CGMSC दवा खरीदी को लेकर विवाद बढ़ा है। नई टेंडर प्रक्रिया के बीच पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट पर सवाल उठे हैं। प्रबंधन ने आरोपों से इनकार किया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी CGMSC में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी को लेकर विवाद सामने आया है। नई टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद, पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई है। उसका कहना है कि नई निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में, पुराने करार को लेकर दोबारा प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत पर सवाल उठता है।
हालांकि, CGMSC प्रबंधन ने पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ाने की बात से इनकार किया है। प्रबंधन के मुताबिक, फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
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CGMSC में क्या है पूरा मामला?
CGMSC छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं की खरीदी और सप्लाई से जुड़ी प्रमुख संस्था है। आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के लिए नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है।
इसी प्रक्रिया को लेकर अब शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि नई टेंडर प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
वहीं, पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी गतिविधियां सामने आई हैं। इसी वजह से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

CGMSC ने कब जारी किए नए टेंडर?
आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के लिए 22 जून को चार नए टेंडर जारी किए गए थे।
इसके बाद 14 जुलाई को आवेदन की अंतिम तारीख समाप्त हो गई। टेंडर का पहला चरण भी खोला जा चुका है।
साथ ही, दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी सामने आई है।
इस स्थिति को देखते हुए शिकायतकर्ता ने पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सवाल उठाया है। उसका कहना है कि नई निविदा प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है।
पुराना रेट कॉन्ट्रैक्ट क्यों चर्चा में आया?
इससे पहले 20 नवंबर 2025 को भी आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के लिए दो टेंडर जारी हुए थे।
हालांकि, उस समय टेंडर प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही। इसके बाद, पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को छह महीने के लिए बढ़ाया गया था।
अब 7 अगस्त को जारी एक आदेश को लेकर फिर सवाल उठे हैं। इसमें कुछ चुनिंदा कंपनियों से पुराने करार को लेकर राय और सुझाव मांगे जाने की बात सामने आई है।
यही वजह है कि शिकायतकर्ता ने पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
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शिकायतकर्ता ने क्या सवाल उठाए?
शिकायतकर्ता का कहना है कि नई टेंडर प्रक्रिया पहले ही अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इसके बावजूद, पुराने करार से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जरूरत समझ से परे है।
उसने आरोप लगाया है कि पुराने करार को फिर बढ़ाने से खुली प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, किसी खास कंपनी को फायदा मिलने की संभावना को लेकर भी सवाल उठाया गया है।
शिकायतकर्ता ने यह भी पूछा है कि जब नई निविदा प्रक्रिया चल रही है, तो पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर राय लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या किसी कंपनी को फायदा पहुंच सकता है?
यह सवाल शिकायतकर्ता की आपत्ति का अहम हिस्सा है। उसका आरोप है कि पुराने करार को आगे बढ़ाने से प्रतिस्पर्धा का दायरा सीमित हो सकता है।
हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि किसी कंपनी को वास्तव में फायदा पहुंचाया गया है।
इसी कारण इस मामले में जांच जरूरी हो जाती है। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई या नहीं।
CGMSC प्रबंधन ने क्या कहा?
CGMSC के एमडी रितेश अग्रवाल ने पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ाने की बात से इनकार किया है।

उनका कहना है कि फिलहाल रेट कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि नई टेंडर प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। दवाओं की खरीदी भी इसी प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ेगी।
प्रबंधन के इस बयान के बाद अब नजर नई टेंडर प्रक्रिया के अगले चरण पर है।
नई टेंडर प्रक्रिया पर क्यों टिकी नजर?
नई निविदा प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है। आवेदन की अंतिम तारीख भी निकल चुकी है। पहला चरण खोला जा चुका है।
अब, दावा-आपत्ति की प्रक्रिया भी पूरी होने की जानकारी है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के लिए अंतिम फैसला कब होगा।
वहीं, शिकायतकर्ता की मांग है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाई जाए।
CGMSC मामले में आगे क्या होगा?
फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। किसी कंपनी को फायदा पहुंचाने की बात अभी साबित नहीं हुई है।
इसलिए, अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच की मांग की है। दूसरी ओर, CGMSC प्रबंधन ने पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ाने से इनकार किया है।
अब आगे की प्रक्रिया में यह साफ होगा कि पुराने करार को लेकर वास्तव में क्या कदम उठाया गया था।
इसके अलावा, नई टेंडर प्रक्रिया कब पूरी होती है और आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी किस आधार पर होती है, इस पर भी नजर रहेगी।
दवाओं की खरीदी में पारदर्शिता क्यों जरूरी?
आयुर्वेदिक दवाएं सरकारी अस्पतालों और मरीजों से जुड़ी होती हैं। इसलिए, इनकी खरीदी में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
टेंडर प्रक्रिया में सभी योग्य कंपनियों को समान अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, नियमों का पालन भी साफ तरीके से होना चाहिए।
अगर किसी प्रक्रिया को लेकर शिकायत आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इससे न केवल विवाद दूर होगा, बल्कि खरीदी व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी बना रहेगा।
फिलहाल CGMSC में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी को लेकर यही सबसे बड़ा सवाल है कि पुराना करार और नई निविदा प्रक्रिया एक साथ क्यों चर्चा में आई।
आने वाले दिनों में जांच और CGMSC की आगे की कार्रवाई से तस्वीर और साफ हो सकती है।
