छत्तीसगढ़ में राजस्व महकमे की बड़ी सर्जरी: एक झटके में 57 तहसीलदार-नायब तहसीलदार इधर से उधर, पूरे प्रदेश में हलचल

छत्तीसगढ़ में राजस्व महकमे की बड़ी सर्जरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने बुधवार देर रात एक ऐसा आदेश निकाला जिसने पूरे प्रशासनिक अमले में हलचल मचा दी। एक ही झटके में 57 तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की कुर्सी बदल गई। किसी को राजधानी रायपुर में एंट्री मिली, तो किसी को बस्तर के घने जंगलों की तरफ भेज दिया गया। किसी की पोस्टिंग सरगुजा पहुंच गई तो किसी को कोरबा की खदानों वाले इलाके में जिम्मेदारी सौंप दी गई। नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन से जारी हुआ यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, यानी अब बहानेबाजी की कोई गुंजाइश नहीं। जिसका नाम लिस्ट में है, उसे तुरंत नई जगह जाकर चार्ज संभालना होगा।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग

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राजस्व विभाग का यह आदेश राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अवर सचिव धनंजय नेताम के हस्ताक्षर से जारी हुआ है। आदेश की भाषा एकदम सीधी और सख्त है – प्रशासनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तबादला किया गया है, और सभी अफसरों को नई पदस्थापना वाली जगह पर फौरन कार्यभार ग्रहण करना होगा। जिन कलेक्टरों के जिलों से अफसर हटाए गए हैं, उन्हें भी निर्देश है कि वे संबंधित अधिकारियों को तुरंत रिलीव करें ताकि नई जगह पर कामकाज में देरी न हो।

आखिर माजरा क्या है – सिर्फ आंकड़ा नहीं, पूरा सिस्टम हिला

राजस्व विभाग किसी भी राज्य की रीढ़ माना जाता है। जमीन का नामांतरण हो, सीमांकन हो, फौती-नामांतरण का मामला हो, या फिर किसी आपदा में मुआवजे का हिसाब-किताब – हर जगह तहसीलदार और नायब तहसीलदार ही जमीन पर सरकार का चेहरा होते हैं। ऐसे में जब एक साथ 57 अफसरों की जगह बदल दी जाए, तो इसका सीधा असर आम जनता के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ना तय है। नए अफसरों को इलाका समझने में वक्त लगेगा, पुरानी फाइलों को समझना होगा, और स्थानीय राजनीतिक व सामाजिक समीकरणों से तालमेल बिठाना होगा।

खास बात यह है कि यह कोई मामूली रूटीन तबादला सूची नहीं है। इसमें प्रशासनिक जरूरत के साथ-साथ बड़ी संख्या में अफसरों के अपने स्वैच्छिक आवेदनों को भी तवज्जो दी गई है। यानी राजस्व विभाग ने सिर्फ ऊपर से फरमान नहीं थोपा, बल्कि नीचे से आई मांगों को भी सुना है। कई मामलों में तो दो अफसरों की आपस में अदला-बदली तक कर दी गई है, ताकि दोनों पक्षों की मांग पूरी हो सके।

राजस्व विभाग रायपुर में आधा दर्जन नए चेहरे, जिले की कमान बदली

राजधानी रायपुर हमेशा से पोस्टिंग के लिहाज से सबसे ज्यादा डिमांड वाली जगह रही है, और इस बार भी यहां आधा दर्जन नए अफसरों की एंट्री हुई है। गरिमा ठाकुर को बिलासपुर से हटाकर रायपुर भेजा गया है। सौरभ चौरसिया दूर नारायणपुर से रायपुर पहुंचेंगे। क्षमा यदु का तबादला दुर्ग से रायपुर किया गया है। इसके अलावा अमित कुमार केरकेट्टा को कोरबा से, प्रेरणा सिंह को महासमुंद से और जयेन्द्र सिंह को बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे दूरस्थ जिले से खींचकर रायपुर लाया गया है।

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रायपुर जैसे बड़े जिले में इतनी बड़ी संख्या में नए अफसरों का आना यह बताता है कि राजस्व विभाग राजधानी के अमले को पूरी तरह से नए सिरे से खड़ा करना चाहता है। जिस तरह अलग-अलग जिलों से अफसर बुलाए गए हैं – कोई पहाड़ी इलाके से आया है तो कोई मैदानी क्षेत्र से – इससे रायपुर के दफ्तरों में अनुभव का एक अलग मिश्रण देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग

