एक के बाद एक बिगड़ी 47 छात्राओं की तबीयत, पोटाकेबिन की रसोई और पानी अब जांच के घेरे में

सुकमा। जिले के पोलमपल्ली स्थित बालिका पोटाकेबिन में महज दो दिन के भीतर 47 छात्राएं अचानक बीमार पड़ गईं। किसी को तेज बुखार आया, किसी को उल्टियां शुरू हुईं तो किसी को दस्त की शिकायत हुई। हालत बिगड़ती देख तुरंत सभी छात्राओं को दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां एक छात्रा की स्थिति गंभीर पाए जाने पर उसे आगे के इलाज के लिए सुकमा जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा।

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स्वास्थ्य केंद्र में अब भी 23 छात्राएं भर्ती

राहत की बात यह है कि इलाज शुरू होने के बाद कई छात्राओं की हालत में सुधार आया और वे स्वस्थ होकर पोटाकेबिन लौट चुकी हैं। लेकिन 23 छात्राएं अभी भी दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र में उपचाराधीन हैं। गंभीर हालत वाली छात्रा का इलाज सुकमा जिला अस्पताल में चल रहा है, जहां चिकित्सकों की टीम उस पर विशेष नजर रखे हुए है।

350 छात्राओं के बीच फैली दहशत

पोलमपल्ली के इस पोटाकेबिन में कुल मिलाकर करीब 350 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। एक साथ 47 छात्राओं का बीमार पड़ना किसी छोटी घटना जैसा नहीं है — यह सीधे तौर पर संस्थान के भीतर की भोजन व्यवस्था, पेयजल की गुणवत्ता और साफ-सफाई के इंतजामों पर सवालिया निशान लगाता है। बाकी बची करीब 300 छात्राओं के अभिभावकों में भी अब डर और बेचैनी का माहौल है कि कहीं यह सिलसिला आगे न बढ़ जाए।

आखिर बीमारी की जड़ कहां? जांच जारी

अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे असली वजह क्या रही — दूषित भोजन, गंदा पानी, या कोई और कारण। स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरे मामले पर करीबी नजर बनाए हुए है और छात्राओं की सेहत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक कारणों को लेकर कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकेगी।

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