सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्तीय अनियमितता के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जोईधा राम डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ यह कार्रवाई उस समय के मामले को लेकर हुई है, जब वे महासमुंद जिले के बसना में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद पर तैनात थे।
विभागीय आदेश के मुताबिक, डहरिया पर शासकीय प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों के बिजली बिल की राशि में वित्तीय गड़बड़ी करने का आरोप है। इस अनियमितता से शासन को आर्थिक नुकसान होने की बात भी आदेश में कही गई है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी विभागीय जांच होना बाकी है और अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
बसना में BEO रहते सामने आया मामला
जोईधा राम डहरिया जब महासमुंद जिले के बसना में विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ थे, उसी दौरान सरकारी स्कूलों के बिजली बिल से जुड़ी राशि में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया।
विभाग ने इसे उनके पदीय दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारिता और गंभीर अनुशासनहीनता माना है। आदेश में उनके इस आचरण को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत कदाचार बताया गया है।
मामले में विभाग का मुख्य आरोप यह है कि स्कूलों के बिजली बिल के लिए निर्धारित सरकारी राशि के इस्तेमाल में नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी।
3 सितंबर को जारी हुआ निलंबन आदेश
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 3 सितंबर 2026 को निलंबन आदेश जारी किया गया। आदेश में कहा गया है कि डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत की गई है।
निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा), रायपुर निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता भी दिया जाएगा।
अभी आरोप साबित नहीं हुए हैं
इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि निलंबन विभागीय कार्रवाई है। इसका मतलब यह नहीं है कि लगाए गए आरोप अंतिम रूप से साबित हो चुके हैं। मामले की विस्तृत विभागीय जांच के बाद ही यह साफ होगा कि वित्तीय अनियमितता के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
यानी फिलहाल डहरिया पर विभागीय आदेश में लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।
निलंबन के बाद नए DEO की जिम्मेदारी तय
जोईधा राम डहरिया के निलंबन के बाद सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में जिला शिक्षा अधिकारी का काम प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था भी कर दी है।
लक्ष्मी नारायण पटेल, जो वर्तमान में रायगढ़ जिले के खरसिया में विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नए नियमित जिला शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना होने तक पटेल यह जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्हें छत्तीसगढ़ कोषालय संहिता भाग-01 के सहायक नियम 125 के तहत अस्थायी आहरण एवं संवितरण संबंधी अधिकार भी दिए गए हैं।
स्कूलों के पैसों से जुड़ी गड़बड़ी पर विभाग सख्त
सरकारी स्कूलों के बिजली बिल जैसी जरूरी मद की राशि में अनियमितता के आरोप ने शिक्षा विभाग की वित्तीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्कूलों के रोजमर्रा के खर्च से जुड़ी राशि का सही तरीके से इस्तेमाल होना जरूरी है, क्योंकि इन मदों के लिए सरकारी बजट निर्धारित होता है।
डहरिया के खिलाफ हुई कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिला है कि विभाग वित्तीय मामलों में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक गड़बड़ी कितनी हुई, उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और शासन को कितना नुकसान हुआ, इसकी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
निलंबन के बाद अब इस मामले में आगे की विभागीय जांच अहम होगी। जांच में आरोपों और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही यह तय होगा कि डहरिया की भूमिका क्या थी और उनके खिलाफ आगे कौन-सी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल उन्हें निलंबित कर मुख्यालय रायपुर तय कर दिया गया है, जबकि सारंगढ़-बिलाईगढ़ में DEO का अतिरिक्त प्रभार लक्ष्मी नारायण पटेल को सौंपा गया है।
मामले का अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।
