, लेकिन सवाल फिर वही – वीडियो वाला इंसान कौन?
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सबसे बड़ा दावा यह किया कि उनके PA की इस पूरे विवाद में कोई भूमिका ही नहीं है, और मीडिया में जो कुछ भी PA को लेकर कहा जा रहा है, वो “तथ्यहीन और भ्रामक” है। उनके मुताबिक वीडियो में दिख रहा व्यक्ति दरअसल गाड़ी चालक यानी ड्राइवर है, PA नहीं।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर वीडियो वाला इंसान कौन है? क्योंकि जिस शख्स की पहचान अब तक ओम प्रकाश राजवाड़े यानी मंत्री के निज सहायक के तौर पर सामने आ रही थी, और सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश तक की बात हो रही थी, वो अचानक रातोंरात “ड्राइवर” कैसे बन गया? क्या मंत्री जी के पास कोई ठोस सबूत है कि वो व्यक्ति उनका PA नहीं बल्कि ड्राइवर था? या फिर यह सिर्फ एक सुविधाजनक कहानी गढ़ी जा रही है, ताकि मामला हल्का पड़ जाए और असली जिम्मेदार बच निकले?
जनता का कहना है कि अगर सच में वो व्यक्ति ड्राइवर था, तो मंत्री जी को चाहिए कि उसका नाम, पहचान और तस्वीर सार्वजनिक करें, ताकि सच सबके सामने आ सके। लेकिन अभी तक सिर्फ इनकार किया जा रहा है, कोई ठोस सबूत या नाम सामने नहीं रखा गया। यही वजह है कि हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है – वीडियो वाला इंसान कौन है, आखिर सच छुपाया क्यों जा रहा है?

“जल्द मिलूंगी, हाल-चाल जानूंगी”
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आगे कहा कि वे जल्द ही टोलकर्मी महेंद्र राजवाड़े से मुलाकात करेंगी और उसका हाल-चाल जानेंगी। सुनने में यह बड़ा भावुक और संवेदनशील कदम लगता है, लेकिन सवाल यह है कि जब पूरा मामला कैमरे में कैद है, जब पूरे गांव के लोग FIR दर्ज कराने थाने पहुंच चुके हैं, तब मंत्री जी सिर्फ “मुलाकात” और “हाल-चाल” की बात कर रही हैं। क्या यह मुलाकात सिर्फ फोटो खिंचवाने और मीडिया में अच्छी छवि बनाने के लिए होगी, या फिर सच में जिम्मेदार व्यक्ति पर कोई ठोस कार्रवाई भी होगी?
मंत्री जी ने यह भी कहा कि “जनता का आत्मसम्मान और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।” लेकिन जनता का सीधा सवाल है – जब उनके ही काफिले में एक कर्मचारी को सरेआम थप्पड़ मारे गए, जब पूरा वीडियो वायरल हो गया, तब तक तो किसी का आत्मसम्मान याद नहीं आया। अब जब मामला बड़ा हो गया, गांव वाले आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं, तब अचानक संवेदनशीलता और आत्मसम्मान की बातें याद आ गईं। क्या यह सिर्फ बिगड़ी हुई स्थिति को संभालने की कोशिश है?
FIR अब तक क्यों नहीं? मंत्री की सफाई में इसका जिक्र तक नहीं
गौर करने वाली बात यह भी है कि मंत्री जी ने अपनी पूरी सफाई में इस बात का कोई जिक्र नहीं किया कि आखिर अब तक FIR दर्ज क्यों नहीं हुई। ग्रामीण पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर FIR दर्ज नहीं हुई तो आंदोलन होगा, लेकिन मंत्री जी की सफाई में सिर्फ “खेद”, “क्षमा” और “मुलाकात” जैसे शब्दों का जिक्र है, कार्रवाई या FIR का कोई ठोस भरोसा नहीं। सवाल है कि जब मंत्री जी खुद कह रही हैं कि दुर्व्यवहार करने वाले के खिलाफ सख्ती जरूरी है, तो फिर खुद उनकी ओर से FIR दर्ज कराने या कार्रवाई सुनिश्चित कराने की पहल क्यों नहीं हुई?
जनता के सवाल अब भी बरकरार
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सफाई के बाद भी असली सवाल जस के तस खड़े हैं। वीडियो वाला इंसान कौन है – PA या ड्राइवर? अगर ड्राइवर था, तो उसका नाम-पहचान अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? अगर सच में मानवीय भूल पर इतनी सी बात पर मारपीट हुई, तो जिम्मेदार व्यक्ति पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और सबसे बड़ा सवाल – क्या मंत्री जी की यह सफाई सच में ईमानदार पश्चाताप है, या फिर सिर्फ बिगड़ते हालात को संभालने की एक चतुराई भरी कोशिश?
फिलहाल जनता इन्हीं सवालों के साथ मंत्री जी की अगली मुलाकात और आने वाले दिनों में होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रही है। लेकिन एक बात तय है – जब तक वीडियो वाला इंसान कौन है, इसका सच सामने नहीं आता, तब तक मंत्री जी की यह सफाई जनता के गले नहीं उतरने वाली। छत्तीसगढ़ शासन

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