जशपुर। जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के शिक्षा विभाग में लंबे समय से चली आ रही गड़बड़ियों पर अब कलेक्टर रोहित व्यास ने सख्त कदम उठाया है। यहां शिक्षा विभाग के कुछ अफसरों पर आर्थिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना, पद का गलत इस्तेमाल और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर शिकायतें मिली थीं। जांच में इन शिकायतों में शुरुआती तौर पर सच्चाई पाए जाने के बाद कलेक्टर ने तीन अलग-अलग अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं।
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यह पूरा मामला जिला पंचायत जशपुर की जांच रिपोर्ट पर आधारित है, जो 8 सितंबर 2026 को कलेक्टर के पास पेश की गई थी। रिपोर्ट में शिकायतों को गंभीर मानते हुए यह साफ कहा गया कि आरोप शुरुआती जांच में सही पाए गए हैं। इसके ठीक अगले दिन, यानी 9 सितंबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय से एक के बाद एक तीन आदेश जारी कर दिए गए।
शिक्षा विभाग के देवेंद्र सिंह किए गए निलंबित
इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ा कदम देवेंद्र सिंह के खिलाफ उठाया गया है। देवेंद्र सिंह मूल रूप से उच्च वर्ग शिक्षक हैं और फरसाबहार विकासखंड में प्रभारी विकासखंड स्रोत समन्वयक के पद पर काम कर रहे थे। कलेक्टर ने उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

आदेश में साफ लिखा गया है कि देवेंद्र सिंह के खिलाफ मिली शिकायतों की शुरुआती जांच में आर्थिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना, पद का गलत इस्तेमाल और भ्रष्टाचार जैसे आरोप सही पाए गए हैं। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा विभागीय जांच नियम, 1966 के तहत उन पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।
निलंबन के दौरान देवेंद्र सिंह का मुख्यालय अब विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पत्थलगांव, जिला जशपुर तय किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमों के मुताबिक जीवन निर्वाह भत्ता मिलता रहेगा, लेकिन वे अपने पुराने पद पर काम नहीं कर पाएंगे।
रविन्द्रनाथ साय को भी हटाया गया
इसी मामले में दूसरा आदेश रविन्द्रनाथ साय के नाम पर जारी हुआ है। रविन्द्रनाथ साय मूल रूप से प्रधान पाठक हैं और फरसाबहार में प्रभारी सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी के तौर पर काम कर रहे थे। उन्हें भी तत्काल प्रभाव से हटाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जशपुर में संलग्न कर दिया गया है।

यानी अब रविन्द्रनाथ साय अपनी पुरानी जगह फरसाबहार में काम नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें सीधे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अंडर में काम करना होगा, जब तक आगे कोई नया आदेश नहीं आता।
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बीईओ दुर्गेश देवांगन भी हटाए गए
इस पूरी कार्रवाई की तीसरी कड़ी में विकासखंड शिक्षा अधिकारी यानी बीईओ दुर्गेश देवांगन का नाम भी सामने आया है। दुर्गेश देवांगन फरसाबहार में बीईओ के पद पर तैनात थे, लेकिन अब उन्हें भी तुरंत प्रभाव से हटाकर जिला पंचायत जशपुर के कार्यालय में संलग्न कर दिया गया है।
दुर्गेश देवांगन के हटने के बाद उनकी जगह पर सीआर भगत को जिम्मेदारी दी गई है। सीआर भगत मूल रूप से व्याख्याता हैं और अभी स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, तपकरा में प्रभारी प्राचार्य के तौर पर काम कर रहे हैं। अब उन्हें अगले आदेश तक फरसाबहार के प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी का पूरा प्रशासनिक और वित्तीय काम सौंपा गया है।

किस आधार पर हुई पूरी कार्रवाई
इस पूरी कार्रवाई की बुनियाद जिला पंचायत जशपुर की एक जांच रिपोर्ट है, जो पत्र क्रमांक 1328/लेखा अधि./जांच/2026 के जरिए 8 सितंबर 2026 को पेश की गई थी। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया कि फरसाबहार के शिक्षा विभाग में जो शिकायतें मिली थीं, उनमें शुरुआती तौर पर सच्चाई है।
रिपोर्ट मिलने के अगले ही दिन, यानी 9 सितंबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय ने बिना देर किए तीनों अफसरों के खिलाफ अलग-अलग आदेश जारी कर दिए। सभी आदेशों में यह भी साफ लिखा गया है कि ये तीनों आदेश तुरंत प्रभाव से लागू होंगे, यानी अब इन अफसरों को इंतजार करने या बहाना बनाने की कोई गुंजाइश नहीं है।
आखिर क्या थीं शिकायतें
जांच रिपोर्ट के मुताबिक फरसाबहार के शिक्षा विभाग में लंबे समय से कई तरह की शिकायतें मिल रही थीं। इनमें सबसे गंभीर आरोप आर्थिक शोषण का था, यानी पैसों के मामले में गलत तरीके से फायदा उठाने का आरोप। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना की भी शिकायत थी, जिसका मतलब है कि नीचे काम करने वाले कर्मचारियों या शिक्षकों को परेशान किया जा रहा था।
इसके साथ ही पद के गलत इस्तेमाल और भ्रष्टाचार की शिकायतें भी सामने आई थीं। यानी कुछ अफसरों पर आरोप था कि वे अपने पद का इस्तेमाल गलत तरीके से कर रहे थे और इसका फायदा निजी तौर पर उठा रहे थे। इन सभी आरोपों की जांच जिला पंचायत जशपुर ने की, और शुरुआती जांच में इन्हें सही पाया गया।
फरसाबहार शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
इस बड़ी कार्रवाई के बाद फरसाबहार के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। एक साथ तीन बड़े अफसरों का हटना और निलंबित होना, यह इलाके के शिक्षा महकमे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। स्कूलों और शिक्षकों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस तरह की शिकायतें चल रही थीं, लेकिन अब जाकर प्रशासन ने इस पर ठोस कार्रवाई की है। कई लोगों ने कलेक्टर के इस फैसले की तारीफ भी की है, क्योंकि इससे यह संदेश गया है कि अगर कोई अफसर अपने पद का गलत इस्तेमाल करेगा, तो उस पर कार्रवाई जरूर होगी।
विभागीय जांच अब भी बाकी
यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआती जांच के आधार पर की गई है। अब आगे विभागीय स्तर पर पूरी और विस्तार से जांच होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि आरोप पूरी तरह सही हैं या नहीं, और अगर सही पाए जाते हैं तो आगे और क्या कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा विभागीय जांच नियम, 1966 के तहत निलंबन की जो प्रक्रिया शुरू हुई है, उसमें आगे एक विस्तृत जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो पूरे मामले की तह तक जाकर जांच करेगा। इस जांच के आधार पर ही आखिरी फैसला लिया जाएगा कि दोषी पाए गए अफसरों पर क्या कार्रवाई होगी।
प्रशासन का सख्त रुख
कलेक्टर रोहित व्यास की इस कार्रवाई से साफ है कि प्रशासन अब शिक्षा विभाग में हो रही गड़बड़ियों को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। जिस तेजी से जांच रिपोर्ट मिलने के अगले ही दिन आदेश जारी किए गए, उससे यह भी पता चलता है कि प्रशासन इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा।
यह कार्रवाई जिले के बाकी विकासखंडों के लिए भी एक चेतावनी की तरह मानी जा रही है। अगर कहीं और भी इस तरह की शिकायतें मिलती हैं, तो वहां भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई हो सकती है। इससे शिक्षा विभाग के अन्य अफसरों में भी सतर्कता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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