बेल्हारी बांध के तटबंध में पहली बारिश के बाद दरार और पानी का रिसाव सामने आया है। 2.68 करोड़ के काम की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।
कवर्धा। जिले के बेल्हारी बांध को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पहली बारिश के बाद बांध के तटबंध में कई जगह दरारें दिखाई दे रही हैं। कुछ हिस्सों में मिट्टी भी धंसने लगी है। वहीं, तटबंध से पानी के रिसाव की बात भी सामने आई है।
खास बात यह है कि बेल्हारी बांध के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य के लिए करीब 2.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद बारिश शुरू होते ही तटबंध की स्थिति सवालों के घेरे में आ गई है।
ग्रामीणों के अनुसार बांध करीब 56 साल पुराना है। यह आसपास के किसानों के लिए सिंचाई का एक अहम साधन है। इसलिए तटबंध में आई दरार और रिसाव को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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बेल्हारी बांध में पहली बारिश में ही दिखी दरार
बेल्हारी बांध ग्राम पंचायत छोटू पारा के पास जंगल क्षेत्र में स्थित है। बारिश के बाद तटबंध के कई हिस्सों में दरारें दिखाई दी हैं।
कुछ स्थानों पर मिट्टी नीचे बैठती नजर आ रही है। इसके अलावा पानी भी तटबंध से बाहर निकल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को आने वाले दिनों की चिंता सता रही है।
अभी बारिश का मौसम शुरू ही हुआ है। यदि लगातार तेज बारिश होती है, तो बांध में पानी का स्तर बढ़ सकता है। परिणामस्वरूप तटबंध पर दबाव भी बढ़ेगा।
इसी वजह से ग्रामीण चाहते हैं कि अधिकारी जल्द मौके पर पहुंचें। साथ ही तटबंध की तकनीकी जांच भी कराई जाए।

बेल्हारी बांध के 2.68 करोड़ के काम पर उठे सवाल
बेल्हारी बांध में करोड़ों रुपये की लागत से कई काम कराए जा रहे हैं। इनमें बांध का जीर्णोद्धार, नहरों को पक्का करना और तटबंध से जुड़े निर्माण कार्य शामिल बताए जा रहे हैं।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध को मजबूत करना है। इसके अलावा किसानों की सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाना भी इसका हिस्सा है।
हालांकि, पहली बारिश में तटबंध में दरार और रिसाव दिखाई देने के बाद ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।
आखिर निर्माण कार्य के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों बनी?
क्या काम तय तकनीकी नियमों के अनुसार किया गया?
क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांची गई?
क्या मिट्टी की सही तरीके से दबाई गई परत बनाई गई?
इन सवालों का जवाब जल संसाधन विभाग की जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
बेल्हारी बांध से जुड़ी 162 एकड़ जमीन पर किसानों की चिंता
बेल्हारी बांध से करीब 162 एकड़ यानी लगभग 65 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने की बात सामने आई है।
इसलिए तटबंध की स्थिति का सीधा संबंध किसानों से है। बांध में किसी तरह की बड़ी समस्या आती है, तो इसका असर खेती पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, यदि पानी का रिसाव लगातार बढ़ता है, तो आसपास के खेतों में भी पानी पहुंच सकता है। इससे फसल को नुकसान होने की आशंका बनी रहेगी।
किसानों का कहना है कि बांध की सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। अभी से जरूरी कदम उठाए जाएंगे, तो आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।
ग्रामीणों का दावा, अधिकारियों को पहले दी गई थी जानकारी
ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध से पानी रिसने की जानकारी पहले ही संबंधित अधिकारियों को दी गई थी।
उनके मुताबिक कुछ स्थानों पर तटबंध की कमजोरी भी नजर आ रही थी। इसके बावजूद समय रहते जरूरी सुधार नहीं किया गया।
हालांकि, इस दावे की अभी विभागीय पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में तकनीकी जांच जरूरी है।
जांच से यह पता चल सकता है कि दरार और रिसाव किस वजह से हुआ। इसके पीछे बारिश, पानी का दबाव, मिट्टी की स्थिति या निर्माण कार्य से जुड़ी कोई वजह हो सकती है।

बेल्हारी बांध : निर्माण पूरा होने से पहले ही परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार बेल्हारी बांध से जुड़े निर्माण और जीर्णोद्धार का काम अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है।
ऐसे में काम खत्म होने से पहले तटबंध में दरार दिखाई देना चिंता की बात है। यदि निर्माण के दौरान किसी हिस्से में कमजोरी सामने आती है, तो उसे समय रहते ठीक किया जा सकता है।
इसीलिए ग्रामीण केवल ऊपर से मरम्मत नहीं चाहते। वे समस्या की असली वजह जानने की मांग कर रहे हैं।
यदि तटबंध के अंदर पानी जा रहा है, तो इसकी जांच जरूरी होगी। इसी तरह मिट्टी की मजबूती भी जांचनी होगी।
