रायपुर। छत्तीसगढ़ के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने अपने निज सचिव संतोष अग्रवाल को पद से हटा दिया है। मंत्री कार्यालय की ओर से जारी आदेश में साफ लिखा है कि 7 सितंबर 2026 से उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया है। लेकिन आदेश में एक बात बड़ी चालाकी से छोड़ दी गई है, और वो है हटाए जाने की वजह। यही खामोशी अब सबसे ज्यादा चर्चा में है।

संतोष अग्रवाल मूल रूप से नागरिक आपूर्ति निगम मुख्यालय, नवा रायपुर में उप-प्रबंधक के पद पर तैनात हैं। पिछले लंबे समय से वे मंत्री के निज सचिव के तौर पर काम कर रहे थे। आदेश की एक प्रति उन्हें भी भेजी गई है, ताकि जानकारी मिल जाए। मगर वजह जानने के लिए जनता को अभी और इंतजार करना होगा।

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें पिछले साल यानी 2025 तक जाती हैं। उस समय चना और गुड़ की खरीदी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। यह खरीदी फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और नागरिक आपूर्ति निगम के जरिए हुई थी, और इसमें करोड़ों रुपये का लेन-देन शामिल था। इतनी गड़बड़ियां सामने आईं कि खुद मंत्री दयालदास बघेल को टेंडर रद्द करने का फैसला लेना पड़ा था। मामले की जांच भी कराई गई थी। अब निज सचिव के हटाए जाने के बाद यह पुराना मामला एक बार फिर लोगों की जुबान पर है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS की APL और BPL योजनाओं में भी कुछ गड़बड़ियां हुई थीं, और इनमें भी निज सचिव का नाम जुड़ता रहा है। हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें फिलहाल अफवाह से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।
खास बात यह है कि यह कार्रवाई किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि खुद मंत्री जी के अनुरोध पर की गई बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, निज सचिव के काम करने के तरीके से मंत्री जी को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ा था। दूसरी ओर, मंत्री दयालदास बघेल की छवि हमेशा से एक पारदर्शी और नियमों पर चलने वाले नेता की रही है, और यह फैसला उनकी उसी छवि को मजबूत करता नजर आ रहा है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पद से हटाए जाने के बाद संतोष अग्रवाल की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न कोई सफाई दी गई है, न किसी सवाल का जवाब मिला है। यह चुप्पी खुद में कई सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि जब कुछ छुपाने को नहीं होता, तो सफाई देने में देरी समझ से परे लगती है।
फिलहाल छत्तीसगढ़ के खाद्य विभाग में यह मामला चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। पुरानी फाइलें एक बार फिर खुलने लगी हैं, और लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला है, या इसके पीछे कोई बड़ी जांच छिपी है। इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकता है।

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