रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने DMF और CGPSC घोटाला मामले में एक साथ कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जिला खनिज निधि में हुई कथित गड़बड़ी और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित धांधली से जुड़ी है, जिसे CGPSC घोटाला के नाम से जाना जाता है। दोनों मामलों की जांच पिछले काफी समय से चल रही थी, लेकिन ताजा गिरफ्तारियों ने DMF और CGPSC घोटाला दोनों मामलों की जांच को नई दिशा दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय
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DMF और CGPSC घोटाला में किसे किया गया गिरफ्तार ?
ED ने DMF मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा नाम के आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि उत्कर्ष चंद्राकर को CGPSC मामले में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां जांच एजेंसी ने आगे की पूछताछ के लिए दोनों मामलों में हिरासत मांगी। बताया जा रहा है कि इस मामले में यह उत्कर्ष चंद्राकर की पहली गिरफ्तारी है, जिससे इस केस में जांच का दायरा अब और बड़ा हो सकता है और आगे कई और नाम भी सामने आ सकते हैं।

पैसों का आरोप कितना बड़ा ?
DMF और CGPSC घोटाला मामले में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जांच एजेंसी के वकील का कहना है कि पड़ताल के दौरान कुछ नए सबूत हाथ लगे हैं। सतपाल सिंह छाबड़ा पर आरोप है कि उन्होंने DMF फंड से जुड़े कामों में करीब 30 करोड़ रुपये तक का कमीशन लिया। वहीं CGPSC घोटाला मामले में उत्कर्ष चंद्राकर पर आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग अभ्यर्थियों से मिलाकर करीब सवा तीन करोड़ रुपये वसूले। कहा जा रहा है कि जिन उम्मीदवारों का डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन नहीं हो पाया, उन्हें यह भरोसा दिलाया गया कि उनकी जगह वन विभाग में पोस्टिंग करवा दी जाएगी। इस तरह के लालच देकर पैसे लेने की बात CGPSC घोटाला की जांच में सामने आई है, जबकि इस मामले में सीधे कमीशन लेने के सबूत मिलने की बात कही जा रही है।
DMF और CGPSC घोटाला मामलें में अदालत से क्या मांगा गया ?
रायपुर की विशेष अदालत में जब दोनों आरोपियों को पेश किया गया, तो ED की तरफ से हर एक के लिए पांच-पांच दिन की पुलिस हिरासत यानी रिमांड मांगी गई। जांच एजेंसी का तर्क है कि DMF और CGPSC घोटाला दोनों मामलों में पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी को समझने के लिए आरोपियों से लगातार पूछताछ जरूरी है, क्योंकि कई दस्तावेज और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी अभी खंगाली जानी बाकी है। अदालत ने इस पर सुनवाई करते हुए ED के आवेदन को मंजूरी दे दी और दोनों आरोपियों को पांच सितंबर तक के लिए हिरासत में भेजने का आदेश दिया। यानी अगले कुछ दिनों तक जांच एजेंसी दोनों से विस्तार से पूछताछ कर सकेगी।
कोर्ट के बाहर हंगामे जैसी स्थिति
सतपाल सिंह छाबड़ा को जब कोर्ट में पेश किया जा रहा था, उसी दौरान परिसर का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। उनकी पत्नी अदालत परिसर के भीतर पहुंच गईं और वहां जोरदार हंगामा किया। DMF मामले से जुड़े इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और मौजूद पुलिसकर्मियों तथा अधिकारियों को स्थिति संभालने में मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि थोड़ी देर बाद हालात सामान्य हो गए और अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ी।
DMF और CGPSC घोटाला मामलें में पूर्व CM के करीबी के घर भी पहुंची ED
इस पूरी कार्रवाई का दायरा सिर्फ दो गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रहा। इसी दौरान ED की एक टीम पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व निजी सहायक और ओएसडी रहे के.के. चंद्रवंशी के घर भी पहुंची। सुबह-सुबह दो गाड़ियों में अधिकारी वहां पहुंचे और तलाशी की कार्रवाई शुरू की। बताया जा रहा है कि इस छापेमारी के दौरान जरूरी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। इस घटनाक्रम ने यह साफ संकेत दिया है कि जांच एजेंसी अब DMF मामले और CGPSC घोटाला मामले की जड़ों तक पहुंचने के लिए राजनीतिक हलकों से जुड़े लोगों की भूमिका को भी खंगाल रही है।
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DMF मामला आखिर है क्या
जिला खनिज निधि यानी DMF एक ऐसा फंड है, जो खनन प्रभावित इलाकों के विकास और वहां रहने वाले लोगों की भलाई के लिए बनाया गया था। इसका मकसद था कि खनन से जो पैसा सरकार को मिलता है, उसका एक हिस्सा सीधे उन क्षेत्रों के विकास कार्यों, स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा जैसी जरूरी सेवाओं पर खर्च हो। लेकिन आरोप है कि इसी DMF फंड से जुड़े ठेकों और भुगतानों में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई और अधिकारियों तथा बिचौलियों ने मिलकर मोटा कमीशन वसूला। यही वजह है कि DMF मामला पिछले कुछ समय से जांच एजेंसियों की बारीकी से पड़ताल का विषय बना हुआ है। छत्तीसगढ़ सरकार
CGPSC घोटाला में क्या आरोप हैं
दूसरी तरफ CGPSC घोटाला यानी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर जैसे अहम पदों पर चयन के लिए कुछ अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली गई और बदले में उन्हें चयन प्रक्रिया में मदद का भरोसा दिलाया गया। कुछ मामलों में तो पेपर लीक जैसे गंभीर आरोप भी सामने आ चुके हैं। इससे पहले भी CGPSC घोटाला और DMF जैसे मामलों में जांच एजेंसियां कुछ अभ्यर्थियों और बिचौलियों से पूछताछ कर चुकी हैं, और अब उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी के साथ CGPSC घोटाला की जांच में एक और अहम कड़ी जुड़ गई है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC)
आगे क्या हो सकता है
अब DMF और CGPSC घोटाला मामले के दोनों आरोपी ED की हिरासत में हैं, तो अगले कुछ दिनों में उनसे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसी की कोशिश रहेगी कि पैसों के लेन-देन का पूरा रास्ता पता लगाया जाए यानी यह पैसा किन-किन खातों से होकर गुजरा, किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है। जिस तरह से पूर्व CM के करीबी रहे अधिकारी के घर भी छापेमारी हुई है, उससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि DMF और CGPSC घोटाला मामले में आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। साथ ही यह भी देखने वाली बात होगी कि रिमांड अवधि पूरी होने के बाद अदालत आगे क्या रुख अपनाती है और क्या इन मामलों में और गिरफ्तारियां होती हैं।
फिलहाल छत्तीसगढ़ के DMF और CGPSC घोटाला जैसे इन दोनों बहुचर्चित मामलों पर सबकी नजरें टिकी हैं। एक तरफ आम जनता के हक का पैसा माने जाने वाला DMF फंड घोटाले के घेरे में है, तो दूसरी तरफ प्रदेश की सबसे अहम सरकारी भर्ती परीक्षाओं में से एक जुड़ा CGPSC घोटाला भी सवालों के दायरे में है। ऐसे में ED की यह ताजा कार्रवाई DMF मामले और CGPSC घोटाला मामले की तह तक पहुंचने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम मानी जा रही है, और CGPSC घोटाला से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं, और आने वाले दिनों में DMF तथा CGPSC घोटाला से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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