जल संसाधन विभाग की निगरानी पर सवाल
मामले ने जल संसाधन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
बांध और तटबंध से जुड़े निर्माण कार्य काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इनका सीधा संबंध पानी, खेती और लोगों की सुरक्षा से रहता है।
इसलिए ऐसे कामों की नियमित जांच जरूरी होती है।
ग्रामीण जानना चाहते हैं कि निर्माण के दौरान अधिकारियों ने कितनी बार मौके का निरीक्षण किया। साथ ही, गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई।
निर्माण सामग्री के नमूने लिए गए थे या नहीं, यह भी जांच का विषय है। इसके अलावा मिट्टी की गुणवत्ता और उसकी मजबूती की जांच भी महत्वपूर्ण है।

आकाश केशरवानी ने उठाए सवाल
बेल्हारी बांध की स्थिति को लेकर प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कबीरधाम जिले में जल संसाधन विभाग के विभिन्न निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर चिंता जताई है।
केशरवानी का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मगर, यदि जमीन पर काम की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो इसकी जांच जरूरी है।
उन्होंने कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने की मांग की है।
साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। उनका सवाल है कि यदि निर्माण कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती?
हालांकि, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से जुड़े आरोप फिलहाल आरोप ही हैं। इनकी पुष्टि स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकती है।
जनपद सदस्य लीला धनुक वर्मा ने भी मांगी कार्रवाई
मामले में जनपद सदस्य लीला धनुक वर्मा ने भी चिंता जताई है।
उन्होंने तटबंध की मौजूदा स्थिति को देखते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि समस्या अभी सामने आई है, इसलिए इसे बढ़ने से पहले ठीक करना जरूरी है।
ग्रामीणों की भी यही मांग है कि अधिकारी मौके पर पहुंचें। इसके बाद तटबंध की पूरी स्थिति की जांच की जाए।
जहां पानी का रिसाव हो रहा है, वहां तत्काल जरूरी उपाय किए जाएं। साथ ही कमजोर हिस्सों को मजबूत किया जाए।
बेल्हारी बांध बारिश बढ़ी तो बढ़ सकता है तटबंध पर दबाव
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता आने वाले दिनों की बारिश को लेकर है।
यदि लगातार तेज बारिश होती है, तो बांध में पानी का स्तर बढ़ सकता है। पानी बढ़ने के साथ तटबंध पर दबाव भी बढ़ेगा।
पहले से दरार वाले हिस्सों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है। इसी कारण ग्रामीण प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हालांकि अभी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। फिर भी सुरक्षा के लिहाज से तटबंध की निगरानी जरूरी है।
समय रहते कदम उठाए गए, तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।
किसानों ने की तकनीकी जांच की मांग
बेल्हारी बांध के ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग से कई मांगें की हैं।
सबसे पहली मांग तटबंध के तत्काल तकनीकी निरीक्षण की है। इसके अलावा पानी के रिसाव वाले हिस्सों की पहचान करने को कहा गया है।
जहां मिट्टी धंस रही है, वहां भी जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाने की मांग है।
इसके साथ ही 2.68 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की मांग उठी है।
ग्रामीण चाहते हैं कि निर्माण सामग्री की जांच हो। साथ ही यह भी देखा जाए कि काम तय तकनीकी नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं।
निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और अधिकारियों की निरीक्षण रिपोर्ट की जांच भी की जानी चाहिए।
सिर्फ आरोप नहीं, जांच से सामने आएगी सच्चाई
बेल्हारी बांध को लेकर फिलहाल कई सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल कर रहे हैं। जनप्रतिनिधि भी जांच की मांग कर रहे हैं।
फिर भी किसी आरोप को अंतिम सच मानना उचित नहीं होगा।
तटबंध में दरार आने के कई कारण हो सकते हैं। बारिश इसका एक कारण हो सकती है। पानी का दबाव भी असर डाल सकता है।
इसके अलावा मिट्टी की स्थिति और निर्माण की तकनीक भी महत्वपूर्ण हो सकती है। सामग्री की गुणवत्ता भी जांच का हिस्सा होनी चाहिए।
इसलिए विशेषज्ञों की टीम से तकनीकी जांच कराना सबसे जरूरी कदम होगा।
जांच के बाद ही पता चलेगा कि समस्या किस वजह से आई है। उसी आधार पर जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
2.68 करोड़ रुपये के काम का हिसाब भी जरूरी
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी पैसे से होने वाले काम की जानकारी लोगों को मिलनी चाहिए।
बेल्हारी बांध के मामले में लोग जानना चाहते हैं कि 2.68 करोड़ रुपये से कौन-कौन से काम कराए जा रहे हैं।
कितना काम पूरा हुआ है?
