जनसंपर्क विभाग में कथित गड़बड़ियों पर बवाल! अब सड़क पर उतरेंगे पत्रकार

जनसंपर्क विभाग के कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोपों पर चर्चा

जनसंपर्क विभाग के खिलाफ प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने आंदोलन की रणनीति बनाई। पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग उठी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। रविवार को हुई संगठन की बैठक में जनसंपर्क विभाग और संवाद कार्यालय से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।

बैठक में पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि शासन और मीडिया के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होने के कारण जनसंपर्क विभाग की व्यवस्था पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर अब संगठन चरणबद्ध तरीके से अपनी आवाज उठाने की तैयारी में है।

जनसंपर्क विभाग के खिलाफ संगठन का यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के बजाय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पर केंद्रित रखने की बात कही गई है। छत्तीसगढ़ का इतिहास: 10 अनसुने सच जो आपको जरूर जानने चाहिए

जनसंपर्क विभाग के कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोपों पर चर्चा

बैठक में जनसंपर्क विभाग और संवाद कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रहे कथित आरोपों पर भी चर्चा हुई। संगठन के सदस्यों ने अनियमितता, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से जुड़े आरोपों को गंभीरता से उठाने की बात कही।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए संगठन की ओर से लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

एसोसिएशन का कहना है कि यदि आरोपों से संबंधित दस्तावेज या ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें सक्षम अधिकारियों के सामने रखा जाएगा।

जनसंपर्क विभाग के कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोपों पर चर्चा

जनसंपर्क विभाग के खिलाफ पहले ज्ञापन, फिर जनजागरूकता अभियान

जनसंपर्क विभाग के खिलाफ प्रस्तावित अभियान को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर बैठक में चर्चा हुई। शुरुआत में संबंधित अधिकारियों और शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की रणनीति पर विचार किया गया।

इसके बाद जरूरत पड़ने पर जनजागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई। संगठन का मानना है कि पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से जुड़े विषयों पर आम लोगों और मीडिया जगत को भी जानकारी होनी चाहिए।

एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर वैधानिक मंचों का भी सहारा लिया जाएगा।

जनसंपर्क विभाग

पारदर्शिता नहीं तो सवाल क्यों नहीं?

बैठक में संगठन के सदस्यों ने जनसंपर्क व्यवस्था में पारदर्शिता को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उनका कहना है कि मीडिया से जुड़े कामकाज में नियम स्पष्ट होने चाहिए और सभी के लिए समान अवसर मिलना चाहिए।

जनसंपर्क विभाग के खिलाफ उठाई जा रही आवाज का मुख्य आधार यही सवाल है कि विभाग की कार्यप्रणाली कितनी पारदर्शी है और शिकायतों का समाधान किस स्तर पर किया जाता है।

एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी शिकायत को दबाने के बजाय उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

दस्तावेज जुटाए जाएंगे, फिर आगे बढ़ेगा मामला

बैठक में शिकायतों और संबंधित दस्तावेजों को एकत्र करने पर भी चर्चा हुई। संगठन अब उपलब्ध जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सामने रखने की तैयारी में है।

यदि किसी मामले में ठोस दस्तावेज मिलते हैं, तो उन्हें संबंधित अधिकारियों और सक्षम संस्थाओं को सौंपने की बात कही गई है।

इससे आरोपों की जांच का रास्ता भी साफ हो सकता है। साथ ही, विभाग का पक्ष सामने आने के बाद पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

किसी अधिकारी को निशाना बनाना उद्देश्य नहीं

एसोसिएशन ने यह स्पष्ट किया कि जनसंपर्क विभाग के खिलाफ उठाया जा रहा अभियान किसी अधिकारी या कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने के लिए नहीं है।

संगठन की मांग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। एसोसिएशन का कहना है कि पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के हितों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष व्यवस्था होनी चाहिए।

संगठन ने यह भी संकेत दिया कि सभी आरोपों और शिकायतों को तथ्यों के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाएगा।

कानून के दायरे में होगा पूरा आंदोलन

प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रस्तावित आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाने की बात कही है। संगठन की रणनीति में ज्ञापन, जनजागरूकता अभियान और वैधानिक माध्यमों को प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई।

यानी जनसंपर्क विभाग के खिलाफ यह मुहिम सड़क पर हंगामे के बजाय संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी है।

विभाग का पक्ष भी रहेगा महत्वपूर्ण

इस पूरे मामले में जनसंपर्क विभाग और संबंधित अधिकारियों का पक्ष बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल इस रिपोर्ट में एसोसिएशन की बैठक में उठाए गए मुद्दों और आरोपों को ही आधार बनाया गया है।

भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी या अनियमितता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

यदि विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जवाब या जांच रिपोर्ट सामने आती है, तो उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

रविवार की बैठक के बाद जनसंपर्क विभाग के खिलाफ एसोसिएशन की गतिविधियां आने वाले दिनों में तेज हो सकती हैं। संगठन की ओर से पहले ज्ञापन सौंपने और उसके बाद जरूरत के अनुसार जनजागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है।

इसके साथ ही शिकायतों और दस्तावेजों को एकत्र करने पर भी जोर दिया गया है। यदि दस्तावेजी आधार मजबूत होता है, तो मामला संबंधित अधिकारियों और वैधानिक संस्थाओं तक पहुंच सकता है।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा मुद्दा पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता है। अब देखना होगा कि संगठन की मांगों पर शासन और जनसंपर्क विभाग की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

छत्तीसगढ़ में जनसंपर्क विभाग के खिलाफ प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। संगठन ने विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई है।

कथित भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और अनियमितताओं के आरोप फिलहाल आरोप के स्तर पर हैं। इनकी पुष्टि निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी तथ्यों से ही हो सकेगी।

अब एसोसिएशन की अगली कार्रवाई और शासन-प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक वेबसाइट

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