वंदे मातरम विवाद में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। भाजपा ने कांग्रेस कार्यालय का घेराव किया, पुलिस ने संभाला मोर्चा।
अंबिकापुर। अंबिकापुर में वंदे मातरम को लेकर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर टकराव जैसी स्थिति बन गई। कथित अपमान के मुद्दे ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय का घेराव किया। इसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए।
मामला बढ़ता देख पुलिस ने मोर्चा संभाला। कांग्रेस कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग की गई। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग रखा गया। इस दौरान दोनों ओर से नारेबाजी और प्रदर्शन जारी रहा। जनसंपर्क विभाग में कथित गड़बड़ियों पर बवाल! अब सड़क पर उतरेंगे पत्रकार
मशाल रैली से शुरू हुआ प्रदर्शन
बताया गया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहले भाजपा कार्यालय से मशाल रैली निकाली। कार्यकर्ता हाथों में मशाल लेकर आगे बढ़े। रैली के दौरान देशभक्ति के नारे भी लगाए गए।
रैली घड़ी चौक पहुंची। यहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम का गायन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही।
इसके बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता दिखाई दिया।

कांग्रेस कार्यालय के बाहर भी हुआ वंदे मातरम का गायन
भाजपा के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी अपने कार्यालय के बाहर वंदे मातरम का गायन किया। इसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे के सामने आ गए।
कुछ ही देर में घड़ी चौक के आसपास माहौल तनावपूर्ण हो गया। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
पुलिस पहले से ही स्थिति पर नजर रख रही थी। हालात को देखते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बैरिकेडिंग कर दी।
छत्तीसगढ़ पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट
घड़ी चौक बना राजनीतिक प्रदर्शन का केंद्र
अंबिकापुर का घड़ी चौक इस पूरे घटनाक्रम का प्रमुख केंद्र बन गया। एक तरफ भाजपा कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। दूसरी तरफ कांग्रेस कार्यकर्ता भी अपने कार्यालय के बाहर मौजूद रहे।
बैरिकेडिंग के दोनों तरफ से नारेबाजी होती रही। पुलिस ने दोनों पक्षों को आमने-सामने आने से रोकने की कोशिश की।
अंबिकापुर वंदे मातरम विवाद के कारण इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई।
कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने पहुंचे भाजपा कार्यकर्ता
कथित वंदे मातरम अपमान को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय का घेराव किया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया। भाजपा की ओर से इस मामले को गंभीर मुद्दा बताया गया।
वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी अपने कार्यालय के बाहर वंदे मातरम का गायन कर अपना पक्ष सामने रखा।

इसके बाद दोनों दलों के बीच आमने-सामने की स्थिति बन गई।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी। बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया।
पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अलग-अलग रखा। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों को आमने-सामने आने से रोकना था।
पुलिस की मौजूदगी के बीच दोनों तरफ से नारेबाजी और प्रदर्शन चलता रहा। हालांकि, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।
वंदे मातरम पर सियासत तेज
अंबिकापुर वंदे मातरम विवाद ने एक बार फिर शहर की राजनीति को गरमा दिया है। देशभक्ति से जुड़े इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने दिखाई दिए।
भाजपा ने कथित अपमान को लेकर विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस की ओर से भी वंदे मातरम का गायन किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

शहर में पुलिस की बढ़ी निगरानी
घटना के दौरान पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। घड़ी चौक और कांग्रेस कार्यालय के आसपास जवानों की तैनाती की गई।
बैरिकेडिंग के जरिए दोनों पक्षों को अलग रखा गया। पुलिस की कोशिश रही कि प्रदर्शन के दौरान कोई अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
अंबिकापुर वंदे मातरम विवाद के बीच प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। पुलिस ने मौके पर स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
विवाद का आगे क्या असर होगा?
वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के कार्यकर्ता अपने-अपने तरीके से विरोध और समर्थन दर्ज कराते नजर आए।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम में कथित अपमान से जुड़े आरोपों और संबंधित पक्षों के बयानों को अलग-अलग देखना जरूरी है। किसी भी आरोप की पुष्टि संबंधित आधिकारिक जानकारी और तथ्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
अंबिकापुर में हुए इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि वंदे मातरम का मुद्दा राजनीतिक तौर पर बेहद संवेदनशील बन चुका है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस की ओर से इस मामले को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
