बलौदाबाजार स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल! फर्जी कागज से तबादले की कोशिश, 4 गिरफ्तार, जांच तेज

फर्जीवाड़ा: CMHO के फर्जी साइन से तबादला, 4 गिरफ्तार

बलौदाबाजार-भाटापारा. जिले के स्वास्थ्य महकमे में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। यहां कुछ लोगों ने मिलकर नकली तबादला पत्र बना डाला और उसे असली सरकारी कागज बताकर आगे बढ़ा दिया। जैसे ही यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आया, पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और चार लोगों को हिरासत में ले लिया।

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पलारी थाना पुलिस ने इस पूरे खेल का भंडाफोड़ किया है। जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनमें एक गांव का चिकित्सा सहायक भी शामिल है। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल का नाम भी इस फर्जीवाड़े में जुड़ा है। इनके अलावा दो और गांव के चिकित्सक भी इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल बताए जा रहे हैं।

कैसे हुआ यह पूरा फर्जीवाड़ा

पुलिस सूत्रों की मानें तो इन आरोपियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ के दस्तखत की नकल तैयार की। इन्हीं नकली दस्तखतों और गढ़े हुए कागजों के सहारे एक तबादला पत्र बनाया गया, जो देखने में बिल्कुल असली सरकारी दस्तावेज जैसा लगता था। इस नकली पत्र को बाद में सच्चा सरकारी आदेश बताकर पेश किया गया, ताकि किसी को शक न हो।

फर्जीवाड़ा : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ के दस्तखत की नकल

यह पूरा फर्जीवाड़ा तब खुलकर सामने आया, जब स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक तबादला पत्र की जांच की जा रही थी। जांच के दौरान अधिकारियों को इस कागज की सच्चाई पर शक हुआ। जब बारीकी से पड़ताल शुरू हुई, तो पता चला कि दस्तखत नकली हैं और पूरा दस्तावेज ही गढ़ा हुआ है। यह जानकारी मिलते ही मामला गंभीर माना गया और पुलिस ने बिना देर किए जांच शुरू कर दी।

फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई

पलारी पुलिस ने इस फर्जीवाड़े की परतें खोलने के लिए कागजातों की गहराई से छानबीन की। साथ ही शक के घेरे में आए लोगों से पूछताछ भी की गई। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और हाथ लगे सबूतों के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को दबोच लिया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने जानबूझकर और सोची-समझी योजना के तहत यह गढ़ा हुआ कागज तैयार किया। इसके बाद उसे असली दस्तावेज बताकर इस्तेमाल में लाया गया। यानी यह कोई भूल-चूक नहीं, बल्कि पूरी तरह से एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा प्रतीत होता है।

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किसे मिलना था फायदा, अब यही तलाश रही पुलिस

अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस फर्जीवाड़े के पीछे असली मकसद क्या था और इससे फायदा किसे पहुंचाना था। पुलिस इसी सवाल का जवाब ढूंढने में जुटी है। चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी इस पूरे मामले की कड़ियों को आपस में जोड़ने का काम कर रही है।

जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस फर्जीवाड़े का पूरा मास्टरमाइंड कौन है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इस नकली तबादला पत्र का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। पुलिस इस बात को लेकर भी सतर्क है कि कहीं इस पूरे फर्जीवाड़े में कोई और व्यक्ति तो शामिल नहीं है, जो अभी तक पर्दे के पीछे छिपा हुआ है।

बारीकी से हो रही है दस्तावेजों की जांच

पुलिस अब जब्त किए गए कागजातों की एक-एक कड़ी को बारीकी से जांच रही है। इसके साथ ही गिरफ्तार किए गए सभी लोगों से लगातार पूछताछ जारी है, ताकि यह फर्जीवाड़ा कैसे रचा गया और इसे कैसे इस्तेमाल में लाया गया, इसकी पूरी सच्चाई सामने आ सके।

पुलिस का मानना है कि पूछताछ में मिलने वाली हर छोटी-बड़ी जानकारी इस फर्जीवाड़े की गुत्थी सुलझाने में मददगार साबित होगी। यही वजह है कि पुलिस टीम कोई भी सुराग हाथ से जाने नहीं देना चाहती।

स्वास्थ्य विभाग की साख पर उठे सवाल

स्वास्थ्य विभाग जैसे अहम और संवेदनशील सरकारी महकमे के दस्तावेज में इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आना अपने आप में बड़ी बात है। नकली दस्तखत और गढ़े हुए कागजों का इस्तेमाल यह दिखाता है कि विभाग की कार्यप्रणाली में कहीं न कहीं कमजोर कड़ियां मौजूद हैं, जिनका फायदा उठाकर इस तरह का फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया।

बलौदाबाजार-भाटापारा जिला प्रशासन की स्वास्थ्य विभाग वेबसाइट

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर सरकारी दफ्तरों में इस तरह के कागज कैसे तैयार हो जाते हैं और इन्हें असली दस्तावेज के तौर पर पेश करने में इतनी आसानी कैसे हो जाती है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विभाग के भीतर से भी किसी की मिलीभगत रही होगी, जिसके बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कर पाना मुश्किल था।

आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल पुलिस की जांच लगातार जारी है और आने वाले दिनों में इस फर्जीवाड़े से जुड़े और भी कई राज खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस का दावा है कि जांच में जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इस फर्जीवाड़े के तार कहां-कहां तक जुड़े हुए हैं और क्या भविष्य में इसमें और लोगों के नाम भी सामने आते हैं। एक बात तो साफ है कि यह मामला सिर्फ चार गिरफ्तारियों तक सिमटने वाला नहीं लगता, बल्कि आने वाले समय में इस फर्जीवाड़े की पूरी कहानी परत-दर-परत खुलने की संभावना जताई जा रही है।

पुलिस प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि अगर उनके पास इस फर्जीवाड़े से जुड़ी कोई भी जानकारी हो, तो वे बेझिझक पुलिस को सूचित करें, ताकि जांच को और तेज गति दी जा सके और दोषियों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

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