सूरजपुर/रामानुजनगर। सोमवार 24 अगस्त का दिन रामानुजनगर के लिए किसी तूफान से कम नहीं रहा। भूनेश्वरपुर कन्या छात्रावास की मासूम आदिवासी बेटियां, जिन्हें सरकारी संरक्षण में पढ़ना-बढ़ना था, वे अपने ही छात्रावास के खिलाफ सड़क पर उतर आईं। रामानुजनगर-कालुवा स्टेट हाईवे पर बैठकर छात्राओं ने “हमें खाना दो, सुरक्षा दो” के नारे लगाए। भीषण धूप में आंखों से आंसू बहाती इन बेटियों का दर्द देखकर हर किसी का कलेजा कांप गया। भूनेश्वरपुर कन्या छात्रावास की यह तस्वीर बताती है कि सरकारी योजनाएं कागजों में कितनी सुंदर और जमीन पर कितनी बदसूरत हो सकती हैं।
कन्या छात्रावास में सड़ा चावल, जिंदगी में सड़ता भरोसा
छात्राओं का सीधा आरोप है कि छात्रावास में निर्धारित मेन्यू सिर्फ कागज़ों की शोभा बनकर रह गया है। असल थाली में सड़े-गले चावल, घटिया सब्जियां और पानी जैसी पतली दाल परोसी जा रही है। साबुन, तेल, टूथपेस्ट जैसी बुनियादी जरूरतों तक के लिए बेटियां तरस रही हैं। जिस उम्र में इन बच्चियों को सिर्फ पढ़ाई की चिंता करनी चाहिए, उस उम्र में वे रोटी और सुरक्षा की लड़ाई लड़ रही हैं। भूनेश्वरपुर कन्या छात्रावास की यह हालत सरकारी सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है। सूरजपुर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट

अधीक्षिका गायब, “बाहरी लड़का” चला रहा छात्रावास?
मामला यहीं नहीं रुकता। छात्राओं ने सबसे गंभीर आरोप छात्रावास की सुरक्षा को लेकर लगाया। उनका कहना है कि अधीक्षिका अक्सर नदारद रहती हैं, और उनकी गैरमौजूदगी में उनका 23 वर्षीय बेटा छात्रावास के कामकाज में दखल देता है। एक कन्या छात्रावास में किसी बाहरी पुरुष का इस तरह हस्तक्षेप सीधे-सीधे बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। भूनेश्वरपुर कन्या छात्रावास प्रबंधन पर उठे ये सवाल अब सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर चूक की श्रेणी में आ चुके हैं।
कन्या छात्रावास में टपकती छत, खराब पंखे — यहां बेटियां रहें कैसे?
छात्राओं ने भवन की बदहाली को लेकर भी प्रशासन को आईना दिखाया। बारिश में छत से पानी टपकता है, गर्मी में पंखे खराब पड़े रहते हैं और सोने के लिए पर्याप्त बिस्तर तक नहीं हैं। भूनेश्वरपुर कन्या छात्रावास की यह दुर्दशा बताती है कि जिन योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जाता है, उनकी हकीकत जमीन पर कितनी अलग है। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग, छत्तीसगढ़
गांव उठ खड़ा हुआ, नेता पहुंचे समर्थन में
छात्राओं का दर्द देख गांव भी उमड़ पड़ा। जिला मीडिया प्रभारी अविनाश साहू, विक्की यादव, हुसैन अंसारी, सुमंत राजवाड़े समेत कई स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और छात्राओं की मांगों का समर्थन किया। कांग्रेस नेता अविनाश साहू ने साफ कहा कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बेटियों की सुरक्षा और सम्मान का है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कन्या छात्रावास मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो कलेक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। IGKV पेपर लीक: गोपनीयता मॉडल फेल, अब आधे घंटे में भेजा जाएगा प्रश्नपत्र!
प्रशासन की दौड़, फिलहाल आश्वासन पर थमा गुस्सा
हंगामे की खबर लगते ही जिला प्रशासन की टीम मौके पर दौड़ी आई। अधिकारियों ने छात्राओं की बात सुनी और जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद प्रदर्शन खत्म हुआ। लेकिन सवाल बरकरार है — क्या यह सिर्फ फिलहाल की खामोशी है, या वाकई भूनेश्वरपुर कन्या छात्रावास की सूरत बदलेगी?
छात्राओं और ग्रामीणों की मांग साफ है — अधीक्षिका की जांच हो, बाहरी हस्तक्षेप बंद हो, राशन-स्टॉक रजिस्टर का सत्यापन हो, पौष्टिक भोजन मिले और भवन की मरम्मत हो। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि भूनेश्वरपुर कन्या छात्रावास की बेटियों को इंसाफ मिलता है, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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