झोलाछाप डॉक्टर के इंजेक्शन से 3 साल के मासूम की मौत के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया। घर में चल रहे क्लिनिक पर भी दबिश दी गई।
बलरामपुर। 3 वर्षीय मासूम की मौत के मामले में पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। बच्चे की मौत के बाद टीम ने सरनाडीह में झोलाछाप डॉक्टर बालेश्वर सिंह के घर पर दबिश दी। बताया जा रहा है कि इसी घर में कथित तौर पर क्लिनिक चलाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने झोलाछाप डॉक्टर को हिरासत में ले लिया है।
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मामला उस समय सामने आया जब झोलाछाप डॉक्टर बालेश्वर सिंह द्वारा बच्चे को इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसर गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मामले में मर्ग कायम किया और जांच शुरू कर दी।
इंजेक्शन लगाने के बाद 3 साल के बच्चे की मौत
जानकारी के मुताबिक, 3 वर्षीय मासूम को इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टर बालेश्वर सिंह के पास ले जाया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ समय बाद बच्चे की मौत हो गई।
मासूम की मौत के बाद परिजनों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मर्ग कायम किया। इसके बाद बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद बच्चे का शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
झोलाछाप डॉक्टर के घर पुलिस की दबिश
मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने झोलाछाप डॉक्टर बालेश्वर सिंह के घर पर दबिश दी। टीम को जानकारी मिली थी कि घर में ही कथित तौर पर क्लिनिक संचालित किया जा रहा था।
प्रशासन और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर क्लिनिक की जांच की। इस दौरान इलाज से जुड़ी गतिविधियों और वहां मौजूद सामान की भी जानकारी जुटाई गई।

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झोलाछाप डॉक्टर के घर पर हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके में भी चर्चा तेज हो गई। स्थानीय स्तर पर बिना उचित अनुमति या योग्यता के इलाज किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कार्रवाई के दौरान पैरालाइसिस का दावा
बताया जा रहा है कि जब पुलिस और प्रशासन की टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची तो झोलाछाप डॉक्टर बालेश्वर सिंह ने अपने आप को पैरालाइसिस से पीड़ित बताया।
मौके पर वह काफी देर तक इसी तरह की स्थिति दिखाता रहा। टीम के सामने उसकी गतिविधियों को लेकर काफी देर तक घटनाक्रम चलता रहा। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस अब झोलाछाप डॉक्टर से मामले को लेकर पूछताछ कर सकती है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि वह किस आधार पर लोगों का इलाज कर रहा था और उसके पास इलाज करने के लिए जरूरी योग्यता और अनुमति थी या नहीं।
अवैध क्लिनिक को लेकर भी जांच
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ मासूम की मौत तक सीमित नहीं है। घर में संचालित बताए जा रहे कथित क्लिनिक को लेकर भी जांच की जा रही है।
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प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर सकता है कि झोलाछाप डॉक्टर किस तरह से मरीजों का इलाज करता था। क्लिनिक के संचालन से जुड़े दस्तावेज, अनुमति और अन्य जरूरी जानकारी की जांच भी की जा सकती है।
अगर जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि अभी मामले की जांच चल रही है और अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच
मासूम की मौत के बाद पुलिस ने मर्ग कायम किया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस जांच में अहम भूमिका निभा सकती है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बच्चे को किस बीमारी के इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाया गया था। उसे कौन सा इंजेक्शन लगाया गया, इंजेक्शन के बाद बच्चे की हालत किस तरह बिगड़ी और मौत की वास्तविक वजह क्या रही, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा सकती है।
इसके अलावा बच्चे के परिजनों और घटना के समय मौजूद लोगों से भी जानकारी ली जा सकती है।
हिरासत में लिया गया झोलाछाप डॉक्टर
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए झोलाछाप डॉक्टर बालेश्वर सिंह को हिरासत में ले लिया है। हिरासत के बाद मामले में पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस की ओर से मामले की जांच जारी है। बच्चे की मौत के सही कारण और इलाज में हुई किसी संभावित लापरवाही की स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
लोगों ने कार्रवाई की मांग की
3 साल के मासूम की मौत के बाद इलाके में लोगों के बीच भी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना उचित योग्यता और अनुमति के इलाज करने वाले लोगों पर प्रशासन को नजर रखनी चाहिए।
लोगों की मांग है कि अगर जांच में झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही क्षेत्र में ऐसे दूसरे लोगों की भी जांच होनी चाहिए, जो बिना जरूरी योग्यता के मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
मासूम की मौत ने एक बार फिर गांव और छोटे इलाकों में बिना पर्याप्त सुविधा के चल रहे इलाज के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
फिलहाल झोलाछाप डॉक्टर पुलिस हिरासत में है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि मासूम की मौत की असली वजह क्या थी और इलाज के दौरान कोई लापरवाही हुई थी या नहीं।

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