तबादला आदेश विवाद: कर्मचारी का स्कूल ट्रांसफर हुआ, फिर भी जिला शिक्षा कार्यालय नहीं छोड़ा! मनमर्जी के मालिक बन बैठे ?

रायगढ़। एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग का साफ-साफ तबादला आदेश, दूसरी तरफ रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग की चुप्पी — और बीच में एक कर्मचारी हरिशंकर बरेठ, जो हफ्तों बाद भी अपनी नई पोस्टिंग वाली जगह हाटी स्कूल नहीं पहुंचे। रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग में इन दिनों बस यही तबादला विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल सीधा है — जब तबादला आदेश कागज पर साफ लिखा है, तो उसे मानने में इतनी देर क्यों? सुकमा में रिश्वतखोर बीईओ की करतूत उजागर, शिक्षिका ने ही बिछा दिया जाल!

तबादला आदेश तो साफ है, पर पालन कहीं दिख नहीं रहा

बात है 6 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी हुए एक सरकारी आदेश की, जिसका नंबर है ESTB-102/756/2026/20-3। इस तबादला आदेश में लिखा है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, रायगढ़ में सहायक ग्रेड-2 के पद पर काम कर रहे हरिशंकर बरेठ का तबादला अब शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हाटी, जिला रायगढ़ में कर दिया गया है। आदेश में लिखा है — “तत्काल प्रभाव से” और “आगामी आदेश तक अस्थायी तौर पर नई जगह पदस्थ किया जाए।” यानी शासन की मंशा बिल्कुल साफ थी — देर बिल्कुल नहीं करनी थी। स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़

तबादला आदेश

तबादला आदेश में वर्तमान पदस्थापना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायगढ़ और नवीन पदस्थापना हाटी स्कूल, दोनों साफ-साफ दर्ज हैं। तबादले की वजह भी बता दी गई है, “प्रशासनिक आधार पर।” यानी न कोई जांच चल रही थी, न कोई सजा दी जा रही थी, बस एक सीधा प्रशासनिक फैसला था। ऐसे मामलों में तो आमतौर पर कर्मचारी को कुछ ही दिन में रिलीव करके नई जगह भेज दिया जाता है। पर रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग में तो मामला बिल्कुल उल्टा चल रहा है।

हरिशंकर बरेठ को रिलीव किया या नहीं?

तबादला आदेश आए हफ्तों हो चुके हैं, लेकिन अब तक ये साफ नहीं हो पाया कि हरिशंकर बरेठ को हाटी स्कूल जॉइन करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायगढ़ से कार्यमुक्त यानी रिलीव किया गया या नहीं। दफ्तर के अंदर के सूत्र दबी जुबान में कह रहे हैं कि हरिशंकर बरेठ अब भी जिला शिक्षा कार्यालय रायगढ़ में ही बैठे हैं और वहीं काम कर रहे हैं, जबकि उनकी नई पोस्टिंग हाटी स्कूल में है। अगर ये बात सच है, तो साफ समझ लीजिए, ये शासन के तबादला आदेश को सीधे-सीधे नजरअंदाज करने वाली बात है।

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अब सवाल ये उठता है, किसकी परमिशन से एक ऐसे कर्मचारी को उसी दफ्तर में बिठाकर काम कराया जा रहा है, जहां से उसका तबादला हो चुका है? क्या ये फैसला जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायगढ़ के किसी बड़े अफसर ने लिया, या फिर बिना किसी लिखित आदेश के ही ये व्यवस्था चल रही है? छत्तीसगढ़ ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल

कोई संशोधन आदेश, कोई स्थगन आदेश ! कुछ भी सामने नहीं आया

आमतौर पर जब किसी तबादला आदेश में कोई बदलाव होता है, तो शासन की तरफ से एक नया संशोधन आदेश या स्थगन आदेश जारी होता है — या तो तबादला रोका जाता है, या नई पदस्थापना बदली जाती है, और ये सब कागज पर दर्ज होता है ताकि बाद में कोई सवाल न उठे। लेकिन हरिशंकर बरेठ के मामले में अब तक ऐसा कोई संशोधन आदेश या स्थगन आदेश सार्वजनिक नहीं हुआ है।

अगर सच में शासन की तरफ से कोई ऐसा आदेश निकला है, तो रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग उसे छुपा क्यों रहा है? और अगर कोई संशोधन आदेश निकला ही नहीं है, तो फिर मूल तबादला आदेश को नजरअंदाज करने की वजह क्या है? ये सवाल अब सिर्फ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायगढ़ के गलियारों तक सीमित नहीं रहा, पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है।

“बाकी कर्मचारियों को तुरंत भेज दिया जाता है, फिर हरिशंकर बरेठ के साथ ये ढील क्यों?”

रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि जब भी शासन का तबादला आदेश आता है, ज्यादातर कर्मचारियों को बिना देर किए कार्यमुक्त कर दिया जाता है और वो नई जगह जॉइन कर लेते हैं। तो सवाल ये है कि अगर हरिशंकर बरेठ के मामले में इतनी देर हो रही है, तो इसकी वजह लोगों को पता चलनी चाहिए।

रायगढ़ जिला शिक्षा कार्यालय

ये आरोप भी लग रहे हैं कि रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग में तबादला आदेशों को लागू करने में भेदभाव हो रहा है — यानी कुछ कर्मचारियों के लिए आदेश “तुरंत” लागू हो जाता है, जबकि कुछ खास कर्मचारियों को महीनों तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायगढ़ में ही रखा जाता है। अगर ये आरोप सच निकलता है, तो ये सिर्फ नियम तोड़ने की बात नहीं, बल्कि पूरे जिला शिक्षा विभाग की साख पर सवाल है।

क्या रायगढ़ जिला शिक्षा कार्यालय को शासन के तबादला आदेश पर रोक लगाने का हक है?

यही सबसे बड़ा सवाल है। छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग का आदेश साफ-साफ बताता है कि किसे कहां भेजना है। ऐसे तबादला आदेश को लागू कराना जिला स्तर के अफसरों की जिम्मेदारी होती है, न कि उसमें बदलाव करना या टालते रहना। जब तक शासन से खुद कोई नया संशोधन आदेश न आए, जिला शिक्षा कार्यालय रायगढ़ को तबादला आदेश रोकने का कोई हक नहीं होता।

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तो क्या रायगढ़ जिला शिक्षा कार्यालय ने अपने हक से बाहर जाकर ये फैसला ले लिया कि हरिशंकर बरेठ फिलहाल यहीं रहेंगे और हाटी स्कूल नहीं जाएंगे? ये सवाल अब दफ्तर के अंदर और बाहर, दोनों जगह गूंज रहा है।

तबादला आदेश पर पारदर्शिता कहां गई, जवाब कौन देगा?

इस पूरे तबादला विवाद में सबसे बड़ी बात यही है, जब आदेश सबके सामने है, कागज मौजूद है, तो फिर उसे लागू किया गया या नहीं, ये बताने में रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग को इतनी हिचक क्यों? लोगों को साफ जवाब चाहिए, गोलमोल बातें या चुप्पी नहीं।

जिला शिक्षा विभाग रायगढ़ को अब खुलकर तीन बातें साफ करनी चाहिए:

  1. हरिशंकर बरेठ को हाटी स्कूल जॉइन करने के लिए कब कार्यमुक्त किया गया? अगर अब तक नहीं किया गया, तो देरी की वजह क्या है?
  2. अगर उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायगढ़ में ही रोका गया है, तो ये किसकी परमिशन से हुआ? क्या इसका कोई लिखित सबूत है?
  3. क्या शासन के मूल तबादला आदेश में कोई संशोधन आदेश या स्थगन आदेश आया है? अगर हां, तो वो सामने क्यों नहीं लाया गया?

अब गेंद रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग के पाले में

छत्तीसगढ़ शासन का तबादला आदेश आए काफी समय हो चुका है, लेकिन अब तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। हरिशंकर बरेठ का ये मामला अब सिर्फ एक कर्मचारी के तबादले तक सीमित नहीं रहा — ये सवाल बन गया है कि क्या रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग जैसा सरकारी दफ्तर अपने ही ऊपर के आदेश मानता भी है या नहीं।

अब देखना ये है कि रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग इस पूरे तबादला विवाद पर क्या सफाई देता है, और शासन का आदेश आखिर कब तक लागू कराया जाता है। जब तक साफ जवाब नहीं आता, ये सवाल यूं ही घूमता रहेगा — क्या रायगढ़ जिला शिक्षा दफ्तर छत्तीसगढ़ शासन के आदेश से भी बड़ा है?

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