दुर्ग/पाटन। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन थाना क्षेत्र में ED की कार्रवाई से जुड़ी एक खबर सोशल मीडिया पर वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाना एक युवक के लिए मुसीबत का कारण बन गया। रूही गांव के रहने वाले परमेश्वर सिंगौर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि ED की कार्रवाई से संबंधित खबर अखबार में पढ़ने के बाद जब उसने वह खबर अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाई, तो इसके कुछ ही देर बाद उसे धमकी भरा फोन आया। यह पूरा मामला अब पुलिस जांच का विषय बन गया है और इससे इलाके में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला
शिकायत के अनुसार, परमेश्वर सिंगौर ने ED की कार्रवाई की खबर को केवल सामान्य जानकारी के तौर पर अपने स्टेटस पर साझा किया था। उसका कहना है कि इस खबर से उसका कोई निजी या पारिवारिक संबंध नहीं है और न ही उसका इस मामले से कोई सीधा वास्ता है। इसके बावजूद स्टेटस लगाने के कुछ समय बाद ही उसके पास अनिल चंद्राकर के नाम से एक फोन कॉल आया। शिकायत में बताया गया है कि फोन करने वाले ने गाली-गलौज की और धमकाते हुए कहा कि “तुझे मारते-मारते थाने ले जाऊंगा।” परमेश्वर ने इस पूरी बातचीत को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और बाद में यह रिकॉर्डिंग पुलिस को सबूत के तौर पर सौंप दी।
शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि उसी दिन कुछ समय बाद उसे यह सूचना मिली कि अनिल चंद्राकर खुद गांव पहुंचे हैं और उसे बुला रहे हैं। इस सूचना के बाद परमेश्वर के मन में डर पैदा हो गया। उसका आरोप है कि इस दौरान उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई। इस धमकी से भयभीत होकर वह अपना गांव छोड़कर चला गया। पुलिस को दी गई शिकायत में परमेश्वर ने साफ कहा है कि उसने केवल जानकारी के मकसद से खबर शेयर की थी, न कि किसी को उकसाने या बदनाम करने की नीयत से।
पाटन पुलिस ने दर्ज किया केस
परमेश्वर सिंगौर की शिकायत के आधार पर पाटन थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। धारा 351(4) आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा सौंपी गई फोन कॉल की रिकॉर्डिंग को जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है और इस आधार पर पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में कौन है, फोन नंबर किसके नाम पर पंजीकृत है, और क्या अनिल चंद्राकर वाकई गांव पहुंचे थे या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप किस हद तक सही हैं।
क्यों चर्चा में है ED की यह कार्रवाई
दरअसल यह पूरा विवाद उस ED की कार्रवाई से जुड़ा है, जो 1 सितंबर को छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में की गई थी। यह ED की कार्रवाई बहुचर्चित CGPSC परीक्षा से जुड़े मामले में की गई थी, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगे हैं। ED ने अपनी आधिकारिक प्रेस रिलीज में दावा किया था कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने कथित तौर पर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से अधिक की रकम एकत्र की।
इसी प्रेस रिलीज में यह भी उल्लेख किया गया था कि इस रकम में से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए गए। ED की इस कार्रवाई ने राज्यभर में हलचल मचा दी थी और मीडिया में इसे व्यापक कवरेज मिली थी। इसी वजह से आम लोगों के बीच भी ED की कार्रवाई से जुड़ी खबरें तेजी से सोशल मीडिया पर फैलीं, जिनमें परमेश्वर सिंगौर द्वारा लगाया गया स्टेटस भी शामिल था।
DGP साहब की गाड़ी, मरने वाले पर ठीकरा ? छत्तीसगढ़ पुलिस की यह कैसी ‘नौटंकी’ है!
शिकायतकर्ता की चिंता
परमेश्वर सिंगौर ने पुलिस के सामने अपनी बात रखते हुए बताया कि उसने ED की कार्रवाई की खबर को महज एक आम खबर समझकर स्टेटस पर लगाया था, जैसा कि लोग अक्सर सामयिक और चर्चित खबरें साझा करते हैं। उसे यह अंदाजा नहीं था कि इस साधारण से कदम की वजह से उसे धमकी और गाली-गलौज का सामना करना पड़ेगा। शिकायत में यह बिंदु खास तौर पर रेखांकित किया गया है कि उसका मामले से कोई व्यक्तिगत लेना-देना नहीं है, फिर भी उसे निशाना बनाया गया। ग्रामीणों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा है, और कुछ लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर सूचना साझा करने की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है।
आरोपों की पुष्टि अभी बाकी
यह ध्यान देने योग्य है कि युवक को धमकी देने और जान से मारने की चेतावनी का आरोप फिलहाल केवल शिकायतकर्ता की ओर से लगाया गया है। पुलिस ने इस आधार पर BNS की धारा 351(4) के तहत केस दर्ज तो कर लिया है, लेकिन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच के साथ-साथ गवाहों के बयान भी दर्ज कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धमकी देने वाला व्यक्ति कौन है और उसका इस पूरे प्रकरण से क्या संबंध है।
आगे की कार्रवाई
पाटन पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है और जल्द ही इसमें आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो पुलिस दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। फिलहाल परमेश्वर सिंगौर डर के माहौल में अपने गांव से दूर है और पुलिस से सुरक्षा तथा न्याय की उम्मीद कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सोशल मीडिया पर खबरें साझा करने वाले आम नागरिकों को भी कई बार अनजाने में विवादों में घसीट लिया जाता है। दुर्ग जिले के इस मामले पर पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।

One thought on “ED की कार्रवाई की खबर वायरल की, अनिल चंद्राकर के नाम पर आया कातिलाना धमकी भरा कॉल”