रायपुर/राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लोगों के लिए आसान और सबके काम का बनाने के मकसद से राज्य सरकार ने एक यूसीसी समिति बनाई है। यह यूसीसी समिति अब गांव-गांव, जिले-जिले जाकर लोगों की राय जान रही है। इसी कड़ी में राजनांदगांव के जिला पंचायत सभाकक्ष में एक बड़ी बैठक हुई, जिसमें अलग-अलग समाज और संगठनों के लोगों ने विवाह, तलाक, संपत्ति का बंटवारा, भरण-पोषण और लिव-इन जैसे विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी।
यह बैठक इसलिए खास थी क्योंकि इसमें सिर्फ एक-दो लोग नहीं, बल्कि कई अलग-अलग समाज, धर्म और संगठनों के लोग शामिल हुए। यूसीसी समिति ने साफ कर दिया कि वह किसी एक पक्ष की बात नहीं सुनना चाहती, बल्कि हर तबके की राय जानकर ही आगे का काम करना चाहती है।

कौन-कौन थे यूसीसी समिति बैठक में शामिल
इस बैठक की अगुवाई यूसीसी समिति के तीन सदस्यों ने की। इनमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एम.के. राउत, बड़े वकील मोहन पवार और रिटायर्ड प्राचार्या डॉ. ज्योति रानी सिंह शामिल थे। इन तीनों के सामने अलग-अलग समाज के पदाधिकारियों ने अपने-अपने सुझाव रखे।
बैठक में राजनांदगांव के अलावा कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों से भी लोग पहुंचे। इसमें सर्व आदिवासी समाज, बौद्ध समाज, जैन समाज, मुस्लिम समाज, ईसाई समाज, साहू समाज, कलार समाज, लोधी समाज, यादव समाज, पटेल समाज, गड़रिया समाज, सेन समाज, गोंड समाज और उराव समाज के लोग शामिल हुए। इसके अलावा मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के पदाधिकारी और कई सामाजिक कार्यकर्ता भी बैठक में मौजूद रहे।
इतने सारे समाज के लोगों का एक साथ आना यह दिखाता है कि यूसीसी को लेकर लोगों में कितनी दिलचस्पी है। हर कोई अपनी परंपरा और अपने रीति-रिवाज को ध्यान में रखते हुए अपनी बात रखना चाहता था, और यूसीसी समिति ने सबकी बात ध्यान से सुनी।
यूसीसी समिति बैठक में क्या-क्या बातें हुईं
बैठक में पुरानी परंपराओं से लेकर आज के कानूनी बदलावों तक, कई अहम बातों पर गहराई से चर्चा हुई। कुछ लोगों ने यूसीसी के पक्ष में अपनी बात रखी, तो कुछ लोगों ने इससे जुड़ी अपनी चिंताएं और सवाल भी सामने रखे। यूसीसी समिति ने दोनों तरह की बातों को गंभीरता से सुना और नोट किया।
ज्यादातर सामाजिक संगठनों का कहना था कि समान नागरिक संहिता के तहत सभी लोगों के लिए एक जैसा कानून होना चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या लिंग के हों। उनका मानना है कि विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति का बंटवारा जैसे मामलों में भेदभाव नहीं होना चाहिए। कई लोगों ने कहा कि अगर कानून सबके लिए एक जैसा होगा, तो इससे इंसाफ मिलने में आसानी होगी।
यूसीसी का मसौदा कैसे तैयार होगा
यूसीसी समिति के सदस्यों ने बताया कि जितने भी सुझाव मिल रहे हैं, उन सबको ध्यान से पढ़ा जाएगा और उसी के आधार पर आखिरी मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया जाएगा। यानी यह कोई ऐसा काम नहीं है जो ऊपर से थोपा जाएगा, बल्कि आम लोगों की राय को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है।
सदस्यों ने यह भी बताया कि सिर्फ बैठकों में आने वाले लोग ही नहीं, बल्कि आम जनता भी ऑनलाइन तरीके से अपने सुझाव भेज सकती है। इसके लिए यूसीसी समिति ने एक अलग से वेबसाइट और ई-मेल पता भी जारी किया है।
बैठक में एक वकील साहब ने पावर पॉइंट के जरिए यूसीसी के बारे में विस्तार से जानकारी भी दी, ताकि लोगों को यह समझ आए कि आखिर यह कानून क्या है और इससे उनकी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा।
