बालोद के आत्मानंद स्कूल में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित है। दो निजी शिक्षकों के वेतन के लिए बच्चों से 400 रुपये मांगने का मामला सामने आया।
बालोद। जिले के अछोली गांव स्थित आत्मानंद स्कूल में शिक्षकों की कमी का मामला सामने आया है। स्कूल में करीब 548 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, कई विषयों के शिक्षक लंबे समय से नहीं हैं। ऐसे में पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई है।
समस्या को देखते हुए स्कूल प्रबंधन समिति ने दो निजी शिक्षकों को अस्थायी तौर पर रखने का फैसला किया। इसके लिए हर बच्चे से 400 रुपये मांगे गए। इस फैसले के बाद अभिभावकों के बीच नाराजगी भी सामने आई है।
अंबिकापुर डबल मर्डर: पति-पत्नी की हत्या से सनसनी, 5 बड़े सवाल
आत्मानंद स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी
जानकारी के अनुसार, आत्मानंद स्कूल में कई पद महीनों से खाली हैं। नई भर्ती नहीं होने से स्थिति और कठिन हो गई है। दूसरी ओर, किसी शिक्षक का ट्रांसफर भी नहीं किया गया है।
बताया गया कि पिछले तीन साल से अंग्रेजी और राजनीति विज्ञान के शिक्षक की कमी बनी हुई है। इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। सिलेबस भी पीछे चलने की बात सामने आई है।
स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ रहे हैं। इसलिए शिक्षकों की कमी को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
दो निजी शिक्षकों को रखने का फैसला
पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए स्कूल प्रबंधन समिति ने दो निजी शिक्षकों को रखने का फैसला किया। दोनों शिक्षकों को अस्थायी तौर पर पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह के मुताबिक, यह फैसला ग्रामीणों और पालकों की सहमति से लिया गया है। दोनों शिक्षकों को हर महीने 6-6 हजार रुपये वेतन देने की बात कही गई है।
हालांकि, यहां सवाल यह है कि सरकारी स्कूल में शिक्षकों की कमी को पूरा करने की जिम्मेदारी किसकी है।

आत्मानंद स्कूल में बच्चों से क्यों मांगे 400 रुपये?
समिति के अनुसार, निजी शिक्षकों के वेतन के लिए हर बच्चे से 400 रुपये लिए जाएंगे। इस राशि से शिक्षकों को भुगतान करने की व्यवस्था बनाई गई है।
बताया गया कि दोनों शिक्षकों के वेतन पर हर महीने करीब 10 हजार रुपये खर्च होंगे। इसके लिए बच्चों और उनके परिवारों से राशि जुटाने का फैसला किया गया।
हालांकि, इस फैसले ने अभिभावकों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शिक्षकों की कमी का खर्च भी बच्चों के परिवारों को उठाना चाहिए? यही सवाल अब चर्चा में है।
अभिभावकों में नाराजगी, सरकार से उठे सवाल
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा की व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका तर्क है कि शिक्षकों की भर्ती और उनका वेतन सरकारी व्यवस्था के तहत होना चाहिए।
पहले आत्मानंद स्कूल में किसी तरह की फीस नहीं ली जाती थी। ऐसे में अचानक 400 रुपये की मांग से कई पालक परेशान हैं।
वहीं, कुछ अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए। लेकिन इसके लिए परिवारों से पैसे लेना स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 8वीं तक की शिक्षा मुफ्त और अनिवार्य है। हालांकि, इस मामले में 400 रुपये की मांग किस नियम के तहत की गई है, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।
अधिकारियों ने क्या कहा?
जिला शिक्षा अधिकारी दीपक दुबे ने बताया कि उन्हें इस फैसले की जानकारी मिली है। उन्होंने मामले की पूरी जांच कराने की बात कही है।
दूसरी ओर, प्रभारी प्राचार्य विजय कुमार गांवरे ने शिक्षकों की कमी को इस फैसले की वजह बताया। उनके अनुसार, पढ़ाई प्रभावित होने से बचाने के लिए निजी शिक्षकों को रखने का कदम उठाया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार से नए शिक्षक मिलने के बाद बच्चों से ली गई राशि वापस कर दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग का आधिकारिक पोर्टल
आत्मानंद स्कूल में शिक्षकों की कमी कब दूर होगी?
अब सबसे बड़ा सवाल शिक्षकों की स्थायी व्यवस्था को लेकर है। यदि स्कूल में कई पद लंबे समय से खाली हैं, तो नई भर्ती कब होगी?
इसके अलावा, अंग्रेजी और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई कब सामान्य होगी? विद्यार्थियों का पिछड़ा सिलेबस कैसे पूरा कराया जाएगा? इन सवालों पर अभिभावक अब शिक्षा विभाग के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
सरकार की ओर से नए शिक्षक मिलने के बाद राशि लौटाने की बात कही गई है। फिलहाल, इस दावे पर अमल कब होगा, यह देखना बाकी है।
आत्मानंद स्कूल मामले में आगे क्या होगा?
फिलहाल शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि बच्चों से 400 रुपये लेने का फैसला नियमों के अनुसार था या नहीं।
साथ ही, शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए विभाग क्या कदम उठाता है, इस पर भी नजर रहेगी।
अभिभावकों की मांग है कि स्कूल में जल्द नियमित शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं। इससे बच्चों की पढ़ाई दोबारा पटरी पर आ सकेगी।
आत्मानंद स्कूल में सामने आया यह मामला सिर्फ 400 रुपये की मांग तक सीमित नहीं है। यह सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से जुड़ा बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है और खाली पदों को कब भरा जाता है।
नोट: खबर उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर तैयार की गई है। 400 रुपये लेने की प्रक्रिया और इसके नियमों को लेकर अंतिम स्थिति शिक्षा विभाग की जांच के बाद स्पष्ट होगी।