राजस्व विभाग बस्तर से सरगुजा तक, पूरे प्रदेश में उथल-पुथल

इस तबादला सूची का दायरा सिर्फ रायपुर तक सीमित नहीं है। प्रदेश के लगभग हर कोने में इसका असर दिख रहा है। रायगढ़ में पदस्थ शिवम पांडेय को अब दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में जिम्मेदारी दी गई है, जो नक्सल प्रभावित इलाकों में से एक माना जाता है। बेमेतरा में तैनात सीताराम कंवर को सुकमा भेजा गया है, जो अपने आप में एक बड़ा और चुनौतीपूर्ण बदलाव है। दुर्ग की ममता टावरी अब नारायणपुर में पदस्थ होंगी।

राजस्व विभाग तबादला सूची

इसी तरह कबीरधाम में काम कर रहे रविन्द्र कुमार कुर्रे को दंतेवाड़ा भेज दिया गया है, जबकि सक्ती जिले के सिद्धार्थ अनंत को सरगुजा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह साफ दिखाता है कि राजस्व विभाग ने मैदानी और पहाड़ी-वनांचल इलाकों के बीच अफसरों की अदला-बदली को भी प्राथमिकता दी है, ताकि हर जगह अनुभवी लोग मौजूद रहें।

जिले से जिले तक लंबा सफर, कुछ को झेलनी पड़ी लंबी दूरी

कुछ अफसरों के लिए यह तबादला किसी लंबी यात्रा से कम नहीं है। कोरिया जिले में तैनात उमेश कुमार कुशवाहा को अब रायगढ़ भेजा गया है, यानी प्रदेश के एक सिरे से दूसरे सिरे तक का सफर। सरगुजा की कमलावती सिंह को जांजगीर-चांपा भेजा गया है। बलरामपुर-रामानुजगंज में जिम्मेदारी संभाल रही पूनम रश्मि तिग्गा अब कोरबा जाएंगी। वहीं कोरबा में तैनात भूषण सिंह मंडावी को सरगुजा भेज दिया गया है।

इन तबादलों से एक बात साफ झलकती है – राजस्व विभाग ने इस बार किसी एक इलाके को प्राथमिकता नहीं दी, बल्कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, पूरे राज्य के राजस्व अमले को एक साथ हिलाकर रख दिया है। जिन अफसरों को दूर भेजा गया है, उनके लिए यह बदलाव निजी स्तर पर भी बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, क्योंकि परिवार, बच्चों की पढ़ाई और घर-गृहस्थी को नए सिरे से व्यवस्थित करना आसान काम नहीं होता।

पटवारी प्रशिक्षण शालाओं को भी मिले नए इंचार्ज

राजस्व विभाग की इस पूरी कवायद में सिर्फ तहसील दफ्तर ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया गया है। प्रियंका कुशवाहा को पटवारी प्रशिक्षण शाला रायपुर की जिम्मेदारी दी गई है। पुलकित साहू अब पटवारी प्रशिक्षण शाला बिलासपुर में नई भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा विष्णु प्रसाद पैकरा को राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण शाला बिलासपुर भेजा गया है।

पटवारी प्रशिक्षण शालाओं को भी मिले नए इंचार्ज

यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रशिक्षण संस्थान ही आने वाले पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों की नींव तैयार करते हैं। अगर इन संस्थानों में अनुभवी और सक्षम अफसरों को तैनात किया जाए, तो इसका सीधा फायदा आने वाले वर्षों में मैदानी कामकाज की गुणवत्ता पर दिखेगा। राजस्व विभाग का यह संदेश साफ है कि सिर्फ तहसील दफ्तरों की व्यवस्था सुधारना काफी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के प्रशिक्षण पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।

आपसी सहमति से बदली पोस्टिंग, दो अफसरों की सीधी अदला-बदली

इस तबादला सूची की एक दिलचस्प बात यह भी है कि कुछ मामलों में सीधी अदला-बदली की गई है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ में तैनात मोहन लाल साहू को रायगढ़ भेजा गया है, जबकि रायगढ़ में काम कर रही रश्मि पटेल को सारंगढ़-बिलाईगढ़ वापस बुला लिया गया है। यानी दोनों अफसरों ने एक-दूसरे की जगह ले ली है। यह आपसी सहमति वाला तबादला बताता है कि राजस्व विभाग ने अफसरों की निजी वजहों और सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा है, बजाय इसके कि सिर्फ ऊपर से आदेश थोप दिया जाए।