कैसे भेज सकते हैं अपने सुझाव
अगर आप भी यूसीसी को लेकर अपनी राय देना चाहते हैं, तो इसके लिए कोई मुश्किल तरीका नहीं है। यूसीसी समिति ने आम लोगों के लिए एक वेबसाइट बनाई है – https://ucc.cgstate.gov.in/। इसके अलावा एक ई-मेल पता भी दिया गया है – ucc-chhattisgarh@cg.gov.in। इन दोनों जगहों पर कोई भी नागरिक अपने सुझाव भेज सकता है।
यूसीसी समिति चाहती है कि सिर्फ बड़े शहरों या सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि आम आदमी भी इस प्रक्रिया में हिस्सा ले। इसी वजह से ऑनलाइन सुझाव भेजने की सुविधा दी गई है, ताकि जो लोग बैठक में नहीं आ पाए, वे भी घर बैठे अपनी बात रख सकें।
अधिकारियों की भी रही मौजूदगी
इस बैठक में सिर्फ समाज के लोग ही नहीं, बल्कि कई बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ दुर्गा प्रसाद अधिकारी और अपर कलेक्टर सी.एल. मारकंडेय सहित कई और अधिकारी बैठक में शामिल हुए।
अधिकारियों की इतनी बड़ी मौजूदगी यह दिखाती है कि सरकार इस काम को कितनी गंभीरता से ले रही है। यूसीसी समिति के साथ-साथ जिला प्रशासन भी पूरी तरह से इस प्रक्रिया में जुटा हुआ है, ताकि लोगों तक सही जानकारी पहुंचे और उनकी राय भी सही तरीके से समिति तक पहुंच सके।
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क्यों जरूरी है यह जनसुनवाई
किसी भी बड़े कानून को लागू करने से पहले लोगों की राय जानना बहुत जरूरी होता है, खासकर तब जब वह कानून विवाह, तलाक और संपत्ति जैसे संवेदनशील मामलों से जुड़ा हो। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां अलग-अलग समाज, धर्म और परंपराएं हैं, वहां यूसीसी समिति का यह कदम – हर समाज से सीधे बात करना – बहुत मायने रखता है।
अगर कोई कानून बिना लोगों की राय जाने बना दिया जाए, तो बाद में उसे लेकर विरोध और गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से यूसीसी समिति जिला-दर-जिला जाकर, अलग-अलग समाज के लोगों से मिलकर, उनकी बात सुन रही है, ताकि आखिरी कानून बनते समय किसी को यह न लगे कि उसकी बात नहीं सुनी गई।
अलग-अलग समाज की अलग-अलग सोच
बैठक में यह भी देखने को मिला कि हर समाज का यूसीसी को लेकर अपना-अपना नजरिया है। कुछ समाज इसे एक अच्छा और जरूरी कदम मानते हैं, जो सबके लिए बराबरी लाएगा। वहीं कुछ समाज के लोगों ने अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों को लेकर चिंता भी जताई और चाहते हैं कि नया कानून बनाते समय उनकी बातों का भी ध्यान रखा जाए।
यूसीसी समिति के सदस्यों ने कहा कि यही वजह है कि वे हर समाज से अलग-अलग सुनना चाहते हैं, ताकि कोई भी अपनी बात कहने से वंचित न रह जाए। समिति का कहना है कि आखिरी कानून ऐसा बनाया जाएगा जिसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों की राय शामिल हो।
आगे की प्रक्रिया कैसी रहेगी
यूसीसी समिति की योजना है कि वह सिर्फ राजनांदगांव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश के बाकी जिलों में भी इसी तरह जाकर लोगों से बात करेगी। हर जिले से मिलने वाले सुझावों को इकट्ठा किया जाएगा और फिर सबको मिलाकर एक पूरा मसौदा तैयार किया जाएगा।
इस मसौदे को बाद में सरकार के सामने रखा जाएगा, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सके। यूसीसी समिति का कहना है कि जब तक ज्यादा से ज्यादा लोगों की राय नहीं ली जाएगी, तब तक मसौदा तैयार नहीं किया जाएगा।
आम लोगों के लिए क्यों है यह मौका खास
