जमीन विवाद में 100 साल पुराने कब्जे का दावा, खसरा बदलने का आरोप

जमीन विवाद में 100 साल पुराने कब्जे का दावा

जशपुर/पत्थलगांव। पत्थलगांव का जमीन विवाद अब स्थानीय स्तर से निकलकर शासन के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता रवींद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार के करीब 100 साल पुराने कब्जे वाली जमीन के रिकॉर्ड में कथित तौर पर बदलाव किया गया और बाद में जमीन पर जबरन कब्जा कर उसे आगे बेच दिया गया। शिकायत में स्थानीय पुलिस की कार्रवाई से लेकर राजस्व रिकॉर्ड की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।

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शिकायतकर्ता का कहना है कि स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बाद भी जब उन्हें राहत नहीं मिली तो उन्होंने शासन के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। अब यह जमीन विवाद प्रशासन के लिए भी जांच का विषय बन गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मामले की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी।

100 साल पुराने कब्जे से जुड़ा है जमीन विवाद

शिकायतकर्ता के अनुसार पत्थलगांव क्षेत्र के एक सरकारी प्लॉट पर उनके परिवार का करीब 100 वर्षों से शांतिपूर्ण कब्जा रहा है। उनका दावा है कि इस जमीन का मूल खसरा नंबर 1160 था।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में रिकॉर्ड में बदलाव करते हुए खसरा नंबर 1159/1 दर्ज कर दिया गया। इसी कथित बदलाव को इस जमीन विवाद की सबसे बड़ी वजह बताया गया है।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि आखिर पुराने रिकॉर्ड में बदलाव किस आधार पर हुआ और इसके लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई। राजस्व रिकॉर्ड में यह बदलाव कब और किस आदेश के तहत हुआ, इसकी स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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खसरा नंबर बदलने के आरोप ने बढ़ाई हलचल

इस जमीन विवाद में सबसे गंभीर दावा खसरा नंबर बदलने को लेकर किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मूल खसरा नंबर 1160 को बाद में 1159/1 कर दिया गया।

जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर का खास महत्व होता है। ऐसे में इस बदलाव को लेकर शिकायतकर्ता ने प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कागजों में बदलाव के बाद उनके परिवार के पुराने कब्जे की स्थिति प्रभावित हुई।

हालांकि रिकॉर्ड में बदलाव किस तारीख को हुआ, किस अधिकारी या आदेश के आधार पर हुआ और इसके पीछे क्या प्रक्रिया थी, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल जमीन विवाद में यह आरोप शिकायत के आधार पर सामने आया है।

जमीन विवाद में दो नेताओं पर जबरन कब्जे के आरोप

शिकायत में बीजेपी नेता अवधेश गुप्ता और श्याम नारायण गुप्ता के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि करीब 5 से 6 महीने पहले दोनों ने कथित तौर पर संबंधित जमीन पर कब्जा कर लिया।

जशपुर जिला प्रशासन — राजस्व एवं तहसील जानकारी

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कब्जे के बाद जमीन का आगे सौदा कर दिया गया। इस जमीन विवाद में राजनीतिक रसूख के इस्तेमाल की आशंका भी शिकायत में जताई गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित लोगों का पक्ष सामने आने और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस के चक्कर के बाद शासन तक पहुंचा जमीन विवाद

शिकायतकर्ता के अनुसार उसने पहले स्थानीय पुलिस के सामने मामला उठाया था। लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उसने अब शासन के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।

पुलिस के चक्कर के बाद शासन तक पहुंचा जमीन विवाद

इस जमीन विवाद को लेकर शिकायतकर्ता का कहना है कि ऑनलाइन शिकायत के जरिए वह मामले को उच्च स्तर तक पहुंचाना चाहता है, ताकि पूरे मामले की जांच हो सके। अब प्रशासन के सामने जमीन के पुराने रिकॉर्ड, वर्तमान खसरा नंबर, कब्जे की स्थिति और कथित बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच का सवाल है।

राजनीतिक रसूख का आरोप, पुलिस पर भी उठे सवाल

इस जमीन विवाद में शिकायतकर्ता ने राजनीतिक प्रभाव का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि प्रभावशाली लोगों से जुड़े होने के कारण स्थानीय स्तर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।

शिकायतकर्ता ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि पुलिस की ओर से इस शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही सही या गलत माना जा सकता है। इसलिए इस मामले में प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट अहम होगी।

पुराने विवादों का भी शिकायत में जिक्र

शिकायत में संबंधित नेताओं से जुड़े पुराने विवादों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पहले भी गाली-गलौज, धमकी और विवादों से जुड़े मामले स्थानीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। हालांकि इन पुराने दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें भी फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।

जमीन विवाद में अब दस्तावेजों की जांच सबसे अहम

अब इस जमीन विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल राजस्व रिकॉर्ड और दस्तावेजों से जुड़े हैं। जांच में यह देखा जाना होगा कि मूल खसरा नंबर 1160 कब बदला गया, 1159/1 की एंट्री किस आधार पर हुई और इसके लिए कौन-सा आदेश जारी किया गया था।

इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि जमीन पर किसका कब्जा था, कब्जे में बदलाव कब हुआ और जमीन के कथित सौदे से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं।

यदि शिकायतकर्ता के आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो प्रशासन को आगे की कार्रवाई करनी होगी। वहीं यदि रिकॉर्ड नियमों के अनुसार बदला गया है तो उसकी पूरी प्रक्रिया भी सामने आनी चाहिए।

शासन के पोर्टल तक पहुंचा मामला, अब जांच का इंतजार

पत्थलगांव का यह जमीन विवाद अब शासन के ऑनलाइन पोर्टल तक पहुंच चुका है। शिकायतकर्ता ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 100 साल पुराने कब्जे का दावा करने वाले परिवार की बात राजस्व रिकॉर्ड से कितनी मेल खाती है और खसरा नंबर में कथित बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ।

इस जमीन विवाद में अभी आरोप और दावे सामने आए हैं। अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन यदि पुराने रिकॉर्ड, वर्तमान राजस्व दस्तावेज, कब्जे की स्थिति और कथित बिक्री की पूरी पड़ताल करता है तो इस पूरे जमीन विवाद की तस्वीर साफ हो सकती है।

फिलहाल शिकायत शासन तक पहुंच गई है और शिकायतकर्ता को जांच के नतीजे का इंतजार है। अब देखना होगा कि इस जमीन विवाद में प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और दस्तावेजों की जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

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