मनीष सूर्यवंशी को मिली बड़ी राहत, बीजापुर जाने से बचे

इस लिस्ट में एक नाम खास तौर पर चर्चा में है – मनीष सूर्यवंशी। शुरुआत में उनका तबादला सारंगढ़-बिलाईगढ़ से बीजापुर जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण जिले में कर दिया गया था। लेकिन बाद में उनके स्वैच्छिक आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें सारंगढ़-बिलाईगढ़ में ही यथावत रखने का फैसला लिया गया। इसका मतलब साफ है कि अब उन्हें बीजापुर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मनीष सूर्यवंशी को मिली बड़ी राहत

यह मामला यह भी दिखाता है कि राजस्व विभाग ने तबादला प्रक्रिया के दौरान अफसरों की आपत्तियों और अर्जियों पर भी गौर किया है। कड़े प्रशासनिक फैसलों के साथ-साथ मानवीय पहलू को भी नजरअंदाज नहीं किया गया।

राजस्व विभाग की सूची में जिन जिलों में सबसे ज्यादा बदलाव, वहां क्या असर होगा

अगर जिलावार तस्वीर देखें तो जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, दुर्ग, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद, धमतरी, सक्ती, जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे कई जिलों में राजस्व अमले का चेहरा पूरी तरह बदल गया है। नीलिमा अग्रवाल को सारंगढ़-बिलाईगढ़ से सक्ती भेजा गया है। तारसिंह खरे दुर्ग से बालोद जाएंगे। वहीं राजनांदगांव में तैनात विजय कुमार कोठारी को धमतरी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इतने सारे जिलों में एक साथ फेरबदल होने का सीधा मतलब है कि तहसील कार्यालयों में मौजूद पुरानी फाइलों, लंबित मामलों और स्थानीय समस्याओं की जानकारी नए अफसरों को नए सिरे से हासिल करनी होगी। शुरुआती दिनों में इससे कामकाज की रफ्तार पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में नई ऊर्जा और नए नजरिए के साथ काम में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

स्वैच्छिक आवेदनों को मिली तरजीह – क्यों है यह अहम

इस पूरे तबादला आदेश की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में तबादले अफसरों के अपने अनुरोध पर हुए हैं। आमतौर पर सरकारी तबादलों में प्रशासनिक जरूरत को ही प्राथमिकता दी जाती है, और अफसरों की निजी परेशानियों या पारिवारिक जरूरतों को कम ही तवज्जो मिलती है। लेकिन इस बार राजस्व विभाग ने स्वैच्छिक आवेदनों को भी उतना ही महत्व दिया है, जितना प्रशासनिक जरूरत को।

राजस्व विभाग के इस फैसले का एक बड़ा फायदा यह होगा कि जो अफसर अपनी पसंद की जगह पर पहुंचे हैं, वे ज्यादा बेहतर तरीके से और ज्यादा संतुष्टि के साथ काम कर पाएंगे। सरकारी महकमों में अक्सर देखा गया है कि जबरन तबादले से अफसरों का मनोबल गिरता है, जबकि पसंद की पोस्टिंग मिलने पर काम में तेजी और गुणवत्ता दोनों बढ़ती है। इस लिहाज से राजस्व विभाग का यह कदम एक संतुलित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जहां सरकार की जरूरत और कर्मचारी की सहूलियत, दोनों को साधने की कोशिश की गई है।

कलेक्टरों को सख्त निर्देश – देरी की गुंजाइश नहीं

राजस्व विभाग के आदेश में एक बात बहुत साफ तौर पर कही गई है – तबादला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। यानी जिन जिलों से अफसर हटाए गए हैं, वहां के कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित अफसरों को तुरंत मौजूदा जिम्मेदारी से मुक्त करें, ताकि वे बिना देरी किए नई जगह जाकर कार्यभार संभाल सकें। यह सख्ती इसलिए भी जरूरी मानी जा रही है क्योंकि अक्सर देखा गया है कि तबादला आदेश के बावजूद कुछ अफसर महीनों तक पुरानी जगह पर टिके रहते हैं, जिससे नई जगह का कामकाज प्रभावित होता है।