यह पहला मौका नहीं है जब सरकार ने किसी कानून को लेकर लोगों की राय मांगी हो, लेकिन यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर इतने बड़े स्तर पर जनसुनवाई होना अपने आप में खास बात है। आम आदमी के लिए यह मौका है कि वह अपनी बात सीधे उस समिति तक पहुंचा सके जो आगे चलकर कानून का मसौदा तैयार करेगी।
जो लोग बैठक में नहीं जा पाए, उनके लिए भी वेबसाइट और ई-मेल के जरिए अपनी बात रखने का रास्ता खुला है। यूसीसी समिति बार-बार यही कह रही है कि हर किसी की राय मायने रखती है, चाहे वह किसी बड़े संगठन का पदाधिकारी हो या फिर एक आम नागरिक।
यूसीसी समिति बैठक में उठे कई तरह के सवाल
बैठक के दौरान कुछ लोगों ने यूसीसी समिति से सीधे सवाल भी पूछे। कई लोगों को यह जानना था कि अगर यह कानून लागू हो गया, तो उनकी मौजूदा परंपराओं पर क्या असर पड़ेगा। कुछ लोगों ने पूछा कि क्या शादी-ब्याह के तरीके पूरी तरह बदल जाएंगे, या फिर सिर्फ कानूनी दर्जा एक जैसा होगा जबकि रीति-रिवाज पहले जैसे ही चलते रहेंगे।
यूसीसी समिति के सदस्यों ने इन सवालों के जवाब में समझाया कि यह कानून किसी की पूजा-पद्धति या धार्मिक रीति-रिवाज में दखल देने के लिए नहीं है, बल्कि कानूनी मामलों में सबको एक जैसा अधिकार देने के लिए है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि लोगों के मन में जो भी डर या शंका है, उसे बैठकों के जरिए दूर किया जाए, तभी यह कानून सही मायने में सबके लिए फायदेमंद बन पाएगा।
महिलाओं के अधिकारों पर खास चर्चा
बैठक में महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी काफी बात हुई। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि आज भी कई समाजों में संपत्ति के बंटवारे और तलाक के मामलों में महिलाओं को बराबरी का हक नहीं मिल पाता। उनका कहना था कि अगर यूसीसी लागू होता है, तो इससे महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर अधिकार मिलेंगे।
यूसीसी समिति ने भी इस बात पर सहमति जताई कि महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना इस पूरी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। समिति के सदस्यों ने कहा कि जो भी मसौदा तैयार होगा, उसमें महिलाओं और बच्चों के हक का खास ध्यान रखा जाएगा।
लिव-इन और उत्तराधिकार पर भी खुलकर हुई बात
बैठक में लिव-इन रिलेशनशिप जैसे आधुनिक विषय पर भी चर्चा हुई। कुछ लोगों ने कहा कि आज के समय में ऐसे रिश्ते बढ़ रहे हैं, इसलिए कानून में इसके लिए भी साफ नियम होने चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने इस पर अपनी अलग राय भी रखी और कहा कि यह विषय समाज की परंपराओं से जुड़ा है, इसलिए इस पर सावधानी से फैसला लेना चाहिए।
उत्तराधिकार यानी संपत्ति किसे और कैसे मिलेगी, इस पर भी अलग-अलग समाज के लोगों ने अपने-अपने रीति-रिवाज के बारे में बताया। यूसीसी समिति ने सभी की बातें ध्यान से सुनीं और नोट कीं, ताकि आगे मसौदा बनाते समय इन सबका ध्यान रखा जा सके।
छत्तीसगढ़ में यूसीसी को लेकर अब तक का सफर
यूसीसी समिति का गठन कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। पिछले कुछ समय से देश के कई राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा तेज हुई है, और छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य सरकार चाहती है कि यह कानून बनाने से पहले हर वर्ग, हर समाज और हर इलाके के लोगों की राय ली जाए, ताकि कानून बनने के बाद किसी को यह शिकायत न रहे कि उससे कुछ भी पूछा नहीं गया।