कितना काम अभी बाकी है?
काम किस एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है?
गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
इन सवालों के जवाब सामने आने से स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।
इसके अलावा निर्माण कार्य की लागत और काम की प्रगति की जानकारी भी सार्वजनिक होने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
बांध की सुरक्षा सबसे जरूरी
बेल्हारी बांध की मौजूदा स्थिति में सबसे पहले तटबंध की सुरक्षा जरूरी है।
सरकारी राशि और निर्माण की जांच अपनी जगह महत्वपूर्ण है। लेकिन बारिश के मौसम में किसानों और आसपास के लोगों की सुरक्षा सबसे पहले आती है।
यदि समस्या छोटी है, तो अभी उसे ठीक करना आसान होगा। दूसरी ओर, रिसाव और मिट्टी का धंसाव बढ़ गया, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
इसलिए विभाग को जल्द मौके पर पहुंचना चाहिए। जरूरत के अनुसार तत्काल सुरक्षा उपाय भी किए जाने चाहिए।
प्रशासन के सामने कई सवाल
अब इस पूरे मामले में प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं।
तटबंध में दरार आखिर क्यों आई?
पानी का रिसाव किस हिस्से से हो रहा है?
क्या निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुसार किया गया?
क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई?
क्या अधिकारियों ने समय-समय पर काम का निरीक्षण किया?
और सबसे अहम सवाल यह है कि 2.68 करोड़ रुपये के काम के बावजूद पहली बारिश में तटबंध की स्थिति पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
इन सवालों का जवाब तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।
निर्माण की जांच के साथ सुरक्षा पर भी ध्यान जरूरी
बेल्हारी बांध की स्थिति को लेकर जांच जरूरी है। इसके साथ ही तत्काल सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी है।
यदि तटबंध में किसी हिस्से में ज्यादा कमजोरी है, तो वहां निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।
जरूरत पड़ने पर पानी के रिसाव को रोकने के लिए तत्काल काम किया जाना चाहिए। इसके अलावा बारिश के दौरान तटबंध की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी।
इससे किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
किसानों के लिए बांध का महत्व
बेल्हारी बांध आसपास के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे जुड़ी करीब 162 एकड़ कृषि भूमि के कारण इसकी सुरक्षा का महत्व और बढ़ जाता है।
किसानों की खेती काफी हद तक सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर रहती है। इसलिए बांध में किसी तरह की समस्या का असर सीधे खेती पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि किसान बांध को लेकर गंभीर हैं। उनकी मांग है कि तटबंध को जल्द सुरक्षित किया जाए।
साथ ही, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच भी हो।
अब विभाग की कार्रवाई पर नजर
पहली बारिश के बाद बेल्हारी बांध के तटबंध में दरार और पानी का रिसाव सामने आने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है।
दूसरी ओर, करीब 2.68 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आकाश केशरवानी ने मामले में जांच की मांग की है। जनपद सदस्य लीला धनुक वर्मा ने भी तत्काल कार्रवाई की मांग रखी है।
अब नजर जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन पर है।
यदि अधिकारी जल्द मौके पर पहुंचकर जांच करते हैं, तो स्थिति साफ हो सकती है। इसके साथ ही तटबंध में मौजूद कमजोरी को समय रहते दूर किया जा सकता है।
बेल्हारी बांध में पहली बारिश के बाद सामने आई दरार और पानी का रिसाव ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण है।
करीब 56 साल पुराने इस बांध से आसपास के किसानों को सिंचाई का लाभ मिलता है। वहीं, करीब 162 एकड़ यानी 65 हेक्टेयर कृषि भूमि इससे जुड़ी बताई जा रही है।
ऐसे में तटबंध की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
दूसरी तरफ, 2.68 करोड़ रुपये के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवालों का जवाब भी जरूरी है।
फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए तकनीकी जांच ही सबसे अहम कदम होगी।
जांच से पता चलेगा कि तटबंध में दरार और रिसाव की असली वजह क्या है। यदि निर्माण में कमी मिलती है, तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
वहीं, यदि समस्या किसी प्राकृतिक या तकनीकी कारण से हुई है, तो उसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
फिलहाल किसानों और ग्रामीणों की मांग साफ है—बेल्हारी बांध के तटबंध की तत्काल जांच हो, पानी का रिसाव रोका जाए और बारिश बढ़ने से पहले बांध को सुरक्षित किया जाए।
अब देखना होगा कि जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