अब जब सरकार ने साफ तौर पर तत्काल प्रभाव की बात कही है, तो उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में ही सभी 57 अफसर अपनी नई जगहों पर पहुंचकर कामकाज शुरू कर देंगे।

आम जनता पर क्या पड़ेगा असर

राजस्व विभाग सीधे तौर पर आम जनता से जुड़ा हुआ महकमा है। जमीन खरीदी-बिक्री का नामांतरण, सीमांकन विवाद, फौती नामांतरण, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार, आपदा राहत में मुआवजा वितरण – ये सारे काम तहसील स्तर पर ही निपटाए जाते हैं। ऐसे में जब एक साथ इतने बड़े पैमाने पर अफसर बदले जाते हैं, तो शुरुआती दिनों में आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

नए अफसरों को स्थानीय भाषा, बोली, सामाजिक ताना-बाना और इलाके की भौगोलिक स्थिति समझने में कुछ वक्त लगेगा। खासकर बस्तर और सरगुजा जैसे इलाकों में जहां आदिवासी बाहुल्य आबादी है और भाषा-संस्कृति का अपना अलग स्वरूप है, वहां नए अफसरों के लिए तालमेल बिठाना आसान नहीं होगा। हालांकि सरकार और राजस्व विभाग का दावा है कि इस फेरबदल का मकसद ही यही है कि राजस्व से जुड़े मामलों का निपटारा और तेज व प्रभावी तरीके से हो सके।

प्रशासनिक जरूरत बनाम स्वैच्छिक मांग – राजस्व विभाग का संतुलन

राजस्व विभाग की कोशिश यही रही है कि प्रशासनिक जरूरत और अफसरों की निजी मांग के बीच एक संतुलन बनाया जाए। एक तरफ जहां नक्सल प्रभावित और दूरस्थ इलाकों में अनुभवी अफसरों को भेजा गया है, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से एक ही जगह जमे अफसरों को भी नई जगह भेजा गया है, ताकि कामकाज में ताजगी बनी रहे। यह आम तौर पर सरकारी तबादला नीति का ही हिस्सा माना जाता है, जहां तीन से पांच साल तक एक ही जगह टिके अफसरों को नए सिरे से इधर-उधर किया जाता है, ताकि किसी भी तरह की सांठगांठ या स्थानीय दबाव से बचा जा सके।

राजस्व विभाग की अगली सूची पर भी नजर

विभाग के इस बड़े फेरबदल के बाद अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि आने वाले दिनों में और भी सूचियां जारी हो सकती हैं। पिछले कुछ महीनों में भी छत्तीसगढ़ सरकार ने कई विभागों में बड़े पैमाने पर तबादले किए हैं, और यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। खासकर जिन जिलों में अभी भी अफसरों की कमी है या जहां लंबे समय से कोई फेरबदल नहीं हुआ है, वहां जल्द ही नई सूची आने की चर्चा प्रशासनिक हलकों में तेज है।

एक फैसला, पूरे प्रदेश पर असर

छत्तीसगढ़ सरकार के राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग का यह फैसला सिर्फ 57 अफसरों की कुर्सी बदलने भर की खबर नहीं है। यह प्रदेश के पूरे राजस्व तंत्र की सेहत से जुड़ा मामला है। रायपुर से लेकर बस्तर तक, सरगुजा से लेकर सुकमा तक, हर जिले में इसका सीधा असर दिखेगा। नए अफसरों के आने से जहां कहीं ताजगी और नई ऊर्जा आएगी, वहीं कहीं शुरुआती दिनों में तालमेल बिठाने में वक्त भी लगेगा।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई पोस्टिंग वाले अफसर अपने-अपने इलाकों में कितनी तेजी से और कितनी प्रभावी ढंग से काम शुरू करते हैं। क्योंकि आखिरकार, आम जनता के लिए मायने यही रखता है कि उनकी जमीन का नामांतरण, उनका मुआवजा और उनकी शिकायत का निपटारा कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता से होता है। इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल की असली परीक्षा अब मैदान में शुरू होगी, जब नए अफसर अपनी कुर्सी संभालकर आम आदमी की फाइल हाथ में लेंगे।

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