इसी सोच के साथ यूसीसी समिति को अलग-अलग जिलों में भेजा जा रहा है। राजनांदगांव से पहले भी समिति कई जगहों पर जनसुनवाई कर चुकी है, और आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा। हर जिले में समिति के सदस्य स्थानीय समाज के लोगों से मिलते हैं, उनकी परंपराओं को समझते हैं और उनकी चिंताओं को नोट करते हैं।
युवाओं की भी रही भागीदारी
बैठक में सिर्फ बड़े-बुजुर्ग और समाज के पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि कुछ युवा भी शामिल हुए। युवाओं ने अपनी तरफ से कहा कि आज के दौर में शिक्षा और जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ कानून में भी बदलाव की जरूरत है। कुछ युवाओं ने यह भी कहा कि अगर सबके लिए एक जैसा कानून होगा, तो इससे शादी और तलाक जैसे मामलों में होने वाली कानूनी उलझनें कम होंगी।
यूसीसी समिति ने युवाओं की इस भागीदारी को सराहा और कहा कि आने वाली पीढ़ी की सोच को भी इस पूरी प्रक्रिया में शामिल करना बहुत जरूरी है, क्योंकि आखिरकार यह कानून आने वाले कई सालों तक लागू रहेगा।
पारदर्शिता पर भी दिया गया जोर
बैठक में यूसीसी समिति ने बार-बार यह बात दोहराई कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाएगी। यानी जो भी सुझाव आएंगे, उन्हें ठीक से रिकॉर्ड किया जाएगा और यह भी बताया जाएगा कि आखिरी मसौदे में किन-किन बातों को शामिल किया गया। समिति का कहना है कि इससे लोगों का भरोसा बना रहेगा कि उनकी बात सच में सुनी गई है, सिर्फ औपचारिकता के लिए बैठक नहीं की गई।
यूसीसी समिति का दौरा आगे भी जारी रहेगा
राजनांदगांव में हुई इस बैठक के बाद यूसीसी समिति के सदस्यों ने बताया कि उनका यह दौरा अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले हफ्तों में समिति प्रदेश के और भी जिलों में जाकर इसी तरह की बैठकें करेगी। हर जिले की अपनी अलग सामाजिक बनावट है, अलग-अलग समाज और परंपराएं हैं, इसलिए समिति चाहती है कि हर जगह जाकर वहां के लोगों से सीधे बात की जाए, बजाय इसके कि सिर्फ राजधानी में बैठकर फैसला ले लिया जाए।
समिति के सदस्यों ने यह भी कहा कि जितनी ज्यादा जगहों से सुझाव आएंगे, उतना ही मजबूत और सबके लिए ठीक मसौदा तैयार हो पाएगा। इसी वजह से वे गांव-गांव, कस्बे-कस्बे जाकर लोगों से मिलने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन का भी मिल रहा साथ
इस पूरी प्रक्रिया में जिला प्रशासन भी यूसीसी समिति का पूरा साथ दे रहा है। बैठक की व्यवस्था से लेकर लोगों तक जानकारी पहुंचाने तक, हर काम में स्थानीय अधिकारी मदद कर रहे हैं। राजनांदगांव में भी संभागायुक्त और कलेक्टर की मौजूदगी यही दिखाती है कि यह सिर्फ एक समिति का काम नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की सहभागिता वाला काम है।
अधिकारियों का कहना है कि वे आगे भी हर जिले में इसी तरह समिति के दौरे में मदद करते रहेंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह जानकारी पहुंच सके कि वे अपनी राय कैसे दर्ज करा सकते हैं।
सबकी राय से बनेगा कानून
राजनांदगांव में हुई इस बैठक ने यह साफ कर दिया कि यूसीसी समिति सिर्फ ऊपर से फैसला थोपने के बजाय, नीचे से लोगों की राय लेकर काम करना चाहती है। अलग-अलग समाज, धर्म और संगठनों के लोगों का एक साथ आना और अपनी बात रखना, यह दिखाता है कि यह मुद्दा आम लोगों के लिए कितना अहम है।
आने वाले दिनों में यूसीसी समिति और भी जिलों में जाकर इसी तरह लोगों से मिलेगी, और उनकी राय के आधार पर ही आखिरी मसौदा तैयार करेगी। अब देखना यह है कि आम जनता कितनी बड़ी संख्या में वेबसाइट और ई-मेल के जरिए अपने सुझाव भेजती है, और आखिरी कानून में कितने लोगों की बात शामिल हो पाती है।

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